Life की परछाई : Chapter 10.5 (Individuality of Personal Freedom) | Bilingual Story written by AnAlone Krishna

Saturday, August 08, 2026 0 Comments
● Life की परछाई ●

By AnAlone Krishna

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Chapter 10

 (इस chapter में Individuality को अलग-अलग perspectives से समझाने की कोशिश की गई है। इसे पढ़ें और अपनी प्रतिक्रिया दें। अगर आपको अपना भी नज़रिया share करने का मन करे तो आप comment कर सकते हो।)

Prelude | Chapter 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 | 9 | 10 | 11 | 12 

Life की परछाई 
Chapter 10 : Perspectives on Individuality 
(इस chapter को इसके लंबे length के कारण कई parts में divide किया गया है।)
10.2 : Individuality of Personal Choices  
10.3 : Individuality of Personal Role

● Life की परछाई ●
Chapter 10.5 : Individuality of Personal Freedom

यह किस्सा उस वक्त का है जब मेहक और रॉनी बच्चे थे और वो school में पढ़ते थे। मेहक class three में पढ़ती थी और रॉनी class five में। रात को dinner के time मेहक dinner table पर खाना खा रही थी। Dinner table square shaped का था। वह wooden chair पे बैठी हुई थी, जिससे उसका पैर chair से झूल रहा था। उसके बगल की chair पर रॉनी बैठा हुआ था, जिसका पैर जमीन पे तो touch हो रहा था पर पैर का तलवा ठीक से जमीन पर बैठ नहीं रहा था। सामने बैठी अभिषा रॉनी और मेहक को खाना परोस रही थी। बगल में उदय बैठा हुआ dinner कर रहा था और बच्चों से दिनभर का हाल-समाचार ले रहा था और बातचीत कर रहा था।

रॉनी अपने पिता उदय से पूछा, "पापा, हमलोग दादा-दादी के साथ अब क्यों नहीं रहते हैं?"
उदय रॉनी को देखा। मेहक को adopt करने के दो साल बाद वो सभी शहर में shift हो गए थे। इसके तीन कारण थे: पहला, उदय को अपने life में individually कुछ करना था; दूसरा, family में रहकर अभिषा खुद को और बच्चों को ठीक से वक़्त नहीं दे पाती थी; और तीसरा, रॉनी और मेहक के बेहतर schooling के लिए। रॉनी अपना school शुरू करने से पहले गाँव में ही रहता था। इसलिए वो यादें उसे दादा-दादी के प्यार को miss करवाती थी।
उदय रॉनी को जवाब दिया, "Freedom के लिए।"
रॉनी पूछा, "क्या दादा-दादी आपको बाँध कर रखते थे, या वो आपको बात-बात पे टोकते थे? आपको ऐसा क्यों लगता है कि आप आजाद नहीं थे?"
उदय पहले तो यह सुन कर रॉनी को घूरता ही रह गया। अभिषा दोनों को देखकर मुस्कुराई। रॉनी अपने middle childhood के transition phase में आ चुका था। जहां बच्चे अब सिर्फ हल्के questions नहीं, बल्कि depth वाले अटपटे सवाल पूछना शुरू कर देते हैं।
उदय रॉनी को बोला, "इसे मैं अगर तुम्हें उदाहरण देकर समझाऊँ तो कैसा रहेगा?"
मेहक बोली, "पापा आप बातों को बहुत गोल-गोल घुमाते हो। आप सीधा-सीधा जवाब दो।"

