● Life की परछाई ●
By AnAlone Krishna
Chapter 10
(इस chapter में Individuality को अलग-अलग perspectives से समझाने की कोशिश की गई है। इसे पढ़ें और अपनी प्रतिक्रिया दें। अगर आपको अपना भी नज़रिया share करने का मन करे तो आप comment कर सकते हो।)
Prelude | Chapter 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 | 9 | 10 | 11 | 12
Life की परछाई
Chapter 10 : Perspectives on Individuality (इस chapter को इसके लंबे length के कारण कई parts में divide किया गया है।)
10.2 : Individuality of Personal Choices
10.3 : Individuality of Personal Role
10.5 : Individuality of Personal Freedom
● Life की परछाई ●
Chapter 10.2 : Individuality of Personal Choices
"मैं, मैं, मैं, मैं.., तुम क्या हमेशा बकरियों की तरह मैं-मैं करते रहते हो ? तुम्हारे life में तुम्हारे अलावा कुछ और है नहीं क्या ?", सलोनी उदय से पूछती है, जब college में अभिषा और सलोनी उदय के friend circle में घुल मिल गए थे, और skit के rehersal के बाद canteen में पेट पूजा कर रहे थे।
ज्योति बोली, "इसकी जिंदगी इसी से शुरू होती है और इसी तक बस रहती है।"
राजीव बोलता है, "क्या बोलती है तुम ! ये जितना lucky है, शायद ही कोई होगा। तुम बताओ, college में कौन ऐसा है जिसके साथ इसका नहीं बनता है, या कौन ऐसी है जो इसे पसंद नहीं करेगी ?"
सलोनी पूछी, "उदय तुम कुछ तो बोलो...। खाली हमेशा मैं-मैं करते रहते हो।"
उदय बोला, "देखो, मैं हूँ, तो यह मेरी दुनियां है। मैं जिंदा हूं, तो मेरे सारे रिश्ते, friends, ख्वाब, सब है। जिस दिन मैं खत्म, तो ये सारी चीजें, उम्मीदें, महत्वकांक्षाएं, आशाएं, कर्तव्य, सब खत्म। मैं खुश रहूंगा, तो मुझे अपने आसपास सभी पे प्यार आयेगा। मैं उदास होऊंगा तो, मै इन सभी चीजों से दूर चला जाना चाहूंगा। जब गुस्सा होऊंगा, तो जी करेगा कि पूरी दुनियां को ही आग लगा दूँ। मानो कि अगर मैं अगले पल मर गया, मैं मर ही गया, तो फिर मेरे पीछे इस दुनियां का क्या होगा, यह सोच कर भी क्या लाभ ! जब तक मैं रहूंगा, मै तभी तक तो इसका भोग कर सकूंगा। तो मैं इस दुनियां के बारे में सोचूं, या पहले खुद के बारे में सोचूं ?"
मुस्कान उदय को बोली, "बाबाजी, जब आप इतने समझदार हैं तो आप दुनियां की फिक्र क्यों करते रहते हैं ? क्यों रखें हैं अपने दिल को तन्हां, और इस तन्हाई में मरते रहते हैं ?"
कृष्ण मुस्कान को बोला, "क्या तुम इसे कह रही हो कि ढूंढो किसी को, कि यह क्यों अकेला खुद को आज भी रखा है ? क्यों जाने नहीं देता है यह किसी में दिल, कि अपनी पसन्द को क्यों अब तक राज ही रखा है ?"
मुस्कान कृष्ण को बोली, "आप तो महान है, कैसे तुरंत बात को पकड़ लिए, पर क्या वो समझा जिसे समझना चाहिए था ?"
उदय इन्हें बोला, "अब बस भी करो यार...। मुझे तुमलोग उकसाना बंद करो।"
रंजन पूछा, "वैसे उदय, बता ही दो, आखिर तुम लड़कियों में ऐसा क्या ढूंढते हो, जिसके वजह से तुम्हें कोई पसन्द नहीं आती है।"
उदय थोड़ा सोचता है, फिर जवाब देता है, "Suppose करो कि जिंदगी एक रस्सी है, तो मेरे नज़र में इसके पाँच डोर है-
1. Personal Life; जिसमें मैं आता हूं, मेरे emotions आते हैं, मेरे dreams and desires आते हैं, मेरे thoughts and experience आते हैं, इत्यादि। मैं ऐसा नहीं कह रहा हूँ कि मैं बदलना नहीं चाहता हूँ, मैं time/situation/हालात के साथ बदलूंगा। पर कुछ चीजें मैं tolerate नहीं कर सकता हूँ। तो मेरे life में जो आए, वो मेरे personal life को समझने, इसकी कद्र करे। वो मेरे life में आएगी तो वो मेरे personal life में एक खास जगह लेगी, और मैं हम दोनों के बीच कोई तीसरा बर्दाश्त नहीं करूंगा। यहां तक कि उसके बाप और भाई या family तक को नहीं।"
ज्योति interrupt की, "तुम भी गजब करते हो कृष्ण ! उसकी family तुम दोनों के बीच क्यों आएगी ?"
