(युवा उम्र में प्यार और रिश्तों को लेकर उलझन सिर्फ इस बात की नहीं होती कि हमें कौन पसंद है, बल्कि यह भी कि हम किसी को अपने कितना करीब आने दें और उस closeness में अपनी individuality और freedom को कितना बचा पाएँ। कभी किसी को खोने का डर हमें रिश्तों से दूर रखता है, तो कभी खुद को खो देने का डर किसी को करीब आने नहीं देता। हम अपने लिए ही नहीं, कभी-कभी दूसरे के future के लिए भी फैसले लेने लगते हैं, जबकि उसका चुनाव उसका अपना होना चाहिए। दूसरी ओर, family, caste, community, social class, wealth और power हमारी personal choices को प्रभावित करते हैं। ऐसे में सवाल सिर्फ प्यार या partner चुनने का नहीं रह जाता; सवाल यह भी है कि हमारी पसंद कितनी हमारी अपनी है, हमारे डर कितने हमारे experiences से बने हैं और अपनी जिंदगी चुनते हुए हम अपनी individuality को कितना बचा पाते हैं।)
हमदर्द सा कोई
"Social Preferences"वक़्त गुज़रेगा, तो कहानी वक़्त सुनाएगा। पर जहां वक़्त थम जाए, तो वक़्त के साथ किरदारों को सुनो।
कोमल को उसकी गली की मोड़ तक छोड़ने के बाद राजेश सतीश के कंधे पर हाँथ रखते हुए कहा, "चलो अब हम भी अपने room चलते हैं।"
ढलती शाम के साथ, street की गाड़ियाँ और horn बढ़ गए थे। चौराहे के fast foods और ठेलो में भीड़ काफी था। जो लोग रोज अपने काम के लिए शहर की भीड़ में आते हैं, वो एक साथ घर जा रहे थे। जो बच्चे पढ़ने के लिए शहर में आते हैं, सतीश और रवि की तरह, वो अपना tuition करके या ground से खेलने के बाद वापस अपने lodge, hostel के rooms जा रहे थे। उनमें से कुछ शाम में मची अपनी पेट की भूख, तो कोई अपनी जीभ के स्वाद के लिए fast food और ठेले के आगे भीड़ लगाते हैं। उनके किनारे से होते हुए राजेश सतीश के कंधे पर अपना हाँथ रखे हुए उसके साथ room के लिए मोड़ से जाने लगा।
जाते हुए सतीश राजेश को बोला, "क्या तुम अपना room पैदल ही जाओगे? रवि का wait कर लेते, वो तुम्हारा bike जब लाता तो..."
राजेश बीच में बात काटते हुए, सतीश के ठुड्डी को अपनी उँगलियों से दबाकर हिलाते हुए बोला, "तुम्हारे साथ आज मुझे quality time spend करने का मन है।"
सतीश को call आया। राजेश सतीश को छोड़कर दो कदम पीछे हुआ और अपना cellphone निकालकर रवि को call किया और उसे कहा, "Bike अपने पास आज रख लो। मैं सतीश के साथ room निकल गया हूँ।"
इसके बाद वह सतीश के तरफ मुड़ा, वह देखा कि सतीश call पे बात नहीं कर रहा है, बल्कि text कर रहा है, "अभी दोस्त के साथ हूँ। मैं free होने के बाद call करुँगा।"
राजेश का एक नजर cellphone के ऊपर लिखे नाम पर पड़ा, लिखा था- "Mehak". राजेश पूछा, "यह Mehak कौन है?"
सतीश जवाब दिया, "मेरी एक cousin की friend है।"
राजेश बोला, "तुम रे ज्ञानी, तुमसे पूरा खानदान सलाह लेता है।"
राजेश उसके आगे कुछ नहीं पूछा। वह पहले से देखते आ रहा था कि राजेश की family में अगर किसी को भी कोई career guidance चाहिए होता था, वो सतीश को call करते थे। सतीश उनका help कर पाए, चाहे ना करे। पर वो सतीश को hopefully एक बार call जरूर करते थे। ठीक वैसे ही राजेश को इस बार भी लगा, कि ऐसे ही Mehak भी कोई होगी जो सतीश से कुछ help चाहती होगी।
राजेश सतीश के कंधे पर हाँथ रखा और फिर वापस दोनों lodge की तरफ जाने लगे। राजेश सतीश से पूछा, "यार तुम अब भी lodge में क्यों रहते हो? अब तो कम से कम flat में shift हो जाओ।"
सतीश बोला, "यार, budget ज्यादा चला जाएगा।"
राजेश पूछा, "ये pocket money बचाकर करते क्या हो? तुम्हारी कोई girlfriend भी नहीं है जो तुमसे खर्चे करवाए।"
सतीश राजेश को देखकर मुस्कुराया और पूछा, "झाल मुड़ी खाओगे?" आगे ठेले के तरफ़ इशार करते हुए।
राजेश मुस्कुराया, वह कुछ कहा नहीं, पर हामी भर दिया।
सतीश दो cone झालमुड़ी बनाने के लिए बोलकर सामने रखे bench पर बैठ गया। उसको देखकर राजेश बैठते हुए पूछा, "तो आगे क्या सोंचा है?"
सतीश confirm होने के लिए पूछा, "किस matter में?"
राजेश बोला, "Life को लेकर..."
सतीश बोला, "अभी तो result का wait कर रहा हूँ। और entrance test के forms भी apply कर दिया हूँ। अब आगे इनके जो results आयेंगे, उसके according decide करूँगा।"
राजेश पूछा, "क्या सिर्फ पढ़ाई करके नौकरी पाना ही life होता है?"
सतीश पूछा, "तो तुम इसके अलावा किस बारे में पूछ रहे हो?"
राजेश बोला, "Life partner, love, marriage, etc."

सतीश यह सुनकर मुस्कुरा देता है। वह उठता है, ठेले वाले को पैसे का note थमाते हुए, उससे दो cone में झालमुड़ी लेता है और एक राजेश की ओर आगे बढ़ाता है।
वक़्त, यानी कि मैं यह देखते आया हूँ शुरू से कि, जो अपने life में किसी मुद्दे पर कोई decision ले नहीं पाते है, वो उस matter पर दूसरों का राय जानने की कोशिश करते हैं। वो सीधे यह नहीं कहते हैं कि उन्हें किसी से किस matter पर उनकी perspective जाननी है। बल्कि वो लोगों को वह scenario में psychologically फंसाते है, और यह जानने की कोशिश करते हैं कि लोगों का खुद का उन scenario में क्या take होता है। आपसे जब कोई शादी या किसी और विषय को लेकर ऐसे कोई पूछ्ता है, जैसे राजेश सतीश से पूछ रहा है; इसका मतलब यह होता है कि वह उस matter पर आपकी perspective को जानने की कोशिश कर रहा है, ताकि उसके आधार पर वह खुद कोई decision ले सके।
झालमुड़ी के cone को पकड़ते हुए राजेश भी खड़ा हो गया। फिर एक मुट्ठी झालमुड़ी को अपने मुँह में भरते हुए सतीश वापस अपने room की ओर जाने के लिए कदम बढ़ाया। उसके पीछे-पीछे राजेश भी अपना कदम बढ़ाकर सतीश के बगल में हो लिया। सतीश झालमुड़ी को अपने मुँह में चबाते हुए मुस्कुराकर राजेश को देखा, और बोला, "यार, मुझे ऐसा लगता है कि, मुझे नहीं लगता है कि, मुझे कभी किसी से वैसे प्यार हो सकता है जैसे हम किताबों में पढ़ते हैं, या movies में देखते हैं।"
राजेश बोलता है, "वो तो fantasy होता है। असल जिंदगी में वैसा कुछ थोड़ी होता है। बस शुरू में हमें कोई पसंद आता है, फिर हम attract होते हैं, फिर दोस्ती और प्यार हो जाता है।"
सतीश कहता है, "मुझे नहीं लगता है कि मेरे साथ वैसा भी कुछ होगा।"
राजेश अगला मुट्ठी झालमुड़ी अपने मुँह में भरते हुए हैरानी जताते हुए पूछा, "क्या मतलब?"
सतीश समझाता है, "जैसे तुम्हारे life में जब कोई आती है, तुम्हें उससे प्यार हो जाता है। मुझे वैसा कुछ feel ही नहीं होता है। जैसे बाकी सभी friend है, तुम हो, तुम सभी के लिए जैसे normal feelings है, लड़कियों के लिए भी वैसा ही same normal feelings होता है। जैसे तुमलोग को देखता हूँ किसी के प्रति बहुत ज्यादा attract होते हुए, उन्हें बहुत ही special treat करते हुए, मेरे अंदर वैसी feelings आती ही नहीं है।"
राजेश पूछता है, "तो फिर कोमल को special treat कैसे करते हो?"
