I, Krishna, present you here, my 100+ literary works—poems and stories. I hope, I shall plunder your heart by these. Let you dive into my imaginary world. I request you humbly to give your precious reviews/comments on what you read and please share it with your loved ones to support my works.

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Day 90: My Expectations from my Life-Partner | Dairy of AnAlone Krishna

__________Day 90__________

 

पता नहीं मुझे यह लिखना चाहिए भी या नहीं..! मेरे मन का एक हिस्सा मुझे अब पहले की तरह शब्दों में बहने से रोकता है। मैं कुछ भी लिखने बैठता हूँ तो मेरे व्यक्तित्व का वो हिस्सा जो एक teacher है, मुझे यह ध्यान दिलाता है कि मैं कहीं ऐसा कुछ ना लिखूँ, जो मेरे students को कोई गलत दिशा दे। अगर वो मेरे works को शायद कभी पढे तो..।

पर आखिर मैं भी तो एक इंसान ही हूँ। वो कुछ common चीजें जो हर कोई face करता है, मैं भी तो उन अनुभवों से ही गुजरा हूँ। बस अंतर सिर्फ इतना था कि मेरे हमउम्र जब life के किसी मोड़ पर कोई विकल्प चुन रहे थे तो मैं कुछ और चुन रहा था।

 

मैं अभी 27 का हूँ, और September में 28 का हो जाऊँगा। पर मैं अभी तक किसी के साथ relationship में नहीं आया। इसका वजह यह नहीं है कि क्यूंकि यह हमारा culture नहीं हैं, बल्कि यह इसलिए कि मैं दुनियाँ को थोड़ा अलग नजर से देखता हूँ। मुझे कहानियाँ बहुत पसंद हैं। मैं कहनियों में डूब जाता हूँ। और इस वजह से मेरे पास बहुत सारे किरदारों के लिए फैसलों का experience है, जिसके चलते मैं कई मामलों में किसी common person से अलग decisions लेता हूँ।


 

बचपन में सभी गुड्डे-गुड़ियों का खेल खेलते हैं। मैं भी खेला, शादियाँ attend की, लोगों को जिंदगी जिते देखा और मैंने भी ख्वाब देखें। बस फ़र्क सिर्फ इतना था कि बचपन मे जब मेरे friends जो सामने उन्हें दिखी वो उनको लेकर ख्वाब देखे, और मैं अपना ख्वाब उनके गुण और दोषों को देखकर अपने हिसाब से एक perfect character-sketch बनाते हुए देखता गया। उनका ख्वाब किसी जीवंत व्यक्ति से जुड़ा था इसलिए उनका ख्वाब जल्दी टूटा और वो आसानी से उभर भी गए। मेरा ख्वाब मेरी कल्पना से जुड़ा था इसलिए मेरे ख्वाब को टूटने में काफी समय लगा, और मैं अब भी उससे उभरने की कोशिश ही कर रहा हूँ।

 

I’m sorry. हमारा समाज, specially महिलायें पूरी कोशिश करती है एक लड़के को अपनी family, wife, parents, और बच्चों को अपनी पूरी जिंदगी serve करने वाला husband बनाने की। पर मैं आजाद ख्याल का हूँ। उनकी मेरे ऊपर निर्भरता मुझे बंदिशों में बाँधेंगी। मैं आजाद नहीं रह पाऊँगा। इसलिए मैं यह समझता हूँ कि जो मुझे बिना समझें अपनाएगी, जो मेरी पसंद की नहीं होगी, उसके साथ मेरा रिश्ता अच्छा नहीं रहेगा। हम दोनों ही एक-दूसरे को निराश करेंगे और बस तकलीफ ही देंगे। इसलिए मैं arrange marriage को नहीं बल्कि love marriage को prefer करता हूँ, कि हम पहले chat, date करके एक-दूसरे को समझ लें फिर relationship में आए। पर मेरी बात किसी के साथ भी कभी एक-दो chat से आगे बढ़ी नहीं। सभी का यह complaint था कि मैं over-expectations रखता हूँ। इसलिए ना मैं कभी date पर गया और ना मेरा अभी तक कोई relationship रहा है।