उदय कहा, "बीच में नहीं, अगल-बगल। उससे बात-बात पर हमारे personal relation के बारे में पूछने, और सलाह देने, कान भरने, और उकसाने का काम।"
ज्योति बोली, "Family वाला अपनी बेटी का हाल समाचार तो पूछेगा ही ना!"
उदय explain करता है, "जो खुद की Individuality को नहीं समझेगी, जो अपने parents/family members को अपने life में interfare करने देती है, तो वो मेरे personal space में भी उन्हें ले आएगी। और मैं अपने personal life में अपनी खुद की family का interfare बर्दाश्त नहीं करता हूँ, तो उसके जरिए indirectly उसकी family को करने दूंगा ! जो कठपुतली होगी घर की, उसे मै अपने personal life में आने ही नहीं दूंगा। क्योंकि मैं अपने personal life में किसी ऐसे को बर्दाश्त नहीं कर सकता हूँ, जो मेरे जैसी नहीं हो।"
ज्योति बोली, "मै समझ गई। तुम्हें कभी किसी से प्यार नहीं हो सकता है। तुम्हारा किसी के साथ रिश्ता नहीं बन पाएगा।"
उदय बोला, "अब रहने दूँ, या आगे कहूँ ?"
मुस्कान बोली, "आगे और भी है ? तो कहो।"
उदय आगे कहता है, "इसके बाद life का दूसरा डोर है-
2. Educational Life; जब से हम दुनियां को देखना शुरू करते हैं, हम कुछ ना कुछ सीखना शुरू करते हैं, चीजों को समझना शुरू करते हैं, जिससे हमारे कुछ पसंद-नापसंद बनते हैं, हम ख्वाब बुनते है, फिर उन चीजों को पाने के लिए अपने अन्दर skills develop करते है, या हमारे regular practice की वजह से time के साथ कई skills develop हो जाते हैं। तो मेरे life partner में at least इतना तो understanding होना ही चाहिए कि जो चीजें मैं जानता हूँ, जब उससे मैं share करूं तो at least basic चीज़ों को समझा सके। हो सकता है कि मैं कई चीजों में best रहूं और कई चीजों में बिल्कुल ही dull रहूं। हो सकता है कि जो मुझे ना आए, उसमें वो best हो। उसमें यह तो attitude होना ही चाहिए कि हम साथ में एक दूसरे के knowledge को share करे, अपने future plans को share करे और साथ में grow करते हुए उन्हें achive करने का कोशिश करे।"
राजीव बोला, "इसके लिए तो तुम्हें अभी ही जब तुम अपना ख्वाब देख रहे हो, उसी time तुम्हें कोई चाहिए।"
रंजन बोला, "पर तुम तो किसी को भाव देते ही नहीं हो।"
उदय कहता है,"हाँ तो मुझे ऐसा attitude किसी में feel तो हो। कोई साथ मिल कर अलग ख्वाब देखना भी तो चाहे। सभी किसी और के देखे ख्वाब(अपने parents के) पूरा करने में लगे हुए है। किसी के साथ मिलकर ख्वाब थोड़ी देखना है उन्हें, बस उन्हें अपने दूसरों से support की उम्मीद है।"
कृति बोली, "तुम कुछ ज्यादा ही expectations नहीं रख रहा है ?"
कृष्ण बोला, "देखो, मुझे उदय का बात थोड़ा बहुत समझ आ रहा है। लड़कियां लड़कों से उम्मीद करती है कि लड़के उनके family के देखे ख्वाब को पूरा करने में लड़कियों की support करे। जैसे कि लड़कों का खुद का कोई ख्वाब होता ही नहीं है। वो बस निट्ठल्ले बैठे रहते है किसी का support बनने के लिए। उन्हें support नहीं चाहिए होता है !"
यह सुनकर कृति और इनके बहस में नहीं पड़ना चाहती थी, वह उठकर चली गई। रंजन बोला, "और आगे ? यह तो दो ही point हुआ।"
उदय उन्हें आगे समझाता है, "जिंदगी का अगला डोर है-
3. Financial Life; इंसान मेहनत करता है ताकि वह धन earn कर सके। ताकि वह अपनी और अपने परिवार की जरूरतों को पूरा कर सके, अपने दोस्तो के साथ life को enjoy कर सके। मैं मन लगाकर काम कर सकूं, इसके लिए उसे support करना होगा। यह वह भी काम करके earn कर सकती है, मै force नहीं करूंगा। But, फिर जो हमारे daily life की जरूरत है, जैसे कि खाना, रहना, साफ-सफाई, और सारे काम; उन्हें हमें या तो mutual collaboration से खुद करना होगा या कामवाली को रखना होगा। मैं अगर कमा कर लाऊं, और money का वह mismanagement करे, तो मैं कितना भी कमा कर लाऊंगा, तो इसका क्या ही फर्क पड़ेगा ?"
