Day 94: About "सलोनी की खुशबू" | Diary of AnAlone Krishna

Friday, June 12, 2026 0 Comments

Day 94: About "सलोनी की खुशबू"

Note:- इसे कहानी को पढ़ने के बाद ही पढ़ें।


इस कहानी को पढ़ने के बाद readers के मन में कई सवाल आने चाहिए थे, जो कि इसे publish करने के एक साल से ज्यादा बीतने के बाद भी मुझसे किसी ने भी नहीं पूछा। इसके अलावा कहानी के अंत में मैं readers से कुछ सवाल किया था, जिसका मुझे सिर्फ एक व्यक्ति के द्वारा response मिला। इससे साबित होता है कि पढ़ने वाले इसे पूरा और ध्यान से नहीं पढ़े हैं। जो सवाल readers के द्वारा पूछे जाने चाहिए थे, भविष्य में शायद कोई पढ़े और उनके मन ये सवाल आए। शायद उस वक्त मैं इन्हें जवाब देने के लिए ना रहूँ। इसलिए "सलोनी की खुशबू" से related जितने भी सवाल होंगे, उन्हें मैं पहले ही बता दे रहा हूँ।

प्र.1 : सलोनी के गर्भ में किसका बच्चा था ?

उत्तर: "Life की परछाई: Chapter 7, 8" में यह बताया गया है कि सलोनी के गर्भ में उसके पति का ही बच्चा था।


प्र.2 : तो फिर सलोनी का पति इस बात को मान क्यों नहीं रहा था ? वह क्यों कह रहा था कि सलोनी के गर्भ का बच्चा उसका नहीं है ?

उत्तर: सलोनी का पति जबरदस्ती सलोनी से संबंध बनाया था। साथ ही उसे उसके मर्जी के खिलाफ सलोनी से शादी करना पड़ा था। अगर वह इस बात को मान लेता कि सलोनी के गर्भ में पलने वाला बच्चा उसका है- तो उसके सामने दो सवाल आते- क्या वह सलोनी को अपना लिया, या वह बदला लेने के लिए उसके साथ जबरदस्ती किया ? दोनों ही case में उसके मान सम्मान को ठेस पहुंचता। इसलिए वह यह झूठ बोलता था कि वह कभी सलोनी के साथ संबंध नहीं बनाया है। और उसके गर्भ में पलने वाले बच्चे को किसी और का बच्चा बोलता था ताकि वह यह जता सके कि वह सलोनी को नहीं अपनाया है।


प्र.3 : सलोनी की सास और ननंद सलोनी को इतना क्यों सताती थी ?

उत्तर: सलोनी की सास और ननंद सलोनी के पति की बात को सच मानती थी। इसलिए वो सलोनी से घृणा करते थी और किसी भी तरह उससे छुटकारा पाना चाहती थी।


प्र.4 : सलोनी की सास को सलोनी के पति पर इतना भरोसा क्यों था जो वो यह मानती थी कि सलोनी के गर्भ में किसी और का बच्चा है ?

उत्तर: इसके तीन कारण हो सकते हैं- पहला, हर माँ की तरह सलोनी की सास अपने बेटे पर आँख मूंद कर भरोसा करती थी। दूसरा, अपने बेटे के नापसंद को उसपर थोपे जाने से वह मोह में अंधी होकर अपने बेटे के मन की खुशी के लिए उसको support कर रही थी। तीसरा, प्रजनन विज्ञान के ज्ञान के ना होने के कारण वह अपने बेटे की बात को आसानी से मान गई। 


मैं, AnAlone Krishna, एक Gynecologist का interview देखा था। उसमें doctor एक स्त्री के बारे में बता रही थी कि उसका शादी के सिर्फ साथ महीने हुए हैं, पर test में बच्चा साढ़े सात महीना का आ रहा था। जिसके बारे में वह doctor बताई कि-

a. मेडिकल साइंस में गर्भावस्था के दिनों की गिनती आपके आखिरी मासिक धर्म (Last Menstrual Period - LMP) के पहले दिन से शुरू की जाती है, न कि संबंध बनाने (Conception) वाले दिन से।