 

  • मेरे life में जितने भी लोग रहें हैं, बचपन से, एक वक्त के बाद वो यह अहसास दिलाते रहे हैं कि मेरी अहमियत उनके life में सिर्फ side character की तरह है। खासकर उनकी शादियों के समय से। Uncles, फुआ, cousins,... शादियों मे अचानक उनके life में कई लोग जुड़ गए, और मेरी अहमियत उनके life में घटती गई है। मैं किसी पर भी अपना हक़ नहीं जता सकता हूँ, क्यूंकि उनके life में मुझसे ज्यादा किसी और की अहमियत होती है- कभी किसी इंसान की तो कभी कोई चीज की। मेरा भी कभी ऐसा ख्वाब हुआ करता था कि मैं भी किसी पर अपना हक़ जता सकूँ, जिसके life में सबसे ज्यादा मेरी अहमियत हो। कोई अगर किसी और की खुशी के लिए मुझे चुनेगी, तो वो उनसे ज्यादा मुझे अपने life में भला कैसे अहमियत देगी ! इसलिए मैं चाहता था कि कोई मुझे खुद से चुने। पर यह करने के लिए उसके पास “Freedom of Choice” होना चाहिए। जो कि यूँ ही नहीं मिलता। खुद को साबित करना पड़ता है, आज्ञाकारित का विरोध करना पड़ता है। जिन्हे बड़ों की बात मानने की आदत होती है, बड़े उनके life का decision लेना नहीं छोड़ते। जिन्हें उनके life के लिए दूसरे के लिए फैसलों को मानना पड़ता हो, वो आजाद कैसे हुए ! वो तो मानसिक गुलाम है, और मुझे किसी गुलाम का मालिक नहीं बनना है। क्यूंकि किसी का मालिक बनना भी एक बंधन हैं, और मुझे बंधन पसंद नहीं है। मैं एक आजाद ख्याल का लड़का हूँ।

  • यह कैसे possible हैं कि किसी को बंधन पसंद नहीं है, वह आजाद ख्याल का है, फिर भी वह किसी के साथ relationship चाहता है, और किसी की care करना गुलामी भी समझता है ? Possible है, अगर आप “Individuality” को समझो तो..। इस शब्द की परिभाषा जानना काफ़ी नहीं है, इसका मतलब अच्छे-खासे पढ़ें-लिखे लोग भी नहीं समझते हैं। मैं individuality को समझता हूँ इसलिए मैं यह समझता हूँ कि जिस तरह मेरी पसंद-नापसंद है, ख्वाब हैं, वैसे ही मेरे इर्द-गिर्द मौजूद हर किसी का अपना individual ख्वाब हैं। जिस तरह मैं अपने खूबसूरत कल के लिए हर वक़्त ख्वाब बुनता रहता हूँ, वैसे ही हर कोई अपना ख्वाब बुनते रहते हैं। हर कोई अपनी कहानी का center character है। पर समस्या वहाँ खड़ा हो जाता हैं जब वो अपने ख्वाब में दूसरे को शामिल करने लगते हैं, as a side character. इससे एक-दूसरे का ख्वाब आपस में टकराने लगता है, और ख्वाब सिर्फ उसका बचता है जो dominating होता है। Parents जब अपने बच्चों पर अपना ख्वाब थोपते हैं, बच्चों का ख्वाब चकनाचूर हो जाता है। वो ख्वाब जिसे लेकर वो सालों से कई plannings किए होते हैं, पर उन्हें parents के कहे रास्ते पर चलना पड़ता है जिसके बारे में उन्हे नहीं पता होता है कि उसे आगे कैसे आगे बढ़ना है। एक pointless life जीने से अच्छा है कि हम बागी हो जाए। अपने रास्ते में शायद हम हजार बार गिरे, पर हमें at least यह तो पता होगा कि हमें आखिर life में चाहिए क्या..। जो अपने individuality, ख्वाब देखने और अपने life का खुद decision लेने के लिए खुद का stand नहीं ले सकती है; इसमें कोई शक नहीं है कि अपने life में समय-समय पर मुझे उसकी वजह से unnecessary compromises करने पड़ेंगे। मेरा शादी कब होगा, कैसे होगा, बच्चे कब करना है, कितने करना है, उसे कैसे पालना हैं, घर का खाना, family functions, यहाँ तक कि मेरे जिंदगी के लोग; सब कोई और तय करने का कोशिश करेगा, और मैं पहले ही बता चुका हूँ कि मुझे control पसंद नहीं है। मैं अगर अपनी partner के life को control करने की भी कोशिश करूँगा तो उसके लिए psychologically उससे बंधा रहूँगा, मुझे यह बँधन भी नहीं चाहिए। मैं relationship में होकर भी अपनी individuality को नहीं छोड़ूँगा; मैं एक आम इंसान से अलावा एक writer हूँ, अगर मैं बन सका तो एक teacher भी रहूँगा, मेरी यह individual पहचान मेरे life में किसी के भी होने या ना होने से बदलेगा नहीं। जिसकी खुद की ऐसी individual पहचान हो, उसका अपने बाप/परिवार के नाम से पहचाने जाने से ज्यादा, मुझे लगता है कि मैं सिर्फ वैसी ही किसी के साथ relationship में खुशी-खुशी रह पाऊँगा। जो अपने परिवार के लिए अपने ख्वाबों को compromises कर सकती है, वो किसी के साथ भी adjust करके रह सकती है। जो शायद खुद को खो दें, अंदर से मर जाए, जिंदा लाश हो जाए, मैं सिर्फ उसके लिए हूँ; क्यूंकि मैं भी अंदर से वैसा ही हूँ।