सतीश हैरानी जताते हुए बोलता है, "कोमल को कोई special treat कहां करता हूँ यार! बस थोड़ा conscious रहता हूँ, जब वो सामने होती है। ताकि पिछली बार की तरह फिर से मैं उसे कहीं hurt ना कर दूँ।"
राजेश बोला, "इसे ही special treatment कहते हैं। क्योंकि hurt तो मैं भी हुआ था।"
सतीश अपना मुट्ठी से झालमुड़ी मुँह में लेते हुए आगे बढ़ते हुए बोला, "मर्द को दर्द नहीं होता है। और इस तरह से सिर्फ कोमल के साथ नहीं होता हूँ। बल्कि मेरे सामने कोई भी लड़की होती है तो अब मैं ऐसे ही treat करता हूँ।" फिर अचानक सतीश को कुछ याद आया। वह रुका और बोला, "बीच में कोमल का बात कहाँ से आया? हम तो कुछ और बात कर रहे थे ना?"
राजेश भी रुक गया और अपने मुँह में झालमुड़ी भरते हुए सतीश को घूरा, और smile किया। फिर दो 5 sec smile करते हुए घूरने के बाद बोला, "तुम कितनों को special treat करते हो, यह मुझे क्या पता! मैं जिसके साथ तुम्हें maximum देखूँगा, मैं उसी के बारे में पूछूँगा ना...।" और फिर रास्ते की ओर मुड़ा, और आगे कदम बढ़ाया।

सतीश भी उसके बाद कदम बढ़ाया और उसके साथ हो लिया। सतीश बोला, "मुझे सच में किसी को लेकर वैसा कुछ feel ही नहीं होता है। सब कुछ artificial लगता है। मैं किसी के सामने जैसे behave करता हूँ, मैं वह consciously रहता हूँ। ऐसा लगता है कि मैं बस Act कर रहा हूँ। इसलिए ऐसा किसी के भी सामने perform कर सकता हूँ। जब तक वो होतीं है तब तक बंधा हुआ सा feel होता है। फिर उनके जाते ही relief और आजाद feel करता हूँ। मुझे ऐसा लगता है कि मैं चाहता ही नहीं हूँ कि मेरे कोई करीब आए। बस emotionally एक distance maintain करते हुए उनके साथ अच्छा behave करने की कोशिश करता हूँ, ताकि उन्हें मैं hurt ना करूँ। शायद इसी repulsion force की वजह से ही मैं heavy feel करता हूँ। जब मैं consciously उनके सामने nicely behave करता हूँ।"
राजेश झालमुड़ी के cone से आखिरी मुट्ठी भरते हुए बोला, "और तुम्हें क्या लगता है, कि तुम्हारे ऐसा करने से उन्हें uncomfort feel नहीं होता होगा? तुम खुद को इतना अच्छा actor समझते हो कि तुम अपने body language में अपने discomfort तक को छुपा सकते हो?"
सतीश बोला, "तो क्या करूँ? उन्हें मुँह पे बोल दूँ कि मुझे किसी का करीब आना अच्छा नहीं लगता है। क्या इससे वो hurt नहीं होंगी?"
राजेश मुस्कुराते हुए अपनी हथेली की आखरी मुट्ठी भर झालमुड़ी अपने मुँह पे भरते हुए पूछा, "अच्छा मुझे तो कम से कम अपने Abstract के करीब आने देते हो ना? या हमारे भी करीब आने से तुम discomfort feel करते हो? वरना बता दो, तुम्हारे psychological que के और करीब जाने की मैं कोशिश नहीं करूँगा।"
सतीश defeated अहसास के साथ उदास आँखों से उसे देखा। राजेश यह देखकर मुस्कुराया और अपने हाँथ में पकड़े झालमुड़ी के खाली cone को फेंका। वह समझ गया कि सतीश का मन उसे resist करने की कोशिश नहीं करता है, पर अभी उसे दूर होने का fear होने लगा है। राजेश सतीश के कंधे पर हाँथ रखा, फिर उसके साथ room की ओर साथ में कदम बढ़ाते हुए बोला-
"हम किसी को पसंद या नापसंद कैसे करते हैं? हमें लगता है कि हमारी पसंद या नापसंद हमारी अपनी खुद की है। पर तुम्हें पता है कि यह हमारी पसंद या नापसंद आखिर क्यों होती है, यह बनती कैसे है? यह सभी हमारे personal experience से बनती है। जब से हमें होश आता है, बचपन में; जब से हम चीजों को observe करना शुरू करते है, लोगों के behaviour को हम experience करते हैं, उसे observe करते हैं। एक वक़्त था, जब मैं हर किसी में शिवि से compare करता था। उसकी बातें/nature मुझे जिसमें भी दिखती थी, वो मुझे नापसंद लगने लगती थी। इसलिए शिवि के बाद मेरा relationship किसी से साथ जमा ही नहीं। पर अब जब मैं बीते experiences को observe करता हूँ, मैं उनके करीब भी इसलिए गया था क्योंकि कहीं ना कहीं शिवि की वो बातें उनमें मुझे दिखी थी, जो मुझे पसंद थी। तुम और मैं, हम सभी अपने आसपास जब लोगों के अच्छे-बुरे behaviour को experience करते हैं, उस observation से हमारा पसंद और नापसंद बनता है। हमें लगता है कि हमारी पसंद या नापसंद हमारी अपनी खुद की है। पर असल में यह हमारा environment, हमारा experience तय करता है कि हम क्या पसंद और नापसंद करेंगे। पर अब जब इस चीज का realisation होता है ना, मेरी पसंद या नापसंद का कोई मायने बचता ही नहीं है। मुझे अगर कुछ अलग experience मिला होता, तो शायद मेरी पसंद और नापसंद भी कुछ और होती। मसला यह है कि आखिर इस realisation का, इस knowledge का मैं क्या करूँ? मुझे लगता है कि हम किसके साथ comfort and complete feel करते हैं, बस यह बात मायने रखता है। मुझे शिवि के साथ अपना life जितना comfort feel हुआ, उतना फिर किसी के साथ भी नहीं हुआ। तुम डरते हो, किसी के साथ emotional attachment होने से। इसलिए एक psychological barrier बना कर रखे हुए हो, जिसके आगे किसी भी लड़की को आने नहीं देते हो। मैं कहूँगा कि इस barrier को खोलो और जो आना चाहे उसे अपने करीब आने दो। क्योंकि जो तुम्हारे अधूरेपन को complete करे, तुम जिसके साथ comfort feel करो और पूरी जिंदगी जिसके साथ बिताने का दिल करे, यह मिलना आसान नहीं है। वरना society में इतना सारा marital disputes नहीं होता। और जब तक किसी को आजमाओगे नहीं, तुम्हे पता कैसे चलेगा? क्या तुम भी अपनी जिंदगी को किस्मत के भरोसे छोड़ना चाहते हो?"
सतीश और राजेश, दोनों सतीश के lodge के gate के पास पहुंचे। सतीश gate खोलकर आगे बढ़ा और राजेश उसके पीछे कमरे तक आया। सतीश कब अपना झालमुड़ी का cone रास्ते में फेंका, पता भी नहीं चला। राजेश सतीश के साथ कमरे में गया, bed पर लेट कर कोहनी के सहारे टेढ़े होकर बैठ कर बोला, "मुझे लगता है कि life में एक बार कम से कम हर किसी को सच्चा वाला प्यार जरूर होना चाहिए। वरना वो अपने पसंद-नापसंद को कैसे समझेंगे! उन्हें जबतक यह realisation नहीं होगा, उनके पसंद-नापसंद को हमेशा उनका environment influence करता रहेगा। उन्हें लगेगा कि उनकी पसंद-नापसंद उनकी अपनी खुद की है। पर जिसको मेरे जैसा समझ आ गया होगा ना, वो उन गधो के emotions के साथ बहुत अच्छे से खेल सकता है।"
सतीश राजेश के इस बात को सुनकर बोला, "शुक्र है मैं इस पागलपन में पड़ने से बच गया।"
सतीश bed में पैर झुलाकर लेट गया, अपने दोनों हाँथो की हथेली को उंगलियों से बांधकर तकिये की तरह अपने माथे के पीछे ले लिया, और दो पल सोंचकर बोला, "तुम्हें पता है शादियों में लोग cast-community-wealth को इतना क्यों importance देते हैं?"
राजेश curiosity दिखाते हुए बोला, "क्या तुम ये सब मानते हो?"
सतीश बोला, "मेरे मानने या ना मानने से क्या फर्क पड़ता है! जो समाज का हिस्सा है, और सच है, उसे हम झुठला तो नहीं ना सकते हैं।"
राजेश पूछा, "क्या मतलब?"
सतीश बोला, "सारा खेल power dynamics का है। सारा खेल उनके desire and dreams का है। कि किसे किस चीज को control करना है- Economy, Politics or Society. कि किसे किस चीज को कमाना है- Opportunity, Connections, Believers. कि किसे क्या बचाना है- Wealth, Loyalty, Trust."
