वो इसे बाहर तलाशता है।
यह चाहता है कोई मिले इसे इसके जैसा
और शायरों को पढ़ता और सुनता है।
वो क्या चीज है जिससे दिल शांत होगा
यह उसे समझने की कोशिश नहीं करता।
बस इस अहसास के लिए
कि वह अकेला नहीं है,
वह अपने जैसा और समदर्द ढूंढता है।
मैं देखता हूँ उसको
और कहना चाहता हूँ कि खुद में देखो।
पर मैं जानता हूँ कि वो नहीं सुनेगा मेरी बात,
क्योंकि उसका मन
अब भी उन्हीं ख़्वाब को बुनता है।
वह अब भी भ्रम में है,
और भ्रम में जीना चाहता है।
उसे उस भ्रम में जो जिंदगी मिलती है
उसके लिए अब भी उन भ्रम को बुनता है।
-AnAlone Krishna
24th June, 2026

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