उदय नजरें झुकाकर मुस्कुराता है, और बोलता है, "आज का खाना किसके पसंद का है?"
मेहक अपने बाएँ हाँथ को अपने सीने में थपथपाते हुए कहती है, "मेरा। पापा, मैं मम्मी से यह सब बनवाई हूँ। आपको कैसा लगा?"
उदय जवाब दिया, "सच कहूँ तो मैं यह खाना पहले भी कई बार खा चुका हूँ। हूं.., पर आज बहुत tasty खाना बना है।"
रॉनी अपना उदास चेहरा बनाता है।
उदय रॉनी से कहते हैं, "और तुम्हारे पसंद का क्या है इसमें?"
रॉनी उदास मन से ही बोलता है, "कुछ भी नहीं।"
उदय पूछता है, "क्यूँ?"
रॉनी जवाब दिया, "मम्मी को बोले, पर मम्मी बनाई ही नहीं।"
उदय रॉनी को पूछा, "तुम्हारी मम्मी यह क्यों बनाई, क्या तुम्हारी मम्मी को भी यह पसंद है?"
रॉनी बोला, "यह आप मम्मी से पूछो ना। मुझे कैसे पता होगा?"
उदय रॉनी से पूछा, "क्यूँ? तुम अपनी मम्मी से नहीं पूछे?"
रॉनी अब अभिषा की ओर मुड़ा और पूछा, "मम्मी, क्या आपका यह favorite है?"
जिसपर अभिषा अपना ' ना ' में सिर हिलाई। 
इसके बाद उदय रॉनी से पूछने का इशारा किए, "तो फिर तुम्हारी मम्मी यह खाना क्यूँ बनाई?"
रॉनी अभिषा की ओर देखा, अभिषा बोली, "क्योंकि मेहक जिद्द कर रही थी।"
इसके बाद मेहक अपना बाँया हाँथ से अपने कंधे पर आते बाल को झटक दी।
फिर मेहक एक bite लेकर बोली, "पापा, क्या आप अपना favorite खाना खाने के लिए यहाँ आए हो? क्या आपको वहाँ आपका favorite खाना नहीं मिलता था? पापा, आपका favorite खाना क्या है? (चिढ़ाते हुए) ओ, आपको यहाँ भी अपना favorite खाना खाने नहीं मिलता है।"

उदय मेहक की बात सुनकर झूठी उदासी के साथ बोला, "आज जब मैं घर आया था, तब तुम दोनों आपस में लड़ क्यों रहे थे?"
मेहक बोली, "भैया मुझे अपनी car का remote नहीं दे रहा था।"
रॉनी बोला, "तुम्हें मेरा car क्यूँ चाहिए? तुम्हारे पास तुम्हारा play kit तो है ना? जो तुम जिद्द करके पापा से खरीदवाई थी।"
इस situation में कोई आम guardian होता तो यहाँ पर बच्चों को sharing सिखाता। But उदय मेहक को बोला, "तुम्हारे पास तो तुम्हारा खुद का खेलने का सामान है। फिर तुम अपने भैया की चीजें क्यों छिनती हो?"
मेहक बोली, "क्योंकि अब मुझे वही चाहिए।"
उदय बोला, "ठीक है, मैं तुम्हारे लिए दूसरा ला दूँगा।"
मेहक बोली, "दूसरा ले कर क्या करुँगी? मुझे तो यही वाला चाहिए।"

उदय अपना भौहें उचकाते हुए मेहक को इशारा किया, "तुम्हें कुछ समझ आया?"
मेहक कुछ नहीं समझी, जैसे बहुत सारे readers नहीं समझे होंगे। वह पूछी, "क्या?"
उदय मुस्कुराते हुए hint दिया, "तुम, तुम्हारा भैया, और तुम्हारे भैया का खिलौना। मैं, तुम्हारी फुआ, तुम्हारे चाचा,...।"
मेहक बोली, "अच्छा..। तो चाचा और फुआ आपसे भी आपका खिलौना छीनते थे? पर अब तो आप खिलौनों से खेलते ही नहीं हो। फिर आप यह झूठ क्यों बोल रहे हो?"