  • बहुत सारे लोग कहते हैं कि मैं बहुत ज्यादा सोचता हूँ, वो सही है। पर इसका कारण क्या है, वो इसपर ध्यान नहीं देते है, बस सलाह देते हैं मुझे इतना ज्यादा नहीं सोचने के लिए। फिर वही सब लोग मुझसे उम्मीदें पालते हैं। कहते हैं कि मैं उनकी परवाह करूँ। बड़े भाई होने के नाते उनके बच्चों पर ध्यान दूँ, guide करूँ। मैं भाइयों में बड़ा होने के नाते यह करता भी रहा हूँ। पर इससे मेरे रिश्ते मेरे cousins के साथ कमजोर हो गए। वो मुझसे दूर भागते हैं, बात करने और साथ खड़े रहने से कतराते हैं। बड़े लोग अपने बच्चों को खुद दुलारते हैं, और मुझसे उम्मीद करते हैं वो कि मैं उनके बच्चों को Discipline सिखाऊं, ऐसे में वो बच्चे मेरी कद्र भला क्यूँ करेंगे ! वो कहते हैं कि उन्होंने दुनियाँ देखी, उन्हें बहुत समझ है, अनुभव है, और फिर भी वो मेरा relation अपने बच्चों से खराब कर दिए। जब मैं यह कर रहा था, मैं यह अनुभव किया कि कई ऐसे हालात, जब उनसे juniors गुजरेंगे ही नहीं तो उसका उन्हें अनुभव ही नहीं मिलेगा। इसलिए मैं बड़ों के खिलाफ stand लिया, अपने cousins के लिए। तब मुझे यह समझ आया कि बड़े मुझसे यह उम्मीद नहीं कर रहे थे कि मैं उनके बच्चों का ख्याल रखूं, उन्हें protect करूं। बल्कि वो मुझे इस्तेमाल कर रहे थे अपने रिश्ते अपने बच्चों के साथ अच्छा बनाए रखकर मेरे जरिए उन्हें discipline सिखाकर control करने के लिए। हमें लगता हैं कि समाज हमारी परवाह करता हैं, पर हमें इस्तेमाल करता है किसी object की तरह। There are two terms- Objectification and Personification. मैं कइयों को देखा हूँ- नाम से, झूठे शान से, पहचान से, जमीन के टुकड़े से, धन से, विरासत से, भौतिक चीजों की बहुत परवाह करते हैं; पर इंसानों को इस्तेमाल करते हैं किसी वस्तु की तरह। जिसे अपने individuality का समझ नहीं होगा, उसे कभी यह अहसास नहीं होगा कि कोई उसे वस्तु की तरह treat कर रहा है, या वो कब किसी और को वस्तु की तरह treat करने लगेगी। ऐसे में मेरा मनभेद होना स्वाभाविक है, और यह दरार हमारे बीच के रिश्ते में रंग और मिठास को खत्म कर देगा। इसलिए मुझे कोई ऐसी life partner चाहिए जिसे इस चीज की समझ हो।

