मैं कुछ बोल दूँगा, और बुरा लग जाएगा।
ऐसी चीजों में मुझे invite मत किया करो जहाँ इंसानों को objectification करके बेचा जाता है- जैसे चौराहे पे खड़ा करके भव्यता के साथ गुलाम बेचे जाते थे, जैसे वेश्याओं की कभी बोली लगती थी, या कोठे पे जमींदार अपनी संपत्ति लुटाते थे। ठीक वैसा ही feel होता है, जब कोई तिलक/दहेज की बात करता है।
मुझे ऐसा लगता है कि माँ-बाप अपनी बेटी की जरूरतों को पूरा करने के लिए गुलाम खरीद रहे हैं, या फिर बेटे के भोगने के लिए जिस्म...
मुझे ऐसा लगता है कि माँ-बाप अपनी बेटी की जरूरतों को पूरा करने के लिए गुलाम खरीद रहे हैं, या फिर बेटे के भोगने के लिए जिस्म...
बिना तिलक/दहेज के रिश्ता जुड़ रहा हो, किसी के ऊपर धन/जेवर ना फेंके जा रहा हो, तब मुझे invite करना। वरना इंसानों को बिकते देख, मुझे अच्छा नहीं लगता है।
- AnAlone Krishna
10th April, 2026
10th April, 2026

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