ज्योति बोली, "पर यह तो शादी के बाद की बात है ना ? तुम उतना आगे का कुछ ज्यादा ही सोच रहे हो। धीरे-धीरे सब सीख जाती है।"
उदय कहता है, "सिर्फ शादी के बाद की बात नहीं है। लड़की को कामयाब लड़का चाहिए ताकि वह उसकी जरूरतों को पूरा कर सके। जो लड़के काम नहीं करते हैं उन्हें वो बेरोजगार बोलकर छोड़ती है। कौन आदमी अपने परिवार के लिए कम- बेसी नहीं कमाता है ? पर बात यह है कि उसे financially life में grow करने में support करोगे तब ना। कोई अगर अकेले मेहनत करके note छापने का मशीन बनेगा, तो उसका family, रिश्ते, समाज, सब छूट जाएगा। तो वह उम्मीद तो करगा ना कि अगर वह बाहर जा रहा है कमाने के लिए तो कोई हो जो घर को संभाले। अगर उसे भी बाहर जाकर कमाना है तो फिर उसे किसी लड़के को कम salary में adjust तो करना होगा ना। क्योंकि अगर लड़का रिश्तों को, समाज को भी अगर आकर समय देगा, तो या तो वह अपने परिवार को ठीक से समय नहीं देगा, या काम में समय कम देकर आता होगा। दुनियां में हर चीज तो मिल नहीं सकता है।"
रंजन बोला, "चलो मान लिए कि वह तुम्हारे साथ adjust कर ली कि तुमलोग के आपस में किसको क्या काम कैसे करना है। अब आगे क्या है ?"
उदय बोला, "आगे जिंदगी का चौथा डोर आता है,
4. Social Life; यानी कि friends, समाज, रिश्ते, परिवार,...। मैं जब घर पर नहीं होऊंगा, जब मैं काम पर जाऊंगा, तब जिनसे उम्मीद होगा कि अगर मेरे परिवार को instantly किसी की जरूरत पड़े, तो मेरी गैरमौजूदगी में वो मदद करने के लिए आए। या फिर कुछ नहीं तो मेरे घर की खुशी, शादियों में और ग़म में, किसी की मृत्यु पर कोई मेरे साथ खड़ा रहे। उनके साथ मेरा वैसा व्यावहारिक रिश्ता रखने में co-operate करना चाहिए जैसा मैं रखना चाहता हूँ।"
राजीव बोला, "समाज और लोग मतलबी होते हैं।"
उदय बोला, "हाँ, मतलबी होते हैं। वह अपने मतलब के लिए ही मेरे साथ खड़े हो, but at least जब मुझे उनकी जरूरत हो तब वो हो तो सही। तुम सभी मेरे कितने भी अच्छे friend हो। पर जब मुझे जरूरत होगा, तब तुरंत तो वही ना पहुंच सकता है जो मेरा पड़ोसी होगा।"
सलोनी बोली, "आजकल पड़ोसी भी मदद नहीं करते हैं।"
उदय समझाता है, "वह इसलिए कि जिन बच्चों के साथ हम खेल कर बड़े होते हैं, जिन चाचा-चाची-फ़ुआ के गोद में खेलते हैं, जो दादा-दादी हमें पीठ में टांगते हैं; उनके घरों में जब नए सदस्य दूसरे घरों से आते हैं तो उनका ego clash करता है, आदमी काम में जाते हैं और औरतें एक-दूसरे की चुगली के चक्कर में एक-दूसरे से मनमुटाव कर लेती है और पड़ोसियों के साथ रिश्ते खराब कर लेती है। मुझे जो life partner चाहिए, वो रिश्ते सुधार कर साथ चलने वाली चाहिए, ना कि अच्छे-खासे रिश्तों को खराब करके परिवार को समाज से अलग करने वाली।"
इतना देर से अभिषा चुपचाप खाते हुए इनकी बातों को सुन रही थी, पर अब उससे रहा नहीं गया। वह उदय को बोली, "तो तुम्हें लगता है कि लड़कियां ही खराब होती है ? वो ही घर तोड़ती है, आपस में झगड़े करती है, परिवार को लड़वाती है, फिजूलखर्ची करती है, घर पर बोझ बनी रहती है, उन्हें कुछ भी आता-जाता नहीं है, उन्हें कुछ भी ज्ञान नहीं है, वो समझती नहीं है, बस काम में टांग अड़ाती है, और किसी के भी बहकावे में आकर अपना घर में आग लगाती है ?"