राजेश कुछ नहीं बोलता है और bed पर लेटे-लेटे सुनता रहता है। सतीश आगे बोलता है- "पता है, मुझे ऐसा लगता है कि तुम अगर अपनी किसी girlfriend से शादी करना चाहोगे ना, तो बहुत ज्यादा possibility है कि तुम्हारी family तुम्हारे love को accept कर ले।"
राजेश curious होकर पूछा, "और तुम्हें ऐसा क्यूँ लगता है?"
सतीश explain किया, "तुम बड़े businessman family से belong करते हो।"
राजेश बीच में बात काटते हुए पूछता है, "तो उससे क्या होता है?"
सतीश आगे explain करता है, "तुम अगर किसी बड़े businessman की बेटी से affair करोगे तो तुम्हारी family को collaboration का फायदा होगा। तुम अगर किसी average businessman की बेटी से affair करोगे तो तुम्हारी family को expansion का फायदा होगा। तुम अगर एक educated and responsible लड़की से affair करोगे तो तुम्हारी family को accounting and management का फायदा होगा। तुम अगर किसी politician, advocate, bureaucrat, administrator की लड़की से affair करोगे तो तुम्हारी family को legal help and opportunities मिलेंगी।"
राजेश पूछा, "और अगर मेरा affair किसी गरीब घर की लड़की से हुआ तो..?"
सतीश बताया, "गरीब घर की लड़की affair करेगी ही नहीं। उन्हें family के respect का बहुत ज्यादा चिंता होती है। कोई लड़की अगर फिर भी affair कर रही है, तो probably तुम्हारी family उसे reject करेगी, क्योंकि वो उसका irresponsible behaviour होगा।"
राजेश बोला, "अच्छा...। पर मेरे पास जो options है, यह options क्या तुम्हारे पास भी नहीं है? तुम्हारी family को भी तो इन families के साथ जुड़ने से लाभ होगा।"
सतीश बोला, "नहीं। नहीं है।"
राजेश को देखा, वह शांत था, इसलिए सतीश आगे बोला, "यह सब power dynamics का खेल है। जब दो families एक दूसरे के साथ जुड़ती है तो उसके साथ उन्हें अपनी privileges भी share करनी पड़ती है। तुम एक लड़के हो। तुम जब किसी लड़की को अपने घर लाओगे, तो उस relation से जो family को तुम्हारे family से return में privileges देना होगा, उसमें तुम्हारी family अपने नीचे उसे किसी भी business sector में appoint करके उससे काम ले सकती है। जो कि आमतौर पर तुम्हारा कोई साला ही होगा, जो कि अपने जीजा और दीदी के आगे पीछे दुम हिलाते हैं। इससे center of power हमेशा ही तुम्हारे family के पास रहेगा। पर अगर तुम्हारी बहन किसी ऐसे लड़के से शादी करना चाहेगी जो तुम्हारे family members के standard से नीचे हो, तो उसे यानी कि अपने जीजा को तुम अपने नीचे नचा नहीं पाओगे। आमतौर पर respect की बात होती है, जिसके लिए आगे तुम्हारी बहन ही revolt कर देगी। इसके वजह से तुम्हें अपने जीजा के साथ power sharing करना होगा। जो कि कोई भी family, जिसे power में रहने का नशा हो, वो कभी अपने power को lower standard से आने वाले समाज के किसी family के साथ share करना नहीं चाहेगी। मतलब वो families कभी भी अपना privilege किसी के साथ share नहीं करना चाहेगी। इसलिए वो सारे options जो तुम्हारे पास है, जो मेरे family standard से ऊपर के हैं, वो मेरे लिए नहीं है। Love is a luxury thing. और हम जिस age में है, उस age में यह commodity हमें खुद के दम पर नहीं मिल सकता है। यह हमें तभी मिल सकता है, जब हमारे parents हमें यह दिला सके, और जब वो इसे दिलाना चाहे।"
राजेश आगे पूछता है, "अच्छा चलो मान लिए कि यह privilege मुझे है। पर क्या सिर्फ मुझे है, बाकी families के पास नहीं है? छोटे या average businessman families, civil authorities, politicians, upper class families, क्या उनके बच्चों के पास love करने या partner चुनने का freedom नहीं है?"
सतीश राजेश की तरफ मुड़कर अपनी कोहनी के सहारे टेढ़े होकर बैठकर अपना observation explain करता है, "देखो, अगर बात करे average and small businessman families की तो उन्हें economically survive करने के लिए other businessman families के साथ collaboration and support की जरूरत होती है। And दो families के बीच trust and cooperation का सबसे reliable कड़ी marriage relations होता है। इसलिए वो अपने बच्चों को तो economically अपने से inferior section, labour class families के बच्चों से relation जोड़ने की permission देंगे नहीं। क्योंकि उन्हें फिर सामने वाले party को अपने market में जगह देना होगा। अगर वो ऐसा नहीं करेंगे तो relation खराब होगा, और अगर करेंगे तो market में जिनके साथ वो पहले से business करते आए है, वह market खराब होगा। इसलिए average and small businessman families के बच्चों के पास खुद से partner चुनने का freedom rarely ही होगा, या एक certain community के अंदर होगा।"
राजेश आगे पूछता है, "और बाकी सब में?"
सतीश अपना analysis आगे explain करता है, "अगर हम बात करे politicians की तो उन्हें अपना vote bank मजबूत चाहिए। अगर वो inter-caste को allow करेंगे तो शायद उनका खुद के community से vote कटेगा, या फिर अगले community से vote बढ़ भी सकता है। इसलिए उनके लिए social acceptance बहुत मायने रखेगा। But social stress उनके decisions को influence करने की ताकत ना पा ले, इसलिए वो time के according present social need and अपनी family को भी priority दे सकते हैं। Politicians इन सभी को balance बनाकर चलने में expert होते हैं। इसलिए यह पहले से कह नहीं सकते हैं कि वो in future क्या choose करेंगे। तो आजमाने का बस एक ही तरीका होता है कि वक़्त के flow में बहा जाए।"
राजेश पूछा, "और बाकी bureaucrats, advocates, and other civil servants,... उनके बच्चों के पास क्या options होता है? क्या वो love कर सकते हैं?"
सतीश बताता है, "यह सब अपने काम से काम रखते हैं। ज्यादा social होते नहीं है। इसलिए इनके बारे में कोई generalised observation देना सही नहीं होगा। यह उनके family background पर depend करेगा कि उनकी family ethics क्या है। वो किस चीज को priority देते हैं- cast, community, wealth, opportunity, या अपने बच्चों की खुशी। Individually हर family का अपने बच्चों के प्रति different approach हो सकता है। इसलिए उनके बारे में कुछ कहना सही नहीं होगा।"
इतनी देर से कोहनी के सहारे लेटने से राजेश का कोहनी दर्द करने लगा उसके वह उठकर बैठ गया, और अपने दोनों हथेली के सहारे अपनी सीधे हाँथ में पीठ को टिकाते हुए पूछा, "अच्छा तुम्हें ऐसा क्यों लगता है कि मैं या मेरी family casteist नहीं होंगे? वो मुझे किसी को भी partner बनाने के लिए allow कर देंगे?"
सतीश उसे अपना observation बताता है, "Cast and Community सिर्फ उनके लिए priority होती है जो power dynamics में मोहरे हैं। जो इस hierarchy में players है, उनके लिए यह बस choice होता है, necessity नहीं।"
राजेश पूछता है, "क्या मतलब?"
सतीश explain करता है, "जो economically, politically, socially top में बैठे होते हैं; वो अपना stability and growth देखते हैं। But जो नीचे होते हैं, फिर चाहे वो किसी भी caste से belong करते हो, वो अपने नस्ल को कितना ही श्रेष्ठ समझते हो, क्योंकि absolute power उनके हाँथ में नहीं है, उन्हें उनके community and caste ethics के साथ चलना पड़ता है।"
राजेश ध्यान से सुन रहा था और सतीश आगे समझाता है, "जो economically bottom section में आते हैं, वो अपने life की छोटी-छोटी चीजों के लिए समाज के दूसरे लोगों पर depended होते हैं। समाज से उन्हें help and support मिलता रहे, इसके लिए वो social values को बहुत ज्यादा priority देते हैं। पर जो middle section में आते हैं, वो social values को उतना importance नहीं देते हैं, but क्योंकि उन्हें भी support and cooperation मिलता रहे, इसलिए वो भी social obligations को मानते हैं। पर उन्हें जब मौका मिलता है तो वो इसे तोड़ते भी है। Almost visionless love, जिसका उन्हें पता है कि आगे कोई future नहीं है, फिर भी affairs जानबुझकर यही लोग करते हैं। जो बच्चे upper section में आते हैं उनका relationship future partnershiping के लिए होता है, और lower section का love immaturity होता है। But middle section का affair बस pleasure, joy and entertainment के लिए होता है।"
राजेश पूछता है, "तुम यह बातें तो economics के basis पर बता रहे हो। Social Class, Caste के basis पर तो तुम बात ही नहीं किए।"
सतीश उल्टा उससे पूछा, "Caste और class किसपर based है? लोगों के profession और power dynamics पर ही तो। वो तो लंबे समय बीतने के कारण अब इसमें कई layers बन गए है। पर root में तो लोगों का profession और center of power ही था।"
राजेश सतीश से पूछा, "अच्छा मेरे बारे में तो बता दिए। पर तुम खुद किस category में आते हो? तुम क्यों अपने लिए खुद partner नहीं चुन सकते हो? क्या तुम भी lower या middle section में आते हो?"