बच्चे symbolism आसानी से नहीं समझते हैं। कई readers को भी यह बात समझ में नहीं आया होगा।
उदय explain करता है, "जब मैं तुम दोनों के दादा-दादी के साथ रहता था, तो मैं हर काम अपनी पसंद का नहीं कर सकता था। मुझे उनसे पूछना पड़ता था। फिर वो घर में बाकी लोगों को पूछते, कि उन्हें इससे कोई ऐतराज तो नहीं। फिर तुम्हारे चाचू और फुआ भी जिद्द करते कि उन्हें भी वही चाहिए। तो फिर मुझे double, triples मेहनत करना पड़ता था, एक खुद के लिए और एक-दो उनके लिए।"
रॉनी उदय से पूछता है, "तो क्या आपको चाचा और फुआ के साथ share करना अच्छा नहीं लगता है? आप उनसे प्यार नहीं करते हो?"
उदय बोला, "ऐसी बात नहीं है। कई चीजें ऐसी थी, जो मुझे चाहिए थी, और मुझे उनकी जरूरत थी। तुम अभी उन चीजों को नहीं समझोगे। जब बड़े हो जाओगे तब तुम उन्हें समझ पाओगे। पर क्योंकि वो मुझे चाहिए थी, इसलिए वो भी जिद्द करने लगते थे। भले ही उन्हें उस चीज की जरूरत ना हो, वो उसे पसंद ना भी करे। क्योंकि वो सोचते हैं कि अगर कोई चीज मुझे मिल रही है तो उन्हें भी मिलना चाहिए। ऐसे में दादाजी उनकी जिद्द पूरी नहीं कर सकते थे, इसलिए वो मेरी wish भी पूरी नहीं करते थे।"
रॉनी उदय को कहता है, "पर आप तो खुद कमाते हो ना पापा। फिर आप दादाजी से wish क्यों मानते हो? खुद खरीद लो।"
उदय कहता है, "यही तो दिक्कत है ना बेटा। मैं खुद से अपनी wish पूरी तो कर सकता हूँ। पर उसे घर ले जाने के लिए तो मुझे तुम्हारे दादाजी से permission लेना होता ही था।"
रॉनी पूछता है, "जब आप खुद खरीद से के ले जाते तो दादाजी क्यूँ allow नहीं करते?"
उदय जवाब देता है, "क्योंकि मेरे पास वो चीज देखकर तुम्हारे चाचा और फुआ भी तो जिद्द कर सकते थे।"
रॉनी पूछता है, "जो चीज दादाजी दिलाए ही नहीं, आप खुद से ख़रीदे हो, उसे देखकर वो जिद्द क्यों करेंगे?"
उदय मेहक को देखकर कहता है, "भाई-बहन ऐसे ही होते हैं।" फिर रॉनी को देखकर कहता है, "उन्हें लगता है कि उनके भाई-बहन के पास जो कुछ भी है, सब उनके पापा की वजह से है। इसलिए जिस तरह अपने पिता की संपत्ति में उनका बराबर हक होता है, वो अपने भाई के चीजों में भी अपना अधिकार जताते हैं।"
यह सुनकर मेहक उदास मन से उदय को बोली, "मुझे भैया की car नहीं चाहिए। मुझे कोई नई car भी नहीं चाहिए। मुझे बस कभी-कभी उससे भी खेलना है।"
रॉनी मेहक को बोला, "मुझसे पूछ कर लेना।"

इसके बाद सभी खाना खत्म करके हाँथ धोये। उसके बाद मेहक उदय का हाँथ पकड़कर उसे अपने कमरे में ले गई। कमरे में दो तल्ले वाला bed था। ऊपर का bed रॉनी के लिए था और नीचे मेहक सोती थी। कमरे में एक ही study table था। पर उसके तीन किनारों के सामने तीन chair था, और चौथा किनारा दीवार से सटा हुआ था। मेहक अपना bag अपने chair पे रखती थी, क्योंकि उसे अपनी पीठ को सहारा देना होता था। रॉनी bag रखने के लिए अपने chair और दीवार के बीच एक stool रखता था। तीसरे chair पर अभिषा बैठकर इन दोनों का homework करवाती थी और पढ़ाती थी। Table से सटे हुए दीवार पर एक study light लगा हुआ था और table के दोनों किनारों पर दो book shelf भी था जिसमें मेहक और रॉनी कताबें, notebooks and assignments रखते थे। कमरे में in-wall दो छोटे-छोटे wardrobes भी थे।