उदय अभिषा को देखा, और देखता ही रहा गया। वह उदय को घूर रही थी। उदय घबराहट के साथ मुस्कुराता हुआ, आवाज में लड़खड़ाता हुआ बोला, "नहीं यह मै सभी के बारे में नहीं बोल रहा हूँ। मैं बस यह कह रहा हूँ कि मुझे ऐसी किसी के जाल में फंसना नहीं है।"
सलोनी अभिषा को घूरते हुए और उदय को घबराते हुए देखकर मुस्कुराती है। कृष्ण और राजीव उदय के कंधे में हाँथ रखकर बोलते हैं, "अब आगे कुछ मत बोलना।"
ज्योति यह देखकर मुस्कुराती है, और मुस्कान अभिषा के तरफ होकर बोलती है, "देखो, तुम्हारा सोच बहुत घटिया है उदय। अपना सोच सुधारो। हर लड़की ऐसी नहीं होती है।"
उदय कहता है, "हर लड़की ऐसी नहीं होती है यह मैं भी मानता हूँ। तभी तो मैं वैसी को ही अपने life में चाहता हूँ जो ऐसी ना हो और ऐसी किसी के चक्कर में पड़ने से बचना चाहता हूँ।"
यह सुनकर instantly ऐसा लगा कि उदय मजाक उड़ा रहा है। इससे मुस्कान को गुस्सा आया, पर वह तुरंत शांत हो गई। क्योंकि वह जानती थी कि उदय आज बस अजीब बात कर रहा है, पर वह दिल का अच्छा लड़का है। वह कभी भी instantly किसी को hurt नहीं किया था।
उदय आगे बोला, "मेरे अनुसार life का आखरी डोर है-
5. Spiritual Life; जब इंसान हर एक चीज को पाने या खोने के बाद, सुख या दुःख के बाद, जीतने या हारने के बाद, प्यार और झगड़े के बाद,... अपने जीवन में शांति चाहता है। अगर वह अपने personal life में उसे जगह देगा, जो उसे mentally, emotionally, psychologically सुकून से ना रहने दे, तो वह खुश नहीं रह सकता है। अगर उसका educational life और partner का support अच्छा नहीं रहेगा, तो वह अकेले burden ढोने, गलती करने,... के कारण हमेशा परेशान और उदास रहेगा। अगर उसका finacial life अच्छा नहीं रहेगा तो वह कैसे अपने परिवार और दोस्तों के लिए खुशियां खरीद पायेगा ? वह काम से थका हारा, घर आएगा और घर में भी तनाव झेलेगा तो वह कितना दिन तक जिएगा ? मेरे जैसा इंसान तो और नहीं जीयेगा, इससे बेहतर वह मरना चाहेगा। अगर social life नहीं बचेगा, तो फिर क्या बचेगा life में ? एक परिवार, जिसकी जरूरतों को पूरा करने के लिए दिन रात बैल जैसा खटने वाला काम, boss और घरवालों के ताने ? कोई हो तो मदद करें खुद को spiritually भी खुद को शांत करके सुकून से जीने में।"
सलोनी मुस्कुराते हुए बोली, "इतना सब झंझट से अच्छा है कि single रहो और सूखी रहो।"
रंजन पूछा, "तुम सच में single हो ? तुम्हारा कोई नहीं है ?"
सलोनी बोली, "Yes, I'm single, but with my choice."
राजीव उदय को बोला, "तुम किसी को पटा लो रे। अकेले रहेगा तो तुम्हारा दिमाग और खराब होगा। तुम्हारे जैसा इतना कौन सोचता है ! अकेले खाली बैठकर ऐसा-ऐसा चीज खाली तुम सोचते रहता है।"
उदय बोला, "देखो, मै दोस्ती में रंग, height, हैसियत, gender, कुछ भी नहीं देखता हूँ। मैं जैसे तुम्हारे साथ class कर सकता हूँ, पढ़ाई कर सकता हूँ, खेल सकता हूँ, घूम सकता हूँ, park जा सकता हूँ, cinema देख सकता हूँ, canteen में साथ में बैठ कर खा सकता हूँ, वैसे ही मैं (मुस्कान, ज्योति, के तरफ इशारा करते हुए) इनके साथ भी रह सकता हूँ। इसके आगे मैं ना ही तुमलोग (लड़के friends के लिए) के साथ कुछ कर सकता हूँ, और ना ही इनके (female friend के लिए) साथ कभी अपना मर्यादा लांघूंगा। पर अगर कोई मेरी girlfriend बनेगी, तो शायद ही उसे यह सब बर्दाश्त हो।"
रंजन बोला, "तुम्हें हजारों से दोस्ती करनी ही क्यों है ? बस एक का होकर रहो।"
उदय मुस्कान को इशारा करते हुए बोला, "यह चाहता है कि मैं तुमलोग से दोस्ती ना रखूँ। इसे जलन होता है कि तुमलोग मेरी दोस्त हो।"
मुस्कान उठकर जाती है और रंजन को bench में झुकाकर एक कोहनी मारती है, और बोलती है, "आगे का कुछ नहीं बोलेंगे। पर तुम बहुत ही अच्छे लड़के हो। मैं चाहती हूँ कि तुम बस हमेशा एक अच्छे दोस्त की तरह रहो हमारे life में, पर तुम हमेशा दोस्त हमारे दोस्त रहो।"
उदय बोला, "पर एक दिन हम सभी अपने-अपने रास्ते आगे निकल जाएगा अपनी जिंदगी में। फिर शायद कभी मिले या ना भी मिले। शायद हमारी आपस में बातें भी ना होगा। तब जब तुमलोगो की मुझे याद आयेगी मुझे तन्हाई सताएगी, तो किसी को ढूंढ़ने निकलूंगा। फिलहाल इस पल को enjoy करते हैं ना।"
ज्योति बोली, "इसकी जिंदगी इसी से शुरू होती है और इसी तक बस रहती है।"
राजीव बोलता है, "क्या बोलती है तुम ! ये जितना lucky है, शायद ही कोई होगा। तुम बताओ, college में कौन ऐसा है जिसके साथ इसका नहीं बनता है, या कौन ऐसी है जो इसे पसंद नहीं करेगी ?"