सतीश अपने बारे में बताया, "मेरा situation इनसे थोड़ा सा better है।"
राजेश पूछा, "क्या मतलब?"
सतीश आगे बताया, "गाँव के समाज में लोग छोटी-छोटी बातों पर आपस में कलह कर लेते हैं। तो शुरुआत यूँ हुआ कि दो लोग आपस में लड़े। हमारी family उनके बीच पड़ना नहीं चाहती थी। जिसे वो ऐसे लिए कि हमारी family उन्हें support नहीं का रही है। शुरू में वो ignore करने लगे, पर जब वो देखे कि इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता है, तो वो फिर हमें realise करवाने के लिए षडयंत्र भी करने लगे। हम उन दोनों में से किसी से दुश्मनी नहीं चाहते थे, इसलिए किसी एक पक्ष को नहीं चुने, इसलिए दोनों से दुश्मनी हो गई। और यह चीज इतना बढ़ चुका है कि अब हमारी family को उनसे उम्मीद ही नहीं है, इसलिए वो अब हमारी family पर influence and दबाव उस तरह नहीं डाल सकते हैं जैसे वो बाकी families पर डालते हैं। पर..."
राजेश सतीश को ऐसे बीच में रुकते देख पूछा, "पर क्या?"
सतीश बोला, "मुझे नहीं पता कि मैं अगर किसी को अपनी family से introduce करवाऊंगा तो उसे मेरी family accept करेगी भी या नहीं।"
राजेश सतीश को समझाया, "जब तक तुम यह आजमाओगे नहीं, तब तक तुम्हें यह पता कैसे चलेगा?"
सतीश उससे सवाल किया, "तुम कहते हो कि life में जबतक किसी को at least इश्क़ नहीं होगा, वह अपना पसंद-नापसंद नहीं समझ सकता है। वो बस अपने environmental experience से influenced होता है। मेरी बातों को सुनने के बाद भी तुम्हें लगता है कि environment सच में मुझे उस तरह influence करता होगा?"
राजेश सतीश को मनाने की कोशिश करता है, "देखो, मेरा किसी को पसंद करना या ना करना, यह another matter है। मैं at least उन्हें एक बार मौका देकर समझने की कोशिश तो करता हूँ। पर तुम हो कि वो जो boundary बनाए हुए हो अपने चारों ओर, उसके अंदर किसी को आने ही नहीं देते हो। अगर मैं करीब आ सकता हूँ, रवि करीब आ सकता है, तो किसी लड़की को इतना करीब आने देने में तुम्हें डर क्यों लगता है? क्या तुम्हें कहीं ऐसा तो नहीं लगता है कि अगर कोई लड़की तुम्हारे दिल के इतने करीब आएगी तो तुम खुद को कहीं control नहीं कर पाओगे, इसलिए डरते हो?"
सतीश confusion के साथ बोला, "पता नहीं। शायद मैं इस बात से डरता हूँ कि अगर कोई मेरे करीब आएगी तो कहीं वो मुझसे obsessed ना हो जाए।"
राजेश पूछा, "तो इसमें बुरा क्या है? सच्चा प्यार किसे नहीं चाहिए?"
सतीश अपना problem समझाता है, "जब कोई मेरे सामने होती है तो मैं उसके सामने nicely behave करने की कोशिश करता हूँ। But मैं real में वैसा नहीं हूँ। मैं बस वैसा Act करने की कोशिश करता हूँ।"
राजेश सतीश को रोकते हुए बोलता है, "बस...। एक ही चीज को बार-बार तब से रट रहे हो। तुम्हें लगता है कि तुम अलग-अलग लोगों के सामने अलग-अलग इंसान होते हो। पर तुम हर वक़्त तुम ही होते हो। तुम अब जो हो, किसी लड़की के सामने जैसे behave करते हो, कोई और होगी तो उसके सामने भी तुम वैसे ही behave करोगे।"
सतीश इसपर बोला, "पता नहीं यार!
मुझमें अगर हूँ मैं कहीं बाकी
तो ढूंढ लो मुझे।
मुझे अब खुद यह पता नहीं कि
मैं हूँ, या मैं कोई और हो गया हूँ।"
राजेश पूछा, "अच्छा बताओ, तुम्हें किस बात का डर है? कोई तो ऐसा चीज होगा, जिससे तुम डर रहे हो, और नहीं चाहते हो कि कोई तुम्हें seriously प्यार करे।"
सतीश बताने की कोशिश किया, "Personally मैं इस बात से डरता हूँ कि अगर कोई ऐसी लड़की मेरे पीछे पड़ी, जिसकी family को economically/politically/emotionally दूसरों को control करने की लत है, तो मेरा financial life, social life, educational life को control करके वो मेरा spiritual and personal life destroy कर देंगे।"
राजेश पूछा, "यार तुम चीजों को इतना complex क्यों बनाते हो, आसान भाषा में नहीं समझा सकते हो क्या?"
सतीश उठकर बैठते हुए समझाया, "मेरी individuality कहाँ होगी, जब मुझे कोई और control करने की कोशिश करेगा! मेरा mental peace कैसे रहेगा, जब आए दिन वो मुझे किसी ना किसी तरह influence करने की कोशिश करते रहेंगे!"
राजेश सीधा होते हुए बोला, "यार, जो अभी तक हुआ ही नहीं है उसको लेकर तुम अभी से क्यों tension लेते हो। और हमारी उम्र में लोग लड़की देखकर पसंद करते हैं और प्यार में पड़ते है, तुम हो कि खानदान देखने की कोशिश करते हो।"
सतीश अब नब्ज़ पकड़ा, "इसलिए ना कहता हूँ, मुझे वैसे love किसी से हो ही नहीं सकता है, जैसे तुम्हें होता है। मैं हर चीज को लेकर बहुत calculative हूँ।"
राजेश चिंता जताते हुए बोला, "देखो, तुम हर चीज को अपने control में नहीं ले सकते हो। तो इतना ज्यादा दिमाग मत लगाओ।"
सतीश सफाई दिया, "नहीं मैं बिल्कुल कोशिश नहीं कर रहा हूँ। जब से इस बात का realisation हुआ है कि यहाँ हर किरदार अपना चाल चल रहा है और मुझे result सिर्फ मेरे individual actions पर नहीं मिलेगा, मैं कोशिश करना छोड़ चुका हूँ।"
राजेश पूछा, "तो फिर ये exam वगैरह का form क्यों भरे हो?"
सतीश समझाया, "अरे ऐसे नहीं। मतलब मैं अपना मेहनत करूंगा। But मैं यह expect नहीं करूँगा कि result मेरे according ही हो। मैं unexpected result के लिए तैयार रहूँगा।"
राजेश point करता है, "देखा, तुम अपने worst result के लिए भी plan कर रहे हो। मतलब तुम अब भी situations को अपने control में ही करने की कोशिश कर रहे हो।"
राजेश झालमुड़ी के cone से आखिरी मुट्ठी भरते हुए बोला, "और तुम्हें क्या लगता है, कि तुम्हारे ऐसा करने से उन्हें uncomfort feel नहीं होता होगा? तुम खुद को इतना अच्छा actor समझते हो कि तुम अपने body language में अपने discomfort तक को छुपा सकते हो?"
सतीश बोला, "तो क्या करूँ? उन्हें मुँह पे बोल दूँ कि मुझे किसी का करीब आना अच्छा नहीं लगता है। क्या इससे वो hurt नहीं होंगी?"