  • इसके बावजूद मैं इस बात को समझता हूँ कि उनका(समाज/लोगों का) intellectual इतना ज्यादा ना होने का कारण वो खुद पूरी तरह नहीं है। उन्हें वैसा ज्ञान, गुरु और अनुभव नहीं मिला जैसा मुझे मिला। मैं अगर चीजों को उनसे बेहतर समझता हूँ तो मुझे अपनी इस responsibility को समझना होगा, कि मुझे उन्हें enlighten and guide करना होगा। At least कोशिश तो करना ही होगा। क्योंकि वो मेरे आसपास रहकर जो भी activity करेंगे, directly or indirectly वह मुझे और मेरी family के life को भी impact करेगा। मैं बहुतों में यह मानसिकता देखता हूँ कि वह सिर्फ अपने खून के रिश्ते को ही अपना मानते हैं और इसके अलावा बाकियों से मतलब नहीं रखते हैं, खासकर लड़कियों/महिलाओं में। पर मैं यह भी देखता हूँ कि खून के रिश्तों को छोड़े जाने का डर नहीं होता है, इसलिए वो ढ़ीठ बने रहते हैं और कभी खुद को बदलते नहीं है। जिन्हें रिश्तों का कद्र होता है, वो समय के साथ खुद को बदलना सीख लेते हैं, ताकि रिश्ते सुधारे जा सके। वो फिर सिर्फ खून के रिश्तों तक सीमित नहीं रहते हैं, मैं इसमें कैसा हूँ यह तो मेरे दोस्त ही बता सकते हैं। क्योंकि उनकी कोई मजबूरी नहीं थी मेरे साथ होने की, मुझसे दोस्ती करने की और हमारी दोस्ती को बनाए रखने की; फिर अगर कोई अब भी मेरा दोस्त है, तो मुझे उनकी हमेशा कद्र करनी चाहिए। प्यार, दोस्ती से भी आगे की बात है; जमाने की परवाह किए बगैर, जमाने से लड़कर, जमाने के सामने निभाना; काश मैं भी इतना खुशनसीब होता !

  • एक चीज और है जो मैं लोगों में देखता हूँ- कई लोग अपने ख्वाब को इतना ज्यादा अपने लिए important बना लेते हैं कि वह यह भूल जाते हैं कि उनके सामने खड़े इंसान का अपने life में उनके illusion के बाहर भी कोई existence है। वो जमीनों के पीछे पड़े रहते है- खरीदते, बेचते, बचाते। मैं सुबह school जाने के लिए उठता था और झगड़े सुनता था कि किसी और के जमीन में किसी की गाय गोबर कर दी। जब school से वापस आता था तो घर घुसकर कपड़े बदल कर खाना खाने से पहले झगड़े देखता था कि किसी ने किसी और की जमीन में बढ़ाकर बुनियाद खोद दी। School में homework मिलता था घर आकर करने के लिए। घर आने के बाद खाना-खाने से पहले order सुनाई देता था सब्जियों में पानी पटा देना। सुबह आधी नींद में उठा दिया जाता कि सब्जियां तोड़नी है, market ले जाने के लिए। यह सब अब नहीं होता है, पर उस वक्त होता था जब मुझे मेरे लिए वक्त मिलना चाहिए था। मेरे uncle paralyzed है। School के दिनों मेरा दिनचर्या होता था, daily school से आने के बाद उन्हें wheelchair पर सैर के लिए निकालना, 5-10min नहीं, पूरी शाम तक। तो मेरा life कहां था, कहीं नहीं। जो लोग धन के पीछे पड़ते हैं, वो भी अपने बच्चों को उसकी हिफाजत के लिए लगाते हैं। The person who can not "fight for their own dreams", वो नहीं समझते हैं कि उनकी या हर किसी की खुद की भी life exist करती है। फिर जब उनके बड़े उनके ऊपर ख्वाब थोपना बंद करते है, बूढ़े होने के कारण या मरने के कारण, या वो दूसरों का ख्वाब पूरी तरह अपना ख्वाब बना लेते हैं अंजाने में; तो फिर वो यही काम अपने बच्चों पर और अपने इर्द-गिर्द मौजूद अपने रिश्तों पर करना शुरू करते हैं, अपना ख्वाब उनपर थोपना शुरू करते हैं।