सलोनी पूछी, "उदय तुम कुछ तो बोलो...। खाली हमेशा मैं-मैं करते रहते हो।"
उदय बोला, "देखो, मैं हूँ, तो यह मेरी दुनियां है। मैं जिंदा हूं, तो मेरे सारे रिश्ते, friends, ख्वाब, सब है। जिस दिन मैं खत्म, तो ये सारी चीजें, उम्मीदें, महत्वकांक्षाएं, आशाएं, कर्तव्य, सब खत्म। मैं खुश रहूंगा, तो मुझे अपने आसपास सभी पे प्यार आयेगा। मैं उदास होऊंगा तो, मै इन सभी चीजों से दूर चला जाना चाहूंगा। जब गुस्सा होऊंगा, तो जी करेगा कि पूरी दुनियां को ही आग लगा दूँ। मानो कि अगर मैं अगले पल मर गया, मैं मर ही गया, तो फिर मेरे पीछे इस दुनियां का क्या होगा, यह सोच कर भी क्या लाभ ! जब तक मैं रहूंगा, मै तभी तक तो इसका भोग कर सकूंगा। तो मैं इस दुनियां के बारे में सोचूं, या पहले खुद के बारे में सोचूं ?"
मुस्कान उदय को बोली, "बाबाजी, जब आप इतने समझदार हैं तो आप दुनियां की फिक्र क्यों करते रहते हैं ? क्यों रखें हैं अपने दिल को तन्हां, और इस तन्हाई में मरते रहते हैं ?"
कृष्ण मुस्कान को बोला, "क्या तुम इसे कह रही हो कि ढूंढो किसी को, कि यह क्यों अकेला खुद को आज भी रखा है ? क्यों जाने नहीं देता है यह किसी में दिल, कि अपनी पसन्द को क्यों अब तक राज ही रखा है ?"
मुस्कान कृष्ण को बोली, "आप तो महान है, कैसे तुरंत बात को पकड़ लिए, पर क्या वो समझा जिसे समझना चाहिए था ?"
उदय इन्हें बोला, "अब बस भी करो यार...। मुझे तुमलोग उकसाना बंद करो।"
रंजन पूछा, "वैसे उदय, बता ही दो, आखिर तुम लड़कियों में ऐसा क्या ढूंढते हो, जिसके वजह से तुम्हें कोई पसन्द नहीं आती है।"
उदय थोड़ा सोचता है, फिर जवाब देता है, "Suppose करो कि जिंदगी एक रस्सी है, तो मेरे नज़र में इसके पाँच डोर है-
1. Personal Life; जिसमें मैं आता हूं, मेरे emotions आते हैं, मेरे dreams and desires आते हैं, मेरे thoughts and experience आते हैं, इत्यादि। मैं ऐसा नहीं कह रहा हूँ कि मैं बदलना नहीं चाहता हूँ, मैं time/situation/हालात के साथ बदलूंगा। पर कुछ चीजें मैं tolerate नहीं कर सकता हूँ। तो मेरे life में जो आए, वो मेरे personal life को समझने, इसकी कद्र करे। वो मेरे life में आएगी तो वो मेरे personal life में एक खास जगह लेगी, और मैं हम दोनों के बीच कोई तीसरा बर्दाश्त नहीं करूंगा। यहां तक कि उसके बाप और भाई या family तक को नहीं।"
ज्योति interrupt की, "तुम भी गजब करते हो कृष्ण ! उसकी family तुम दोनों के बीच क्यों आएगी ?"
उदय कहा, "बीच में नहीं, अगल-बगल। उससे बात-बात पर हमारे personal relation के बारे में पूछने, और सलाह देने, कान भरने, और उकसाने का काम।"
ज्योति बोली, "Family वाला अपनी बेटी का हाल समाचार तो पूछेगा ही ना!"