राजेश मुस्कुराते हुए अपनी हथेली की आखरी मुट्ठी भर झालमुड़ी अपने मुँह पे भरते हुए पूछा, "अच्छा मुझे तो कम से कम अपने Abstract के करीब आने देते हो ना? या हमारे भी करीब आने से तुम discomfort feel करते हो? वरना बता दो, तुम्हारे psychological que के और करीब जाने की मैं कोशिश नहीं करूँगा।"
सतीश defeated अहसास के साथ उदास आँखों से उसे देखा। राजेश यह देखकर मुस्कुराया और अपने हाँथ में पकड़े झालमुड़ी के खाली cone को फेंका। वह समझ गया कि सतीश का मन उसे resist करने की कोशिश नहीं करता है, पर अभी उसे दूर होने का fear होने लगा है। राजेश सतीश के कंधे पर हाँथ रखा, फिर उसके साथ room की ओर साथ में कदम बढ़ाते हुए बोला-
"हम किसी को पसंद या नापसंद कैसे करते हैं? हमें लगता है कि हमारी पसंद या नापसंद हमारी अपनी खुद की है। पर तुम्हें पता है कि यह हमारी पसंद या नापसंद आखिर क्यों होती है, यह बनती कैसे है? यह सभी हमारे personal experience से बनती है। जब से हमें होश आता है, बचपन में; जब से हम चीजों को observe करना शुरू करते है, लोगों के behaviour को हम experience करते हैं, उसे observe करते हैं। एक वक़्त था, जब मैं हर किसी में शिवि से compare करता था। उसकी बातें/nature मुझे जिसमें भी दिखती थी, वो मुझे नापसंद लगने लगती थी। इसलिए शिवि के बाद मेरा relationship किसी से साथ जमा ही नहीं। पर अब जब मैं बीते experiences को observe करता हूँ, मैं उनके करीब भी इसलिए गया था क्योंकि कहीं ना कहीं शिवि की वो बातें उनमें मुझे दिखी थी, जो मुझे पसंद थी। तुम और मैं, हम सभी अपने आसपास जब लोगों के अच्छे-बुरे behaviour को experience करते हैं, उस observation से हमारा पसंद और नापसंद बनता है। हमें लगता है कि हमारी पसंद या नापसंद हमारी अपनी खुद की है। पर असल में यह हमारा environment, हमारा experience तय करता है कि हम क्या पसंद और नापसंद करेंगे। पर अब जब इस चीज का realisation होता है ना, मेरी पसंद या नापसंद का कोई मायने बचता ही नहीं है। मुझे अगर कुछ अलग experience मिला होता, तो शायद मेरी पसंद और नापसंद भी कुछ और होती। मसला यह है कि आखिर इस realisation का, इस knowledge का मैं क्या करूँ? मुझे लगता है कि हम किसके साथ comfort and complete feel करते हैं, बस यह बात मायने रखता है। मुझे शिवि के साथ अपना life जितना comfort feel हुआ, उतना फिर किसी के साथ भी नहीं हुआ। तुम डरते हो, किसी के साथ emotional attachment होने से। इसलिए एक psychological barrier बना कर रखे हुए हो, जिसके आगे किसी भी लड़की को आने नहीं देते हो। मैं कहूँगा कि इस barrier को खोलो और जो आना चाहे उसे अपने करीब आने दो। क्योंकि जो तुम्हारे अधूरेपन को complete करे, तुम जिसके साथ comfort feel करो और पूरी जिंदगी जिसके साथ बिताने का दिल करे, यह मिलना आसान नहीं है। वरना society में इतना सारा marital disputes नहीं होता। और जब तक किसी को आजमाओगे नहीं, तुम्हे पता कैसे चलेगा? क्या तुम भी अपनी जिंदगी को किस्मत के भरोसे छोड़ना चाहते हो?"
सतीश और राजेश, दोनों सतीश के lodge के gate के पास पहुंचे। सतीश gate खोलकर आगे बढ़ा और राजेश उसके पीछे कमरे तक आया। सतीश कब अपना झालमुड़ी का cone रास्ते में फेंका, पता भी नहीं चला। राजेश सतीश के साथ कमरे में गया, bed पर लेट कर कोहनी के सहारे टेढ़े होकर बैठ कर बोला, "मुझे लगता है कि life में एक बार कम से कम हर किसी को सच्चा वाला प्यार जरूर होना चाहिए। वरना वो अपने पसंद-नापसंद को कैसे समझेंगे! उन्हें जबतक यह realisation नहीं होगा, उनके पसंद-नापसंद को हमेशा उनका environment influence करता रहेगा। उन्हें लगेगा कि उनकी पसंद-नापसंद उनकी अपनी खुद की है। पर जिसको मेरे जैसा समझ आ गया होगा ना, वो उन गधो के emotions के साथ बहुत अच्छे से खेल सकता है।"
सतीश राजेश के इस बात को सुनकर बोला, "शुक्र है मैं इस पागलपन में पड़ने से बच गया।"
सतीश bed में पैर झुलाकर लेट गया, अपने दोनों हाँथो की हथेली को उंगलियों से बांधकर तकिये की तरह अपने माथे के पीछे ले लिया, और दो पल सोंचकर बोला, "तुम्हें पता है शादियों में लोग cast-community-wealth को इतना क्यों importance देते हैं?"
राजेश curiosity दिखाते हुए बोला, "क्या तुम ये सब मानते हो?"
सतीश बोला, "मेरे मानने या ना मानने से क्या फर्क पड़ता है! जो समाज का हिस्सा है, और सच है, उसे हम झुठला तो नहीं ना सकते हैं।"
राजेश पूछा, "क्या मतलब?"
सतीश बोला, "सारा खेल power dynamics का है। सारा खेल उनके desire and dreams का है। कि किसे किस चीज को control करना है- Economy, Politics or Society. कि किसे किस चीज को कमाना है- Opportunity, Connections, Believers. कि किसे क्या बचाना है- Wealth, Loyalty, Trust."
राजेश कुछ नहीं बोलता है और bed पर लेटे-लेटे सुनता रहता है। सतीश आगे बोलता है- "पता है, मुझे ऐसा लगता है कि तुम अगर अपनी किसी girlfriend से शादी करना चाहोगे ना, तो बहुत ज्यादा possibility है कि तुम्हारी family तुम्हारे love को accept कर ले।"
राजेश curious होकर पूछा, "और तुम्हें ऐसा क्यूँ लगता है?"
सतीश explain किया, "तुम बड़े businessman family से belong करते हो।"
राजेश बीच में बात काटते हुए पूछता है, "तो उससे क्या होता है?"
सतीश आगे explain करता है, "तुम अगर किसी बड़े businessman की बेटी से affair करोगे तो तुम्हारी family को collaboration का फायदा होगा। तुम अगर किसी average businessman की बेटी से affair करोगे तो तुम्हारी family को expansion का फायदा होगा। तुम अगर एक educated and responsible लड़की से affair करोगे तो तुम्हारी family को accounting and management का फायदा होगा। तुम अगर किसी politician, advocate, bureaucrat, administrator की लड़की से affair करोगे तो तुम्हारी family को legal help and opportunities मिलेंगी।"
राजेश पूछा, "और अगर मेरा affair किसी गरीब घर की लड़की से हुआ तो..?"
सतीश बताया, "गरीब घर की लड़की affair करेगी ही नहीं। उन्हें family के respect का बहुत ज्यादा चिंता होती है। कोई लड़की अगर फिर भी affair कर रही है, तो probably तुम्हारी family उसे reject करेगी, क्योंकि वो उसका irresponsible behaviour होगा।"
राजेश बोला, "अच्छा...। पर मेरे पास जो options है, यह options क्या तुम्हारे पास भी नहीं है? तुम्हारी family को भी तो इन families के साथ जुड़ने से लाभ होगा।"
सतीश बोला, "नहीं। नहीं है।"
राजेश को देखा, वह शांत था, इसलिए सतीश आगे बोला, "यह सब power dynamics का खेल है। जब दो families एक दूसरे के साथ जुड़ती है तो उसके साथ उन्हें अपनी privileges भी share करनी पड़ती है। तुम एक लड़के हो। तुम जब किसी लड़की को अपने घर लाओगे, तो उस relation से जो family को तुम्हारे family से return में privileges देना होगा, उसमें तुम्हारी family अपने नीचे उसे किसी भी business sector में appoint करके उससे काम ले सकती है। जो कि आमतौर पर तुम्हारा कोई साला ही होगा, जो कि अपने जीजा और दीदी के आगे पीछे दुम हिलाते हैं। इससे center of power हमेशा ही तुम्हारे family के पास रहेगा। पर अगर तुम्हारी बहन किसी ऐसे लड़के से शादी करना चाहेगी जो तुम्हारे family members के standard से नीचे हो, तो उसे यानी कि अपने जीजा को तुम अपने नीचे नचा नहीं पाओगे। आमतौर पर respect की बात होती है, जिसके लिए आगे तुम्हारी बहन ही revolt कर देगी। इसके वजह से तुम्हें अपने जीजा के साथ power sharing करना होगा। जो कि कोई भी family, जिसे power में रहने का नशा हो, वो कभी अपने power को lower standard से आने वाले समाज के किसी family के साथ share करना नहीं चाहेगी। मतलब वो families कभी भी अपना privilege किसी के साथ share नहीं करना चाहेगी। इसलिए वो सारे options जो तुम्हारे पास है, जो मेरे family standard से ऊपर के हैं, वो मेरे लिए नहीं है। Love is a luxury thing. और हम जिस age में है, उस age में यह commodity हमें खुद के दम पर नहीं मिल सकता है। यह हमें तभी मिल सकता है, जब हमारे parents हमें यह दिला सके, और जब वो इसे दिलाना चाहे।"
राजेश आगे पूछता है, "अच्छा चलो मान लिए कि यह privilege मुझे है। पर क्या सिर्फ मुझे है, बाकी families के पास नहीं है? छोटे या average businessman families, civil authorities, politicians, upper class families, क्या उनके बच्चों के पास love करने या partner चुनने का freedom नहीं है?"
