"सिर्फ अपने रिश्ते ही अपने होते हैं।"
अभी कुछ वक़्त पहले इस जीवन का बहुत ही कड़वा experience मिला। हमारी एक family friends है या थी, यह मैं कह नहीं सकता हूँ। मेरे दादाजी का उनके बुजुर्ग से अच्छी friendship थी। मेरे पापा और uncle का उनके हमउम्र से दोस्ती रहा है। मैं उस परिवार के अपने उम्र के बच्चों के साथ खेल-कूद कर बड़ा हुआ हूँ। जबतक दादाजी जिंदा थे, उन्हें दोस्त अपने परिवार के हर एक function में invite किया करते थे। पर अब जब मेरे दादाजी नहीं रहे; उनके उस दोस्त के मन में शायद यह ख़्याल आया होगा कि उनका जिनसे रिश्ता था, वो तो अब रहा नहीं; जो हमारे परिवार को lead करते हैं, (मेरे पापा) उनसे उनके बच्चों का रिश्ता है, तो वो तो फिर हमें invite करेंगे ही; इसलिए शायद वो अपने घर परिवार की शादी में invite नहीं किए। मेरे पापा के जो हमउम्र थे, वो सोंचे होंगे कि उनके घर के बुजुर्ग तो हमेशा हमें invite करते ही है, शायद इसलिए वो हमें खुद से invite करने के बारे में नहीं सोचे। जो मेरे उम्र के बच्चे थे उस घर में, वो अपने बड़े के होते हुए तो मेरी family को invite करने आते नहीं।
हमें सब पता चल रहा था कि उनके घर में क्या हो रहा है। पर हर बात हमें late पता चल रहा था, और किसी और से पता चल रहा था। और at the end, शादी हो गई पर हमें कोई invite नहीं आया।
मैं गुस्सा या नाराज नहीं हूँ कि उनकी बातें हमें कहीं और से पता चलता रहा। I understand, their feelings very well. बस इस बात का realisation hurt कर रहा है कि वो हमारे परिवार को मानते थे क्योंकि मेरे दादाजी से रिश्ता था। अगर सच में मेरे पापा या uncle का उनके हमउम्र से personal friendship होता तो वो मेरे पापा या uncle को याद करते। अगर मेरे उम्र के बच्चे मुझसे personally दोस्ती रखते तो वो मुझसे बात करते। वो सभी हमसे रिश्ते सिर्फ इसलिए निभा रहे थे क्योंकि वो अपने बड़ों को हमारी family से यह करते देख रहे थे। वो दिल शायद नहीं कर रहे थे।
अब मुझे डर लग रहा है, जैसे मेरे दादाजी के मरने के बाद उनकी वजह से जो रिश्ते थे, वो छूट रहे है; वैसे ही जो रिश्ते पापा की वजह से है, उनके बाद वो रिश्ते भी छूट जाएंगे। मुझे अब समझ आ गया है कि रिश्ते विरासत में नहीं मिलता, बनाना पड़ता है। वैसे तो मैं पहले भी धन के साथ-साथ लोग भी कमाना चाहता था। पर अब इसका अहमियत और deeply समझ आ रहा है। जो दादाजी के भाई या दोस्त थे, वो सिर्फ दादाजी के भाई या दोस्त थे। जो मेरे पापा के भाई, दोस्त या चाचा है, वो सिर्फ मेरे पापा के भाई, दोस्त या चाचा है। मुझे उन्हें दादाजी, चाचा या उनके बच्चों को भाई या दोस्त बनाना होगा। मुझे रिश्ते कमाना होगा। जो रिश्ते मेरे life में किसी और की वजह से है, वो रिश्ते मेरे नहीं है।
मैं अगर यह नाराजगी लेकर बैठूंगा कि उन्होंने मुझे याद नहीं किया तो मैं भी उन्हें याद नहीं करूंगा तो यह रिश्ता सच में छूट जाएगा। पर अगर वो मुझे चाहिए तो मुझे पहल करना होगा। मुझे अपने रिश्ते खुद बनाना होगा। सिर्फ धन कमाना, संपत्ति बनाना, नाम या पहचान बनाना career का goal नहीं है, लोगों के दिल में जगह बनाना भी life के लिए जरूरी है।
-AnAlone Krishna
3rd May, 2026 A.D.

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