कमरे में अपने bed पे लेट कर, चद्दर ओढ़ कर मेहक बोली, "पापा,…" और मुस्कुरा कर देखने लगी।
उदय समझ गया कि मेहक क्या चाह रही है। उसे रात में जल्दी नींद नहीं आता था। इसलिए उदय उसे रोज कहानियाँ सुनाया करता था। पीछे से रॉनी आया और पैर को doormat में पोंछ कर ऊपर वाले bed में चढ़ गया। उदय कहानी सुनाना शुरू किया,

"एक बर्फीले इलाके का जंगल था। वहाँ एक भेड़िया का परिवार रहता था। भेड़िया शिकारी कुत्ते जैसे दिखते हैं और वो झुंड में रहते है। उसके झुंड को Pack कहा जाता है। उस pack में जो सबसे ताकतवर, समझदार, और अनुभवी भेड़िया होता है, जिसका बाकी सभी भेड़िए बात मानते हैं, उसे alpha कहा जाता है। किसी भी pack में सिर्फ एक ही alpha होता है। उस pack में जो second no. पे आता है, जो alpha की बात सभी को मनवाता है, उसे beta कहा जाता है। उस भेड़िए के pack में और भी भेड़िये थे। एक बार क्या हुआ कि उन भेड़ियों के pack में जो छोटे भेड़िए थे वो मजे करते हुए अपने pack (झुंड) से दूर चले गए। फिर शिकार का समय हुआ। Alpha भेड़िया सभी को आवाज दिया, उनके गुफ़ा के बाहर जमा होने के लिए। पर वहां पर वो छोटे भेड़िए नहीं आए। जब alpha भेड़िया देखा कि उसके pack के छोटे भेड़िए गायब है, तब वो beta भेड़िया को गुस्से से घूरा। क्योंकि उसका काम था सभी का ध्यान रखना। फिर वो बहुत ढूँढें उन छोटे भेड़ियों को, तब जाकर वो छोटे भेड़िए मिले। उसके बाद से beta भेड़िया उन छोटे भेड़ियों के ऊपर अपना खास ध्यान रखने लगा, कि कहीं ये अपने मजे करने के चक्कर में पूरे pack के लिए खतरा ना पैदा कर दे। पर छोटे भेड़ियों को यह चीज पसंद नहीं आता था। क्योंकि वो alpha भेड़िया नहीं था ना। फिर समय बिता, alpha भेड़िया बूढ़ा होने लगा, और beta भेड़िया समय के साथ ताकतवर होने लगा। जो छोटे भेड़िए थे, उन्हें लगने लगा कि जो Beta भेड़िया था, वो अब alpha बन जाएगा और जो बूढ़ा भेड़िया है, उसे gamma बना देगा। Gamma भेड़िया उसे कहते है जिसके पास बहुत अनुभव होता है। वह leader तो नहीं होता है पर pack को guide and protect करता है। वो छोटे भेड़िए भी बड़े हो गए थे। इसलिए वो रोज Beta भेड़िया के ताकत को आजमाने के लिए उसे challenge करते थे। ताकि वो ताकतवर होकर Beta भेड़िया को हराकर next alpha बनने का दावा कर सके। यह देखकर उस बड़े वाले बूढ़े alpha भेड़िया को लगा, कि Beta भेड़िया तो छोटे भेड़ियों को अपना ताकत से आसानी से हरा देगा। फिर छोटे भेड़ियों को या तो हार मानकर हमेशा नए alpha भेड़िया के सामने रहना होगा, या फिर अगर वो लड़ेंगे तो मारे जाएंगे। उस pack में young भेड़िए आपस में लड़कर ना मरे, इसलिए एक दिन Alpha भेड़िया Beta भेड़िया को लड़ाई के लिए challenge किया। लड़ाई का नियम था, अगर कोई भेड़िया पुराने alpha भेड़िया को हराएगा तो वह नया alpha भेड़िया बन जाएगा और pack के बाकी सभी भेड़िए फिर उसका बात मानने लगेंगे। जो Beta भेड़िया था, वो लड़ाई करने से मना कर दिया, और alpha भेड़िया के सामने surrender कर दिया। अब उस भेड़िए के pack का दूसरा नियम आता है कि, अगर कोई भेड़िया challenge accept नहीं करता है या हार मानता है, तो या वह मारा जाएगा या फिर उसे pack छोड़कर भागना होगा। क्योंकि pack के बाकी भेड़िए किसी कायर भेड़िए को अपने साथ नहीं रखेंगे। इसलिए वह Beta भेड़िया उस pack को छोड़कर वहां से भाग गया।"

