विश्व के कई ऐसे देश जो भारत के कई राज्यों की तुलना में कम जनसंख्या वाले हैं, वो भारत से ज्यादा developed हैं। क्योंकि किसी भी देश के पास कितना resources है उससे ज्यादा इस बात से फर्क पड़ता है कि उसके पास human resource कितना skilled है और administration कितना अच्छे से हो पा रहा है। भारत जैसे जनसंख्या वाले देश के administration को एक जगह से अच्छे से regulate कर पाना, लगभग नामुमकिन है। इसी चीज को ध्यान में रखकर इस देश को decentralised states में बांटा गया था। पर बीते दशक में जो centralised चेहरे की आड़ देश की regional powers को खत्म किया गया है, इससे शासनतंत्र को control करना और ज्यादा मुश्किल होने वाला है। जनता और centralised power के बीच बहुत बड़ा communication gape आएगा। इससे multiple layers में भ्रष्टाचार बढ़ेगा।
आने वाले समय में जो आम नागरिक होगा, उसका जीवन ठीक वैसा ही होने की संभावना है जो इतिहास की कहानियों में पढ़ाया जाता था-
• जिंदा रहने के लिए लोग खुद को बेचेंगे,
• सामाजिक हिंसा, चोरी, इत्यादि बढ़ सकता है,
• स्थानीय बाहुबली/गुंडे बनेंगे,
• कमज़ोरों को न्याय नहीं मिलेगा,
• सत्ता के लिए हिंसा बढ़ेगा,
• ऊंच-नीच, जात-पात, अत्याचार और शोषण बढ़ेगा,
• सामान्य जीवन और व्यापार करने के लिए संघर्ष बढ़ेगा।
अगर व्यवस्थाएं ऐसी ही रही, देश की सत्ता अगर decentralised नहीं हुई तो देश जिस दिशा में जा रहा है, हमारा देश दुनियां में ऐसे पिछड़ जाएगा कि फिर कभी आगे नहीं हो पाएगा।
-AnAlone Krishna
5th May, 2026 A.D.
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