ऐ बारिश , कृष्ण कुणाल की लिखी कविता

Monday, January 08, 2018 0 Comments


☔ऐ बारिश ☔

ऐ बारिश तू ,थम जा जरा,
तेरे आने का है मौसम नहीं।
अभी तो हूँ तन्हा, अभी तो है सर्दी,
कैसे भीगूँ मैं तेरी बूँदों में॥

हैं उसको पता, हैं तुम्हें भी पता,
कि गुम हूँ अकेले अँधेरे में।
ना मुझको खबर, किस ओर सफर,
कहाँ आगे बढ़ूँ घने कोहरे में॥
बस एक उम्मीद में जी मैं रहा,
कोई हाँथ थाम ले मेरे मंजिल की ओर।
मुझे दे दे सहारा, हूँ बंजारा,
दिखा दे मुझे किस ओर है छोर॥
यूं ना गरज तू, यूं ना बरस तू,
थम जा जरा इन लम्हों में।

ऐ बारिश तू ,थम जा जरा,
तेरे आने का है मौसम नहीं।
अभी तो हूँ तन्हा, अभी तो है सर्दी,
कैसे भीगूँ मैं तेरी बूँदों में॥

सब हवा-हवा, सब धुआँ-धुआँ,
हैं जैसे मैं हूँ सपनों में।
कोई हमदर्दी, कोई बेदर्दी,
चेहरे दिखते मुझे अपनो में॥
है काश कि मुझसे दूर ना जाते,
जो गये थे मुझको तन्हा छोड़।
मैं जो समझता था अपना,
दर्द में मेरे वो लिए मुंह मोड़॥
तू ना भीगा, अब और मुझे,
देख जरा मेरे जख्मों में।

ऐ बारिश तू ,थम जा जरा,
तेरे आने का है मौसम नहीं।
अभी तो हूँ तन्हा, अभी तो है सर्दी,
कैसे भीगूँ मैं तेरी बूँदों में॥

-AnAlone Krishna.
8th January 2018 A.D.
लगता है अब भी मुझमें कुछ बात है बाकी।

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