मेहक बोली, "वह Beta भेड़िया भाग क्यों गया पापा? उसके पास कितना अच्छा मौका था लड़ाई करके जीतकर alpha बनने का।"
उदय आगे बताता है,

"क्योंकि जो बूढ़ा alpha भेड़िया था, वो Beta भेड़िया के सामने आसानी से हार नहीं मानता। क्योंकि अगर वो ऐसा करता तो बाकी जो भेड़िए थे, pack के, वो Beta भेड़िए के ताकत को कम आंकते और फिर वो उसे हराकर खुद alpha बनने की कोशिश करते। इसका मतलब यह था कि बूढ़ा alpha भेड़िया अपनी पूरी ताकत से Beta भेड़िया से लड़ता। जिसे हराना Beta भेड़िया के लिए बहुत मुश्किल था।"

मेहक बोली, "तो क्या Beta भेड़िया, alpha से डर गया, इसलिए भाग गया ?"
उदय आगे बोला,

"नहीं। Beta भेड़िया भी ताकतवर था, और alpha बूढ़ा हो गया था। पर लड़ाई क्योंकि बहुत खतरनाक होता तो अंत में दोनों कमजोर हो जाते। जिसके बाद इन दोनों को मारकर बाकी किसी भी दूसरे भेड़ियों के लिए alpha बनना आसान हो जाता। और अगर Beta भेड़िया alpha से जीत भी जाता तो alpha या तो पूरी तरह घायल हो जाता, या फिर मारा जाता। क्योंकि भेड़ियों के pack का तीसरा नियम यह होता है कि बाकी भेड़िए alpha भेड़िया के प्रति अपना वफादारी दिखाने के लिए उसके दुश्मन को मार डालते हैं। ऐसे में जो बाकी भेड़िए होते वो पुराने बूढ़े alpha को मार डालते ताकि नए alpha के प्रति वो अपना वफादारी दिखा सके। और क्योंकि पुराना alpha भेड़िया Beta बेड़िया का father था, इसलिए वह लड़ाई नहीं किया और लड़ाई छोड़कर भाग गया।"

मेहक पूछी, "तो क्या इसका मतलब बिना कोशिश किए हार मानना, और लड़ाई से भागना बुरी बात नहीं है?"
उदय समझाया, "यह depend करता है कि situation क्या है। लड़ाई की कीमत क्या चुकाना होगा। वो जो Beta भेड़िया था, पहले लड़ता था क्योंकि उसे उसके अपनी family को बचाना था और उनका पेट भरना था। पर अगर वह यह लड़ाई लड़ता तो वह जो जीतता उससे बड़ा वह कीमत चुकाता। इसलिए वह लड़ने के जगह भागना चुना।"