उदय explain करता है, "जो खुद की Individuality को नहीं समझेगी, जो अपने parents/family members को अपने life में interfare करने देती है, तो वो मेरे personal space में भी उन्हें ले आएगी। और मैं अपने personal life में अपनी खुद की family का interfare बर्दाश्त नहीं करता हूँ, तो उसके जरिए indirectly उसकी family को करने दूंगा ! जो कठपुतली होगी घर की, उसे मै अपने personal life में आने ही नहीं दूंगा। क्योंकि मैं अपने personal life में किसी ऐसे को बर्दाश्त नहीं कर सकता हूँ, जो मेरे जैसी नहीं हो।"
ज्योति बोली, "मै समझ गई। तुम्हें कभी किसी से प्यार नहीं हो सकता है। तुम्हारा किसी के साथ रिश्ता नहीं बन पाएगा।"
उदय बोला, "अब रहने दूँ, या आगे कहूँ ?"
मुस्कान बोली, "आगे और भी है ? तो कहो।"
उदय आगे कहता है, "इसके बाद life का दूसरा डोर है-
2. Educational Life; जब से हम दुनियां को देखना शुरू करते हैं, हम कुछ ना कुछ सीखना शुरू करते हैं, चीजों को समझना शुरू करते हैं, जिससे हमारे कुछ पसंद-नापसंद बनते हैं, हम ख्वाब बुनते है, फिर उन चीजों को पाने के लिए अपने अन्दर skills develop करते है, या हमारे regular practice की वजह से time के साथ कई skills develop हो जाते हैं। तो मेरे life partner में at least इतना तो understanding होना ही चाहिए कि जो चीजें मैं जानता हूँ, जब उससे मैं share करूं तो at least basic चीज़ों को समझा सके। हो सकता है कि मैं कई चीजों में best रहूं और कई चीजों में बिल्कुल ही dull रहूं। हो सकता है कि जो मुझे ना आए, उसमें वो best हो। उसमें यह तो attitude होना ही चाहिए कि हम साथ में एक दूसरे के knowledge को share करे, अपने future plans को share करे और साथ में grow करते हुए उन्हें achive करने का कोशिश करे।"
राजीव बोला, "इसके लिए तो तुम्हें अभी ही जब तुम अपना ख्वाब देख रहे हो, उसी time तुम्हें कोई चाहिए।"
रंजन बोला, "पर तुम तो किसी को भाव देते ही नहीं हो।"
उदय कहता है,"हाँ तो मुझे ऐसा attitude किसी में feel तो हो। कोई साथ मिल कर अलग ख्वाब देखना भी तो चाहे। सभी किसी और के देखे ख्वाब(अपने parents के) पूरा करने में लगे हुए है। किसी के साथ मिलकर ख्वाब थोड़ी देखना है उन्हें, बस उन्हें अपने दूसरों से support की उम्मीद है।"
कृति बोली, "तुम कुछ ज्यादा ही expectations नहीं रख रहा है ?"
कृष्ण बोला, "देखो, मुझे उदय का बात थोड़ा बहुत समझ आ रहा है। लड़कियां लड़कों से उम्मीद करती है कि लड़के उनके family के देखे ख्वाब को पूरा करने में लड़कियों की support करे। जैसे कि लड़कों का खुद का कोई ख्वाब होता ही नहीं है। वो बस निट्ठल्ले बैठे रहते है किसी का support बनने के लिए। उन्हें support नहीं चाहिए होता है !"
यह सुनकर कृति और इनके बहस में नहीं पड़ना चाहती थी, वह उठकर चली गई। रंजन बोला, "और आगे ? यह तो दो ही point हुआ।"
उदय उन्हें आगे समझाता है, "जिंदगी का अगला डोर है-
3. Financial Life; इंसान मेहनत करता है ताकि वह धन earn कर सके। ताकि वह अपनी और अपने परिवार की जरूरतों को पूरा कर सके, अपने दोस्तो के साथ life को enjoy कर सके। मैं मन लगाकर काम कर सकूं, इसके लिए उसे support करना होगा। यह वह भी काम करके earn कर सकती है, मै force नहीं करूंगा। But, फिर जो हमारे daily life की जरूरत है, जैसे कि खाना, रहना, साफ-सफाई, और सारे काम; उन्हें हमें या तो mutual collaboration से खुद करना होगा या कामवाली को रखना होगा। मैं अगर कमा कर लाऊं, और money का वह mismanagement करे, तो मैं कितना भी कमा कर लाऊंगा, तो इसका क्या ही फर्क पड़ेगा ?"
ज्योति बोली, "पर यह तो शादी के बाद की बात है ना ? तुम उतना आगे का कुछ ज्यादा ही सोच रहे हो। धीरे-धीरे सब सीख जाती है।"
उदय कहता है, "सिर्फ शादी के बाद की बात नहीं है। लड़की को कामयाब लड़का चाहिए ताकि वह उसकी जरूरतों को पूरा कर सके। जो लड़के काम नहीं करते हैं उन्हें वो बेरोजगार बोलकर छोड़ती है। कौन आदमी अपने परिवार के लिए कम- बेसी नहीं कमाता है ? पर बात यह है कि उसे financially life में grow करने में support करोगे तब ना। कोई अगर अकेले मेहनत करके note छापने का मशीन बनेगा, तो उसका family, रिश्ते, समाज, सब छूट जाएगा। तो वह उम्मीद तो करगा ना कि अगर वह बाहर जा रहा है कमाने के लिए तो कोई हो जो घर को संभाले। अगर उसे भी बाहर जाकर कमाना है तो फिर उसे किसी लड़के को कम salary में adjust तो करना होगा ना। क्योंकि अगर लड़का रिश्तों को, समाज को भी अगर आकर समय देगा, तो या तो वह अपने परिवार को ठीक से समय नहीं देगा, या काम में समय कम देकर आता होगा। दुनियां में हर चीज तो मिल नहीं सकता है।"
रंजन बोला, "चलो मान लिए कि वह तुम्हारे साथ adjust कर ली कि तुमलोग के आपस में किसको क्या काम कैसे करना है। अब आगे क्या है ?"