सतीश राजेश की तरफ मुड़कर अपनी कोहनी के सहारे टेढ़े होकर बैठकर अपना observation explain करता है, "देखो, अगर बात करे average and small businessman families की तो उन्हें economically survive करने के लिए other businessman families के साथ collaboration and support की जरूरत होती है। And दो families के बीच trust and cooperation का सबसे reliable कड़ी marriage relations होता है। इसलिए वो अपने बच्चों को तो economically अपने से inferior section, labour class families के बच्चों से relation जोड़ने की permission देंगे नहीं। क्योंकि उन्हें फिर सामने वाले party को अपने market में जगह देना होगा। अगर वो ऐसा नहीं करेंगे तो relation खराब होगा, और अगर करेंगे तो market में जिनके साथ वो पहले से business करते आए है, वह market खराब होगा। इसलिए average and small businessman families के बच्चों के पास खुद से partner चुनने का freedom rarely ही होगा, या एक certain community के अंदर होगा।"
राजेश आगे पूछता है, "और बाकी सब में?"
सतीश अपना analysis आगे explain करता है, "अगर हम बात करे politicians की तो उन्हें अपना vote bank मजबूत चाहिए। अगर वो inter-caste को allow करेंगे तो शायद उनका खुद के community से vote कटेगा, या फिर अगले community से vote बढ़ भी सकता है। इसलिए उनके लिए social acceptance बहुत मायने रखेगा। But social stress उनके decisions को influence करने की ताकत ना पा ले, इसलिए वो time के according present social need and अपनी family को भी priority दे सकते हैं। Politicians इन सभी को balance बनाकर चलने में expert होते हैं। इसलिए यह पहले से कह नहीं सकते हैं कि वो in future क्या choose करेंगे। तो आजमाने का बस एक ही तरीका होता है कि वक़्त के flow में बहा जाए।"
राजेश पूछा, "और बाकी bureaucrats, advocates, and other civil servants,... उनके बच्चों के पास क्या options होता है? क्या वो love कर सकते हैं?"
सतीश बताता है, "यह सब अपने काम से काम रखते हैं। ज्यादा social होते नहीं है। इसलिए इनके बारे में कोई generalised observation देना सही नहीं होगा। यह उनके family background पर depend करेगा कि उनकी family ethics क्या है। वो किस चीज को priority देते हैं- cast, community, wealth, opportunity, या अपने बच्चों की खुशी। Individually हर family का अपने बच्चों के प्रति different approach हो सकता है। इसलिए उनके बारे में कुछ कहना सही नहीं होगा।"
इतनी देर से कोहनी के सहारे लेटने से राजेश का कोहनी दर्द करने लगा उसके वह उठकर बैठ गया, और अपने दोनों हथेली के सहारे अपनी सीधे हाँथ में पीठ को टिकाते हुए पूछा, "अच्छा तुम्हें ऐसा क्यों लगता है कि मैं या मेरी family casteist नहीं होंगे? वो मुझे किसी को भी partner बनाने के लिए allow कर देंगे?"
सतीश उसे अपना observation बताता है, "Cast and Community सिर्फ उनके लिए priority होती है जो power dynamics में मोहरे हैं। जो इस hierarchy में players है, उनके लिए यह बस choice होता है, necessity नहीं।"
राजेश पूछता है, "क्या मतलब?"
सतीश explain करता है, "जो economically, politically, socially top में बैठे होते हैं; वो अपना stability and growth देखते हैं। But जो नीचे होते हैं, फिर चाहे वो किसी भी caste से belong करते हो, वो अपने नस्ल को कितना ही श्रेष्ठ समझते हो, क्योंकि absolute power उनके हाँथ में नहीं है, उन्हें उनके community and caste ethics के साथ चलना पड़ता है।"
राजेश ध्यान से सुन रहा था और सतीश आगे समझाता है, "जो economically bottom section में आते हैं, वो अपने life की छोटी-छोटी चीजों के लिए समाज के दूसरे लोगों पर depended होते हैं। समाज से उन्हें help and support मिलता रहे, इसके लिए वो social values को बहुत ज्यादा priority देते हैं। पर जो middle section में आते हैं, वो social values को उतना importance नहीं देते हैं, but क्योंकि उन्हें भी support and cooperation मिलता रहे, इसलिए वो भी social obligations को मानते हैं। पर उन्हें जब मौका मिलता है तो वो इसे तोड़ते भी है। Almost visionless love, जिसका उन्हें पता है कि आगे कोई future नहीं है, फिर भी affairs जानबुझकर यही लोग करते हैं। जो बच्चे upper section में आते हैं उनका relationship future partnershiping के लिए होता है, और lower section का love immaturity होता है। But middle section का affair बस pleasure, joy and entertainment के लिए होता है।"
राजेश पूछता है, "तुम यह बातें तो economics के basis पर बता रहे हो। Social Class, Caste के basis पर तो तुम बात ही नहीं किए।"
सतीश उल्टा उससे पूछा, "Caste और class किसपर based है? लोगों के profession और power dynamics पर ही तो। वो तो लंबे समय बीतने के कारण अब इसमें कई layers बन गए है। पर root में तो लोगों का profession और center of power ही था।"
राजेश सतीश से पूछा, "अच्छा मेरे बारे में तो बता दिए। पर तुम खुद किस category में आते हो? तुम क्यों अपने लिए खुद partner नहीं चुन सकते हो? क्या तुम भी lower या middle section में आते हो?"
सतीश अपने बारे में बताया, "मेरा situation इनसे थोड़ा सा better है।"
राजेश पूछा, "क्या मतलब?"
सतीश आगे बताया, "गाँव के समाज में लोग छोटी-छोटी बातों पर आपस में कलह कर लेते हैं। तो शुरुआत यूँ हुआ कि दो लोग आपस में लड़े। हमारी family उनके बीच पड़ना नहीं चाहती थी। जिसे वो ऐसे लिए कि हमारी family उन्हें support नहीं का रही है। शुरू में वो ignore करने लगे, पर जब वो देखे कि इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता है, तो वो फिर हमें realise करवाने के लिए षडयंत्र भी करने लगे। हम उन दोनों में से किसी से दुश्मनी नहीं चाहते थे, इसलिए किसी एक पक्ष को नहीं चुने, इसलिए दोनों से दुश्मनी हो गई। और यह चीज इतना बढ़ चुका है कि अब हमारी family को उनसे उम्मीद ही नहीं है, इसलिए वो अब हमारी family पर influence and दबाव उस तरह नहीं डाल सकते हैं जैसे वो बाकी families पर डालते हैं। पर..."
राजेश सतीश को ऐसे बीच में रुकते देख पूछा, "पर क्या?"
सतीश बोला, "मुझे नहीं पता कि मैं अगर किसी को अपनी family से introduce करवाऊंगा तो उसे मेरी family accept करेगी भी या नहीं।"
राजेश सतीश को समझाया, "जब तक तुम यह आजमाओगे नहीं, तब तक तुम्हें यह पता कैसे चलेगा?"
सतीश उससे सवाल किया, "तुम कहते हो कि life में जबतक किसी को at least इश्क़ नहीं होगा, वह अपना पसंद-नापसंद नहीं समझ सकता है। वो बस अपने environmental experience से influenced होता है। मेरी बातों को सुनने के बाद भी तुम्हें लगता है कि environment सच में मुझे उस तरह influence करता होगा?"
राजेश सतीश को मनाने की कोशिश करता है, "देखो, मेरा किसी को पसंद करना या ना करना, यह another matter है। मैं at least उन्हें एक बार मौका देकर समझने की कोशिश तो करता हूँ। पर तुम हो कि वो जो boundary बनाए हुए हो अपने चारों ओर, उसके अंदर किसी को आने ही नहीं देते हो। अगर मैं करीब आ सकता हूँ, रवि करीब आ सकता है, तो किसी लड़की को इतना करीब आने देने में तुम्हें डर क्यों लगता है? क्या तुम्हें कहीं ऐसा तो नहीं लगता है कि अगर कोई लड़की तुम्हारे दिल के इतने करीब आएगी तो तुम खुद को कहीं control नहीं कर पाओगे, इसलिए डरते हो?"
