Nature की प्रकृति है, to duplicate itself. इसलिए nature का हर एक living being प्रजनन के पीछे भागता है। चाहे वह कोई जीव हो, जंतु हो, पेड़ पौधे, कीट, आदि।
But engery stability चाहता है। इंसान का मस्तिष्क सिर्फ भौतिक वस्तुओं से नहीं, बल्कि flow of energy से जीवित रहता है। इसलिए मन स्थिरता चाहता है।
प्रजनन की तीव्र इक्षा शरीर में चेतना की कमी और प्राकृतिक गुणों को दर्शाता है।
जबकि कोई भी जीव जितना ज्यादा चैतन्य होता है, वह स्थिर जीवन चाहता है।
युवाओं में चैतन्य की कमी होती है, इसलिए उनके अन्दर यह इक्षा उत्पन्न होती है कि उनको शारीरिक और भावात्मक रूप से partner चाहिए।
परन्तु जिनमें चैतन्य का विकास होता है वो मानसिक स्थिरता चाहते हैं। वो किसी को भी partner नहीं बनाते हैं। लोगों से भी कम घुलते मिलते हैं। अपना अधिकतम समय एकांत में बिताना पसंद करते हैं।
सिर्फ इंसान प्रकृति के मूल गुण को supress कर चैतन्य शांति की ओर नहीं जाते हैं, बल्कि ऐसे कई अन्य जीव जैसे भेड़िए, हंस, आदि भी; जिनमें बुद्धिमत्ता होती है, वो प्रजनन के लिए strong साथी नहीं चुनते हैं बल्कि वो या तो सिर्फ एक के साथ रहते हैं या अकेले जीवन जीते हैं।
-AnAlone Krishna
27th May, 2026 A.D.
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