उदय बोला, "आगे जिंदगी का चौथा डोर आता है,
4. Social Life; यानी कि friends, समाज, रिश्ते, परिवार,...। मैं जब घर पर नहीं होऊंगा, जब मैं काम पर जाऊंगा, तब जिनसे उम्मीद होगा कि अगर मेरे परिवार को instantly किसी की जरूरत पड़े, तो मेरी गैरमौजूदगी में वो मदद करने के लिए आए। या फिर कुछ नहीं तो मेरे घर की खुशी, शादियों में और ग़म में, किसी की मृत्यु पर कोई मेरे साथ खड़ा रहे। उनके साथ मेरा वैसा व्यावहारिक रिश्ता रखने में co-operate करना चाहिए जैसा मैं रखना चाहता हूँ।"
राजीव बोला, "समाज और लोग मतलबी होते हैं।"
उदय बोला, "हाँ, मतलबी होते हैं। वह अपने मतलब के लिए ही मेरे साथ खड़े हो, but at least जब मुझे उनकी जरूरत हो तब वो हो तो सही। तुम सभी मेरे कितने भी अच्छे friend हो। पर जब मुझे जरूरत होगा, तब तुरंत तो वही ना पहुंच सकता है जो मेरा पड़ोसी होगा।"
सलोनी बोली, "आजकल पड़ोसी भी मदद नहीं करते हैं।"
उदय समझाता है, "वह इसलिए कि जिन बच्चों के साथ हम खेल कर बड़े होते हैं, जिन चाचा-चाची-फ़ुआ के गोद में खेलते हैं, जो दादा-दादी हमें पीठ में टांगते हैं; उनके घरों में जब नए सदस्य दूसरे घरों से आते हैं तो उनका ego clash करता है, आदमी काम में जाते हैं और औरतें एक-दूसरे की चुगली के चक्कर में एक-दूसरे से मनमुटाव कर लेती है और पड़ोसियों के साथ रिश्ते खराब कर लेती है। मुझे जो life partner चाहिए, वो रिश्ते सुधार कर साथ चलने वाली चाहिए, ना कि अच्छे-खासे रिश्तों को खराब करके परिवार को समाज से अलग करने वाली।"
इतना देर से अभिषा चुपचाप खाते हुए इनकी बातों को सुन रही थी, पर अब उससे रहा नहीं गया। वह उदय को बोली, "तो तुम्हें लगता है कि लड़कियां ही खराब होती है ? वो ही घर तोड़ती है, आपस में झगड़े करती है, परिवार को लड़वाती है, फिजूलखर्ची करती है, घर पर बोझ बनी रहती है, उन्हें कुछ भी आता-जाता नहीं है, उन्हें कुछ भी ज्ञान नहीं है, वो समझती नहीं है, बस काम में टांग अड़ाती है, और किसी के भी बहकावे में आकर अपना घर में आग लगाती है ?"