सतीश confusion के साथ बोला, "पता नहीं। शायद मैं इस बात से डरता हूँ कि अगर कोई मेरे करीब आएगी तो कहीं वो मुझसे obsessed ना हो जाए।"
राजेश पूछा, "तो इसमें बुरा क्या है? सच्चा प्यार किसे नहीं चाहिए?"
सतीश अपना problem समझाता है, "जब कोई मेरे सामने होती है तो मैं उसके सामने nicely behave करने की कोशिश करता हूँ। But मैं real में वैसा नहीं हूँ। मैं बस वैसा Act करने की कोशिश करता हूँ।"
राजेश सतीश को रोकते हुए बोलता है, "बस...। एक ही चीज को बार-बार तब से रट रहे हो। तुम्हें लगता है कि तुम अलग-अलग लोगों के सामने अलग-अलग इंसान होते हो। पर तुम हर वक़्त तुम ही होते हो। तुम अब जो हो, किसी लड़की के सामने जैसे behave करते हो, कोई और होगी तो उसके सामने भी तुम वैसे ही behave करोगे।"
सतीश इसपर बोला, "पता नहीं यार!
मुझमें अगर हूँ मैं कहीं बाकी
तो ढूंढ लो मुझे।
मुझे अब खुद यह पता नहीं कि
मैं हूँ, या मैं कोई और हो गया हूँ।"
राजेश पूछा, "अच्छा बताओ, तुम्हें किस बात का डर है? कोई तो ऐसा चीज होगा, जिससे तुम डर रहे हो, और नहीं चाहते हो कि कोई तुम्हें seriously प्यार करे।"
सतीश बताने की कोशिश किया, "Personally मैं इस बात से डरता हूँ कि अगर कोई ऐसी लड़की मेरे पीछे पड़ी, जिसकी family को economically/politically/emotionally दूसरों को control करने की लत है, तो मेरा financial life, social life, educational life को control करके वो मेरा spiritual and personal life destroy कर देंगे।"
राजेश पूछा, "यार तुम चीजों को इतना complex क्यों बनाते हो, आसान भाषा में नहीं समझा सकते हो क्या?"
सतीश उठकर बैठते हुए समझाया, "मेरी individuality कहाँ होगी, जब मुझे कोई और control करने की कोशिश करेगा! मेरा mental peace कैसे रहेगा, जब आए दिन वो मुझे किसी ना किसी तरह influence करने की कोशिश करते रहेंगे!"
राजेश सीधा होते हुए बोला, "यार, जो अभी तक हुआ ही नहीं है उसको लेकर तुम अभी से क्यों tension लेते हो। और हमारी उम्र में लोग लड़की देखकर पसंद करते हैं और प्यार में पड़ते है, तुम हो कि खानदान देखने की कोशिश करते हो।"
सतीश अब नब्ज़ पकड़ा, "इसलिए ना कहता हूँ, मुझे वैसे love किसी से हो ही नहीं सकता है, जैसे तुम्हें होता है। मैं हर चीज को लेकर बहुत calculative हूँ।"
राजेश चिंता जताते हुए बोला, "देखो, तुम हर चीज को अपने control में नहीं ले सकते हो। तो इतना ज्यादा दिमाग मत लगाओ।"
सतीश सफाई दिया, "नहीं मैं बिल्कुल कोशिश नहीं कर रहा हूँ। जब से इस बात का realisation हुआ है कि यहाँ हर किरदार अपना चाल चल रहा है और मुझे result सिर्फ मेरे individual actions पर नहीं मिलेगा, मैं कोशिश करना छोड़ चुका हूँ।"
राजेश पूछा, "तो फिर ये exam वगैरह का form क्यों भरे हो?"
सतीश समझाया, "अरे ऐसे नहीं। मतलब मैं अपना मेहनत करूंगा। But मैं यह expect नहीं करूँगा कि result मेरे according ही हो। मैं unexpected result के लिए तैयार रहूँगा।"
राजेश point करता है, "देखा, तुम अपने worst result के लिए भी plan कर रहे हो। मतलब तुम अब भी situations को अपने control में ही करने की कोशिश कर रहे हो।"
सतीश राजेश को अपना परेशानी बताया, "देखो, मान लो कि मैं किसी को अगर propose करता हूँ, तो उसे मैं क्या उम्मीद दूँगा? यह तो उम्मीद दूँगा ही ना कि मैं उसे बहुत प्यार करूँगा, हमेशा खुश रखूँगा, उसका ख्याल रखूँगा।"
राजेश बोला, "यह तो obvious सी बात है। यह तो तुमको करना ही होगा।"
सतीश परेशान होते हुए बोला, "पर यह मैं किसी को नहीं दे सकता हूँ ना...।"
राजेश गंभीर होते हुए पूछा, "अगर तुम चाहोगे तो क्यों नहीं दोगे?"
सतीश बताया, "मेरे चाहने या ना चाहने से कुछ नहीं होता है।"
राजेश हैरानी जताया, "क्यों नहीं हो सकता है?"
सतीश राजेश को आगे explain किया, "अगर कोई मुझे चुनेगी, तो उसका life कैसा होगा? मैं एक village का लड़का हूँ, जो उम्मीदें लेकर शहर आया है। मैं अगर शहर में कोई भी काम करूँगा तो लौट कर अपने गाँव ही जाऊँगा- seasons में खेती में support करने के लिए, different occasions में और मेरी need पड़ने पर। वो कहाँँ रहेगी, मेरे साथ शहर में, या गाँव में मेरी family के साथ। अगर वह मेरे साथ शहर में रहेगी तो वो सारी previlege जो family members के होने से मिलता है, वो नहीं मिलेगा। मैं और वो, हमें अकेले आपस में एक दूसरे का ख्याल रखना होगा। जैसे गोदान में गोबर और झुनिया रहते हैं। पर अगर वो गाँव में मेरी family के साथ रहेगी तो उसे वह environment में suffer करना होगा, जो मैं बचपन से करता आया हूँ। और क्योंकि वहाँ मैं अगर साथ नहीं रहूँगा तो उसे वो environment अकेले handle करना होगा जिसमें वो रहेगी। पर वहीं अगर मैं भी उसके साथ गाँव में रहूँ तो फिर उसको मैं वो सुविधाएँ नहीं दे पाऊँगा जो वो मुझसे expect करेगी। क्योंकि मैं गाँव में रहकर वैसा कमा नहीं पाऊँगा। तो overall देखें तो उसकी खुशियों के लिए मैं नहीं वह खुद responsible होगा। वो जैसा बाकियों के साथ रहेगी, जैसे जिएगी, वो उसे खुशी देगा। मेरा उसके प्रति dedication से कोई फर्क नहीं पड़ता है।"
राजेश बोला, "देखा, तुम अपने future के बारे में जो इतना सोंच रहे हो, तुम अभी भी सब कुछ अपने control में करने की कोशिश कर रहे हो।"
सतीश आगे अपना परेशानी बताया, "तो तुम ही बताओ, मैं किसी को एक beautiful life का ख्वाब दिखाकर उसे partner बनाऊँगा, और उसे वो सब नहीं मिलेगा तो क्या वो hurt नहीं होगी? ऐसा रिश्ता कितना दिन चलेगा या आगे इस रिश्ते का कैसा future होगा?"
राजेश से सोंचते हुए बोला, "देखो यार, तुम फिक्र तो सभी की करते हो। No doubt जो तुम्हारे life में होगी उसे तुम अपनी ओर से हमेशा खुश रखने की कोशिश करोगे। क्योंकि जो अभी तक तुम्हारे life में नहीं है, तुम उसके लिए भी इतना सोंचते हो। पर यार, तुम उसके लिए सही और गलत का decision लेकर उसके behalf में कोई decision कैसे ले सकते हो? तुम खुद से खुद को reject कर रहे हो, एक बारे उसकी भी तो individuality जाननी चाहिए ना कि वो क्या चाहती है। कोई life किसी के लिए गलत है या वो तुम्हें चुनेगी, यह तो उसका decision होना चाहिए ना। तुम उसके लिए फैसले लेकर उसकी Individuality को ignore नहीं कर रहे हो?"
