• दहेज़ वो माता-पिता देते हैं, जिन्हें यह बात पता होती है कि उनकी बेटी लायक नहीं है(at age of 18-21, जब उनकी शादी हो रही होती है) किसी घर की responsibility सँभालने के, और उसकी उस नाकाबिलियत की वजह से वह अपने ससुराल वालों को निराश करेगी, जिससे ससुराल में सभी के साथ उसका रिश्ता खराब होगा।
• दहेज़ लेने वाले ऐसे ही माता-पिता को अपने जाल में फंसाते है जिनकी बेटियाँ उनके लिए बोझ होतीं है और रिश्ते तथा जिम्मेदारियाँ सँभालने के काबिल नहीं होती। जिसके चलते वो माता-पिता उन्हें किसी भी कीमत में जल्दी से जल्दी छुटकारा पाना चाहते हैं। और, वैसे ही लोगों को ढूंढते हैं वो दहेज़ के लालची लोग, जिन माता-पिता की बेटी में कोई कमी निकाल सके और तोल-मोल करके ज्यादा से ज्यादा तिलक ऐंठ सके।
• मेरी हर माता पिता से विनती है कि कृपा करके, अगर आप 8-10 लाख रुपये तिलक दे सकते हो, तो उन्हीं पैसे से अपनी बेटी को पढ़ाओ-लिखाओ और इस काबिल बनाओ कि वो अपने जीवन के कठिन से कठिन परिस्थिति को भी सहजता से जीने और पार करने में सक्षम हो। फिर अगर आप किसी साधारण परिवार के भी अच्छे लड़के से अपनी बेटी की शादी करवाओगे, तो वो बिना दहेज के भी आपके योग्य बेटी का सम्मान और आदर करेंगे।
10th October, 2020 A.D.
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