नकली दोस्त, कृष्ण कुणाल की लिखी कविता

Saturday, December 24, 2016 0 Comments

_ नकली दोस्त _

तूम हो यहाँ, मैं हूँ यहाँ,
ना तेरा हूँ मैं, ना मेरे तूम ।
साथ चल रहा रास्ता हमारा,
अलग-अलग हो जायेगा गूम ।।

पास भी आए और न दोस्त बनें,
हसके दो-चार बातें भी की ।
मैंने कहा अपनी और तूमने कहा अपनी ,
फिर भी ना तेरा मैं और ना मेरे तूम ।।

उड़ जायेगा वो परींदा ,
जो घूमते हुए है मूझतक आया ।
मुझे कहता है कि संग चलूँ उसके ,
तय है मुझे वह समझ न पाया ।।

उसकी फीतरत में हैं घूमना ,
आज यहाँ तो कल कहाँ ।
मुझसे कहता है कि ले जायेगा मुझको ,
साथ लेकर वह रहता हैं जहाँ ।।

मेरी हरकत पसंद नही तो ,
मुझसे दूर ही रहा कर ऐ दोस्त ।
क्योकि ना कभी बदलूँगा मैं ,
और ना कभी मानोगे तूम ।।

-Krishna Kunal
24/12/2016

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