b. अल्ट्रासाउंड मशीन बच्चे के हाथ, पैर, सिर और पेट के आकार (Fetal Biometry) को नापकर उसकी उम्र का अनुमान लगाती है। अगर बच्चा थोड़ा स्वस्थ या तेजी से बढ़ रहा है, तो मशीन उसकी उम्र वास्तविक समय से 15-20 दिन ज्यादा बता सकती है।

c. कई बार स्वास्थ में गड़बड़ी के वजह से पूर्व प्रसव भी हो जाता है।

इस topic को आप Google या कहीं और से detail में समझ सकते हो। मुझे अपनी story में सलोनी का ऐसा situation दिखाना था, जिससे अंत में सलोनी वो step लेती जो वह ली, इसलिए जितना worst senerio तक मैं ले जाना जरूरी समझा, मैं सलोनी के story को लेकर गया।


प्र.5: मैं सीधा बोल सकता था कि सलोनी के गर्भ में किसी और का बच्चा था, पर मुझे अपनी story में उसे defend करने की क्या जरूरत थी ? मैं सलोनी के character को सच में characterless क्यूँ नहीं लिखा ?

उत्तर: सलोनी की कहानी "Life की परछाई" से शुरू होती है। वह अभिलाषा की बचपन की सहेली है। इनका moral or ethical development शुरू से हुआ है। साथ ही यह जानने के बाद भी कि खुशबू किसकी बेटी है, उसे अभिषा अपनाए और अपना नया नाम दे। इसके लिए जरूरी था कि अभिलाषा और सलोनी के बीच की friendship खराब ना हो। इस वजह से मैं सलोनी के character को characterless नहीं बना सकता था। साथ ही जो सलोनी अंत में sacrifice की अपनी बेटी के लिए, वह अगर एक characterless होती तो यह नहीं कर पाती।


प्र.6: मैं सलोनी का story ऐसा लिखा क्यूँ ? उसके साथ इतना बुरा क्यूँ हुआ, और उसे मैं story में इस तरह क्यों मार दिया ?

उत्तर: इसके दो कारण थे- पहला, ताकि सलोनी की बेटी को अभिलाषा गोद लेकर अपनी बेटी की तरह पाले। और दूसरा, सलोनी ऐसे समाज का हिस्सा थी जब युवा ख्वाब तो देखते थे पर उनका परिवार उनके ख्वाब को सामाजिक नियमों का हवाला देकर कुचल दिया करते हैं। मैं समाज में ऐसे परिवारों में अलग-अलग उदाहरण देखता और सुनता हूँ। मुझे उनमें से एक worst case को लिखना था। मुझे समाज के इस पहलू को अपनी कहानी में दिखाना था और अपनी कहानी के माध्यम से readers से नैतिक सवाल पूछना था और उन्हें सोचने पर मजबूर करना था। ताकि उनके अंदर नैतिकता का विकास हो सके। इसलिए मैं सलोनी का कहानी ऐसा लिखा।


प्र.7: ऐसा कैसे हो सकता है कि मोहल्ले में कोई स्त्री नौ महीने से गर्भ में हो और पड़ोसियों को उसके बारे में पता ना हो ? कुँए की पास खड़ी स्त्री में से एक अंजान क्यों थी ?

उत्तर: यह लिखने की एक कला है, story background को build करने का। इसमें सीधे narrator के through center character और background को describe करने के बजाए, side characters के conversation का सहारा लिया गया है story को introduce करने के लिए। ताकि readers का interest story को लेकर और deep हो। यह बस एक art of narration है।


प्र.8 सलोनी को अंत में relief क्यों नहीं मिला ? अंत में उसके साथ न्याय क्यों नहीं हुआ ? या क्या कभी उसे न्याय मिलेगा ?

उत्तर: नहीं, असली जीवन में हमेशा happy ending नहीं होता है। इस कहानी का उद्देश्य relief देना या न्याय देना था ही नहीं। बल्कि इस नैतिक सवाल को पूछना था जो story के अंत में readers से पूछा गया है। साथ ही इस चीज को लेकर सचेत करना, ताकि किसी के साथ भी ऐसा ना हो। मेरी कहानी absurd art की श्रेणी में आता है। इसमें readers को happy ending के साथ moral lesson नहीं दिया जाता है, बल्कि absurd ending के साथ readers से नैतिक सवाल पूछा जाता है।


-AnAlone Krishna 

12th June, 2026 A.D.

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