उदय अभिषा को देखा, और देखता ही रहा गया। वह उदय को घूर रही थी। उदय घबराहट के साथ मुस्कुराता हुआ, आवाज में लड़खड़ाता हुआ बोला, "नहीं यह मै सभी के बारे में नहीं बोल रहा हूँ। मैं बस यह कह रहा हूँ कि मुझे ऐसी किसी के जाल में फंसना नहीं है।"
सलोनी अभिषा को घूरते हुए और उदय को घबराते हुए देखकर मुस्कुराती है। कृष्ण और राजीव उदय के कंधे में हाँथ रखकर बोलते हैं, "अब आगे कुछ मत बोलना।"
ज्योति यह देखकर मुस्कुराती है, और मुस्कान अभिषा के तरफ होकर बोलती है, "देखो, तुम्हारा सोच बहुत घटिया है उदय। अपना सोच सुधारो। हर लड़की ऐसी नहीं होती है।"
उदय कहता है, "हर लड़की ऐसी नहीं होती है यह मैं भी मानता हूँ। तभी तो मैं वैसी को ही अपने life में चाहता हूँ जो ऐसी ना हो और ऐसी किसी के चक्कर में पड़ने से बचना चाहता हूँ।"
यह सुनकर instantly ऐसा लगा कि उदय मजाक उड़ा रहा है। इससे मुस्कान को गुस्सा आया, पर वह तुरंत शांत हो गई। क्योंकि वह जानती थी कि उदय आज बस अजीब बात कर रहा है, पर वह दिल का अच्छा लड़का है। वह कभी भी instantly किसी को hurt नहीं किया था।
उदय आगे बोला, "मेरे अनुसार life का आखरी डोर है-
5. Spiritual Life; जब इंसान हर एक चीज को पाने या खोने के बाद, सुख या दुःख के बाद, जीतने या हारने के बाद, प्यार और झगड़े के बाद,... अपने जीवन में शांति चाहता है। अगर वह अपने personal life में उसे जगह देगा, जो उसे mentally, emotionally, psychologically सुकून से ना रहने दे, तो वह खुश नहीं रह सकता है। अगर उसका educational life और partner का support अच्छा नहीं रहेगा, तो वह अकेले burden ढोने, गलती करने,... के कारण हमेशा परेशान और उदास रहेगा। अगर उसका finacial life अच्छा नहीं रहेगा तो वह कैसे अपने परिवार और दोस्तों के लिए खुशियां खरीद पायेगा ? वह काम से थका हारा, घर आएगा और घर में भी तनाव झेलेगा तो वह कितना दिन तक जिएगा ? मेरे जैसा इंसान तो और नहीं जीयेगा, इससे बेहतर वह मरना चाहेगा। अगर social life नहीं बचेगा, तो फिर क्या बचेगा life में ? एक परिवार, जिसकी जरूरतों को पूरा करने के लिए दिन रात बैल जैसा खटने वाला काम, boss और घरवालों के ताने ? कोई हो तो मदद करें खुद को spiritually भी खुद को शांत करके सुकून से जीने में।"
सलोनी मुस्कुराते हुए बोली, "इतना सब झंझट से अच्छा है कि single रहो और सूखी रहो।"
रंजन पूछा, "तुम सच में single हो ? तुम्हारा कोई नहीं है ?"
सलोनी बोली, "Yes, I'm single, but with my choice."
राजीव उदय को बोला, "तुम किसी को पटा लो रे। अकेले रहेगा तो तुम्हारा दिमाग और खराब होगा। तुम्हारे जैसा इतना कौन सोचता है ! अकेले खाली बैठकर ऐसा-ऐसा चीज खाली तुम सोचते रहता है।"
उदय बोला, "देखो, मै दोस्ती में रंग, height, हैसियत, gender, कुछ भी नहीं देखता हूँ। मैं जैसे तुम्हारे साथ class कर सकता हूँ, पढ़ाई कर सकता हूँ, खेल सकता हूँ, घूम सकता हूँ, park जा सकता हूँ, cinema देख सकता हूँ, canteen में साथ में बैठ कर खा सकता हूँ, वैसे ही मैं (मुस्कान, ज्योति, के तरफ इशारा करते हुए) इनके साथ भी रह सकता हूँ। इसके आगे मैं ना ही तुमलोग (लड़के friends के लिए) के साथ कुछ कर सकता हूँ, और ना ही इनके (female friend के लिए) साथ कभी अपना मर्यादा लांघूंगा। पर अगर कोई मेरी girlfriend बनेगी, तो शायद ही उसे यह सब बर्दाश्त हो।"
रंजन बोला, "तुम्हें हजारों से दोस्ती करनी ही क्यों है ? बस एक का होकर रहो।"
उदय मुस्कान को इशारा करते हुए बोला, "यह चाहता है कि मैं तुमलोग से दोस्ती ना रखूँ। इसे जलन होता है कि तुमलोग मेरी दोस्त हो।"
मुस्कान उठकर जाती है और रंजन को bench में झुकाकर एक कोहनी मारती है, और बोलती है, "आगे का कुछ नहीं बोलेंगे। पर तुम बहुत ही अच्छे लड़के हो। मैं चाहती हूँ कि तुम बस हमेशा एक अच्छे दोस्त की तरह रहो हमारे life में, पर तुम हमेशा दोस्त हमारे दोस्त रहो।"
उदय बोला, "पर एक दिन हम सभी अपने-अपने रास्ते आगे निकल जाएगा अपनी जिंदगी में। फिर शायद कभी मिले या ना भी मिले। शायद हमारी आपस में बातें भी ना होगा। तब जब तुमलोगो की मुझे याद आयेगी मुझे तन्हाई सताएगी, तो किसी को ढूंढ़ने निकलूंगा। फिलहाल इस पल को enjoy करते हैं ना।"
और सभी हमेशा की तरह उस पल को enjoy करने के लिए mini party किए, और घर चले गए।
-----Chapter partitioned due to its large length.
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Life की परछाई
Chapter 10 : Perspectives on Individuality (Content काफी लंबा होने के कारण इस chapter को parts में divide किया गया है। Comment में बताए कि यह आपको कैसा लगा। )
Story by -AnAlone Krishna.
Published on 8th August, 2026 A.D.
Published on 8th August, 2026 A.D.
● Life की परछाई ●
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