● Yes, I'm single, with my choice ●
Act 1:- Yes, I'm single, with my choice.
Act 2:- Yes, I'm single, now with my choice.
Act 3:- Yes, I'm single, but with my choice.
Preface/Prelude:-
Teenage से adult हो रहे हर नवयुवकों के मन को यह चाहत होती है कि कोई ऐसा मिले जो उसे समझें, साथ दिल को हमेशा किसी ऐसे की तलाश होती है जिसकी मौजूदगी में वह अपनापन महसूस कर सके। जब किसी में उम्मीद की किरण दिखती है तब वो सभी भी, जो ना ही किसी के आकर्षण में आकर अपने career की goal से भटके और ना ही दूसरों की देखा-देखी में, उनका भी मन भटक जाता है और दिल किसी की सपनों में खो जाता है। ऐसी परिस्थिति में जब हमारा दिल और दिमाग भटकना शुरू होता है, तब ना ही अपनी feelings को दबानी चाहिए जिससे वो उसका side-effect life में करे और ना उस feelings की बहाव में बहते चले जाना चाहिए। बल्कि ऐसे परिस्थिति में यह जरूरी होता है कि दिल के अहसासों को समझते हुए दिमाग के awareness के ताल-मेल बैठा कर अच्छे से सोंच समझ कर अपने life में continuously आगे बढ़ते रहना चाहए। इसलिए मेरे द्वारा लिखे गए इस play के माध्यम मैंने यह समझाने की कोशिश की है कि relationship में आने से पहले-
Act 1 :- खुद को और अपनी partner को समझना और वो जैसे हो उसे वैसे ही accept करना,
Act 2:- उसके और खुद के साथ आने से create होने वाले situations को समझना और कोई decision लेना, और
Act 3:- उसके और खुद के dreams and desires को जानना, उसके goals and ambitions को accept करना, और इनकी उसके life में कितनी importance है और खुद कितना importance दे सकते है , इन चीजों को समझकर किसी का हाँथ थामना और relationship में आना
कितना, क्यूँ और किस हद तक जरूरी है। ताकि मेरे इस play को पढ़ने वाले युवा हर situation में अपने life के प्रति ambitious रह सके।
तीनों Acts "हमदर्द सा कोई" केे different parts के बीच की split stories है। इसलिए तीनों के timelines अलग-अलग है। लेकिन तीनों मिलकर अपने मन के भावों को समझने, accept करने और उन्हें अपने control में रखने के लिए सीखने की और हर situation में अपने मन को ना भटकने देने की प्रेरणा देते हैं।
Thanks..!
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