एक ख़्वाब सा है यह जिंदगी- पहले जन्म लो, फिर बचपना पार करके जवानी में शादी करो, फिर बच्चे पैदा करके उनकी परवरिश करते हुए बूढ़े होकर मर जाओ।
एक खूबसूरत ख़्वाब सा नहीं है यह जिंदगी, जिस सपने को हम यहाँ जीने आते हैं ?
मुझे तो लगता है कि हमारे जन्म लेने का, अस्तित्व में आने का कोई वजह था। जिसे हम इस ख्वाबों से भरी दुनियाँ के मायाजाल में उलझ कर कहीं भूल से गए हैं...।
क्या तुम्हें भी ऐसा लगता है ? जवाब सिर्फ 'हाँ' या 'ना' में देना।

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