इंसान हमेशा सही ही होने की कोशिश करता है। पर वह कब गलत हो जाता है, यह उसे पता भी नहीं चलता है।
सतीश राजेश को समझाने की कोशिश किया, "इसलिए तो मैं सिर्फ दोस्ती करता हूँ। ताकि वो मुझे, मेरे life को समझे और वो खुद से मुझे चुने।"
राजेश सतीश को डांटते हुए बोला, "पर तुम किसी को तुम्हें जानने और तुम्हें चुनने का मौका कहाँ दे रहे हो! तुम एक boundary बनाकर रखे हो अपने चारों ओर, जिसके अंदर किसी लड़की को करीब आने ही नहीं दे रहे हो।"
सतीश बोला, "तो क्या तुम्हारी तरह बनकर हर एक लड़की को छिछोरा की तरह line मारता फिरूँ? मुझे मुझमें कोई interested दिखेगी तभी ना उसको उस limit से करीब लाऊँगा।"
राजेश सतीश को बोला, "क्या पता, तुम्हारे इस रवैये के चलते कोई तुम्हारे करीब आने से कतराती हो।"
सतीश राजेश को point किया, "तुम किसी को अपने करीब आने देने की नहीं बल्कि उसके लिए approach करने की बात कर रहा है।"
राजेश सतीश को बोला, "हाँ तो तुम लड़का है तो इतना तो करेगा ही ना।"
सतीश कहा, "अगर मैं आगे कदम बढ़ाऊंगा तो मैं बन्धुँगा उन उम्मीदों से जो वो मुझसे जोड़ेगी। अगर कोई और मेरी ओर कदम बढ़ाएगी, इसका मतलब होगा कि वह मुझे और मेरी जिंदगी को वैसे accept करने की कोशिश कर रही है, जैसा मैं हूँ।"
लड़कों को एक चीज बिल्कुल भी पसंद नहीं आता है, कि कोई उसे control करने की कोशिश करे। वो हमेशा आजाद रहना चाहते हैं, बंधना नहीं चाहते हैं। और लड़कियां चाहती है कि उसका partner उसके control में रहे। वो अगर शुरू में approach कर देगी, first step वो ले लेगी, तो शायद फिर वो control उसे कभी ना मिले। उनका emotional weapon भी एक mind game है। पर लड़के आमतौर पर लगे रहते उनके सामने दुम हिलकर, उनके इक्षाओं के ball लाकर उन्हें खुश करने में।
राजेश सतीश को कहा, "लड़कियां कभी भी पहले approach नहीं करेंगी। जब भी करना होगा तुम्हें ही करना होगा।"
सतीश मायूस होते हुए बोला, "तो क्या इतना सब कुछ सिर्फ इसलिए कर रहा हूँ last में किसी का puppet बन जाऊँ?"
राजेश सतीश को समझाया, "अरे शुरू में ऐसा लगता है जब तक दोनों एक दूसरे को अच्छे से नहीं समझते हैं। पर बाद में बंधन दोनों के लिए बराबर होता है।" फिर सतीश का हाँथ पकड़कर, "मैं अगर तुम्हें पकडूंगा ताकि तुम कहीं जा ना सको, तो क्या मैं खुद कहीं जा सकता हूँ, जब तक कि मैं तुम्हें छोड़ ना दूँ?"
सतीश राजेश से पूछा, "अगर वो मुझे जानने के बाद मुझे पसंद ना करने लगे, मुझे छोड़ दे, तो क्या वो दोस्ती भी मैं खो नहीं दूँगा जो हमारे distance maintain करने की वजह से है?"
राजेश सतीश को समझाया, "तुम बहुत सोचते हो। वो वैसे भी एक दिन तुम खो दोगे। जब कोई और लड़का उसके life में आ जाएगा। तुम जबतक किसी को अपने करीब आने का मौका नहीं दोगे, आजमाओगे नहीं, तो पता कैसे चलेगा?"
सतीश पूछा, "तो तुम ही बताओ, कि मैं क्या करूँ।"
राजेश समझाया, "हमें वक़्त के ख़िलाफ़ नहीं जाना है। वक़्त के साथ इसके flow में बहना है।"
सतीश कहा, "मतलब बिना किसी expectations के बस अपने life का best performance देने की कोशिश करना है?"
राजेश अपना माथा पीट लिया, "मेहनत करते रहो, किसी दिन सच में अच्छा actor बन जाओगे।"
सतीश खड़ा हुआ, साथ में राजेश भी खड़ा हुआ। सतीश राजेश के कंधे पर हाँथ रखकर उसे दरवाजे तक छोड़ते हुए बोला, "तुम भी मेहनत करते रहो, शायद किसी दिन तुम मुझे सच में बहका सको।"
राजेश दरवाजे के पास जाकर रुक गया और पीछे मुड़ा, "कैसा गंदा आदमी है! दोस्त room आया है और पानी भी नहीं पूछा।"
फिर राजेश खुद से सतीश के कमरे में मौजूद पानी की बोतला उठाकर पानी पीते हुए बोला, "तुम्हें एक बार test करना चाहिए। शायद तुम्हारे distance maintain करने की वजह से कोमल तुम्हारे करीब नहीं आ रही है। वरना..."
सतीश बीच में रोकते हुए बोला, "मार खाएगा, अगर तुम हमारे बीच की अच्छी खासी friendship खराब करने की कोशिश करेगा तो।"
राजेश बोला, "अरे मै तो तुम्हारे भले का ही सोच...।"
सतीश बीच में रोककर बोला, "तू मत सोंच।"
राजेश बोला, "मुझसे तुम्हारा अकेलापन देखा नहीं जाता है।"
सतीश बोला, "तो क्या मैं अपने अच्छे रिश्ते खराब कर लूँ।"
राजेश point किया, "देखा, रिश्ता तो है, बस उसे सही नाम दे दो।"
सतीश चप्पल खोलकर हाँथ में लिया, और यह देख राजेश हाँथों से बचाव करते हुए उल्टे पैर दरवाजे की ओर हो लिया। और राजेश बोला, "ठीक है, नहीं उकसाऊँगा। पर बाद में बोलता मत अगर मैं तुमसे उसे छीन लूँ।"
सतीश चप्पल राजेश की ओर फेंका और राजेश भागा।
फिर सतीश अपना चप्पल उठाकर कमरे में घुसा, दरवाजे को अंदर से lock किया। Mobile निकाला, notification आया हुआ था, "Room पहुँच गए?"
सतीश call button press किया, display आया, "Calling Mehak..."
सिर्फ़ वक़्त यानी, मुझे पता है complete story. बाकियों को बस कुछ हिस्से, कुछ किस्से ही पता है।
-AnAlone Krishna.
Written on 8-10th September, 2026 A.D.
Published on 10th September, 2026 A.D.
सतीश पूछा, "तो तुम ही बताओ, कि मैं क्या करूँ।"
राजेश समझाया, "हमें वक़्त के ख़िलाफ़ नहीं जाना है। वक़्त के साथ इसके flow में बहना है।"
सतीश कहा, "मतलब बिना किसी expectations के बस अपने life का best performance देने की कोशिश करना है?"
राजेश अपना माथा पीट लिया, "मेहनत करते रहो, किसी दिन सच में अच्छा actor बन जाओगे।"
सतीश खड़ा हुआ, साथ में राजेश भी खड़ा हुआ। सतीश राजेश के कंधे पर हाँथ रखकर उसे दरवाजे तक छोड़ते हुए बोला, "तुम भी मेहनत करते रहो, शायद किसी दिन तुम मुझे सच में बहका सको।"
राजेश दरवाजे के पास जाकर रुक गया और पीछे मुड़ा, "कैसा गंदा आदमी है! दोस्त room आया है और पानी भी नहीं पूछा।"
फिर राजेश खुद से सतीश के कमरे में मौजूद पानी की बोतला उठाकर पानी पीते हुए बोला, "तुम्हें एक बार test करना चाहिए। शायद तुम्हारे distance maintain करने की वजह से कोमल तुम्हारे करीब नहीं आ रही है। वरना..."
सतीश बीच में रोकते हुए बोला, "मार खाएगा, अगर तुम हमारे बीच की अच्छी खासी friendship खराब करने की कोशिश करेगा तो।"
राजेश बोला, "अरे मै तो तुम्हारे भले का ही सोच...।"
सतीश बीच में रोककर बोला, "तू मत सोंच।"
राजेश बोला, "मुझसे तुम्हारा अकेलापन देखा नहीं जाता है।"
सतीश बोला, "तो क्या मैं अपने अच्छे रिश्ते खराब कर लूँ।"
राजेश point किया, "देखा, रिश्ता तो है, बस उसे सही नाम दे दो।"
सतीश चप्पल खोलकर हाँथ में लिया, और यह देख राजेश हाँथों से बचाव करते हुए उल्टे पैर दरवाजे की ओर हो लिया। और राजेश बोला, "ठीक है, नहीं उकसाऊँगा। पर बाद में बोलता मत अगर मैं तुमसे उसे छीन लूँ।"
सतीश चप्पल राजेश की ओर फेंका और राजेश भागा।
फिर सतीश अपना चप्पल उठाकर कमरे में घुसा, दरवाजे को अंदर से lock किया। Mobile निकाला, notification आया हुआ था, "Room पहुँच गए?"
सतीश call button press किया, display आया, "Calling Mehak..."
सिर्फ़ वक़्त यानी, मुझे पता है complete story. बाकियों को बस कुछ हिस्से, कुछ किस्से ही पता है।
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-AnAlone Krishna.
Written on 8-10th September, 2026 A.D.
Published on 10th September, 2026 A.D.
Timeline:-
हमदर्द सा कोई: भाग-१०.३

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