मेहक पूछती है, "इसका मतलब पापा?"
उदय समझाता है, "इसका मतलब यह है कि कौन सी चीज सही है या गलत यह situation पर निर्भर करता है, कि उन  situations के outcomes क्या आएँगे।"
यह सुनकर रॉनी, जो कि ऊपर अपने bed से झुककर इन्हें सुन रहा था, पीठ के बल हो गया। वह ऊपर छत की ओर देखने लगा। उसे अपना जवाब मिल चुका था कि उसके पिता अब उसके दादाजी के साथ क्यों नहीं रहते हैं।
मेहक पूछी, "फिर क्या हुआ पापा। वो Beta wolf क्या अकेले मर गया?"
उदय कहा, "नहीं", और आगे बताया,

"जो भेड़िए अपने pack को छोड़ देते हैं उन्हें lone wolf कहा जाता है। Lone wolf तब तक अकेले भटकते हैं जब तक उन्हें कोई ऐसा pack ना मिल जाए जिसका alpha भेड़िया या तो बहुत कमजोर हो, जिसे हराकर वो फिर उस pack का नया alpha बन जाए, या फिर जिसका alpha पहले ही मर चुका हो। जो कि rarely होता है। क्योंकि हर भेड़िया के pack में कमजोर alpha भेड़िया को नए ताकतवर भेड़िए से replace कर दिया जाता है। इसलिए उस lone wolf को तब तक अकेले भटकना पड़ता है, जब तक उसे कोई female lone wolf ना मिला जाए जो उसकी partner भेड़िया बन सके। जब दो male-female lone wolfs मिलते हैं, तो फिर वो दोनों एक दूसरे के ताकत को आजमाते हैं और दोनों मिलकर बच्चे पैदा करते हैं और नया pack बनाते हैं। उस lone wolf का भी यही हुआ।"

मेहक मुस्कुराते हुए उदय को घूरती है और पूछती है, "और अगर उस lone wolf को कोई female lone wolf भेड़िया as a partner नहीं मिलती तो?"
उदय बताता है, "फिर तो उसे पूरी जिंदगी lone wolf बनकर ही बिताना पड़ता। अकेले।"

उसके बाद उदय bed से उठता है और room का light off करके deem light जला देता है, और दोनों बच्चे सो जाते हैं।

----->Transition 3

सुबह होती। अभिषा, जो रात को album को बंद करके सोई थी, अपने bed से उठी। देखी, वहां कोई नहीं था। उदय पहले ही उठ कर नीचे नाश्ते के लिए जा चुका था। मेहक जो कि present में बड़ी हो चुकी थी, नाश्ता बनाकर table में उदय के सामने बैठ कर चाय पी रही थी, और उदय अखबार पढ़ रहे थे। अभिषा नीचे आई, और पूछी, "तुम्हारा लाड़ला भाई कहा है?"
मेहक बोलती है, 
"जो नजरों के सामने है, उसकी कद्र नहीं। 
ढूंढ़ती है निगाहें उसे हमेशा, जो नजर के सामने नहीं होता है॥

भाई नाश्ता करके, office चला गया।"

अभिषा मेहक के कंधे में मारते हुए बोलती है, "भाई की diary पढ़-पढ़ कर लगता है तुमको भी शायरी का शौक चढ़ रहा है।"
मेहक बोली, "मैं तो normal ही बोली हूँ। आपको शायरी जैसा क्यों लगा?"
अभिषा मेहक की बात को ignore करके पूछी, "आज बहुत जल्दी office चला गया। क्यूँ ?"
मेहक मुस्कुराते हुई बोली, "होगी ना खड़ी कोई bus stop में wait करने वाली। आप तो मिल कर आई ही हो।" और मेहक अपना भौहें उचकाई।

(Ref.: Read story "Hope Without Hope" and Prelude.)

----- The story will continue in next chapters. ----
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Life की परछाई 
Chapter 10 : Perspectives on Individuality 
(Content काफी लंबा होने के कारण इस chapter को parts में divide किया गया है। Comment में बताए कि यह आपको कैसा लगा। )


Story by -AnAlone Krishna.
Published on 8th August, 2026 A.D.

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