  • मैं अगर अपने ख्वाब में किसी के किरदार को add करूँगा, तो उनसे उतनी ही उम्मीदें रखूँगा, जितना वो मुझे भरोसा दिलाए। इसलिए मैं अब किसी के उतने ही करीब जाता/रहता हूँ, जितना वो मुझे अपने करीब होने देते हैं। वो अगर मुझे सामने खड़ा करके किसी और के साथ busy हो जाते हैं और मुझे उसमें शामिल नहीं करते हैं, मेरा दिल करता है कि मैं वहाँ से चला जाऊँ और उनके life से भी। अगर मैं यह पाता हूँ कि उनके life में मेरी अहमियत घट रही है तो..। पर लोग इस बात को नहीं समझते हैं। वो औरों को अपने ख्वाब में शामिल तो करते हैं, पर उन्हें अहमियत नहीं देते हैं। वो उम्मीद करते हैं कि हम उनके life के अलग-अलग मौकों पर रहें, मुकदर्शक बनकर। बस उनके life को भीड़ बनकर सजाने के लिए, जैसे कि उनके bubble world के बाहर हमारी कोई "existence" है ही नहीं। यार मेरी जिंदगी सिर्फ उतनी नहीं है। अगर उन्हे मुझे अपनी जिंदगी में add करना हैं तो मेरी कोई कहानी तो हो..। अकेला तो मैं भी feel नहीं करना चाहता हूँ।

  • जिन्हें अपनी individuality और खुद के ख्वाब के लिए लड़ना नहीं आता है, उन्हें यहां समझ नहीं आता है कि रिश्ते जमीन और संपत्ति की तरह विरासत में नहीं मिलते हैं, उन्हें कमाना पड़ता है। उन्हें यह भ्रम होता है कि पारिवारिक रिश्ते उनके अपने हैं। उन्हें नहीं समझ आता है कि उनके पिता के भाई, उनके भाई है; और उनके uncle उनके अपने है। आप कह सकते हो कि "दोनों तो same ही बात है...!" नहीं दोनों same बात नहीं है। जो रिश्ते किसी और की वजह से होते है, वो आपके नहीं है। जो रिश्ते आपके खुद के वजह से है, वो आपके हैं। आपका व्यक्तिगत रूप से जुड़े रिश्ते ही सिर्फ आपके अपने हैं। यही वजह है कि एक इंसान के चले जाने से जो रिश्ते उनके वजह से होते है वो भी खत्म होने लगते हैं। मेरे दादाजी के दोस्त उनके मरने के बाद अब पहले की तरह घर नहीं आते। मेरे पापा/चाचाओ की बहनों की सहेलियों, उनकी बहन की शादी के बाद घर नहीं आती दादी का हाँथ बंटाने। पापा के भाइयों के दोस्त, अपने life and career की वजह से उनसे दूर होने बाद से पहले की तरह हर बात पर पहले की तरह हमारी भी परवाह करने नहीं आते, जैसे वो पहले आया करते थे। जब वक्त बदलता है, हर एक रिश्ता जिसकी वजह से है, उसके जाने के बाद आपके पास नहीं होगा, मेरे पास नहीं होगा। धीरे-धीरे करके वो सारे रिश्ते जो हमारे grand parents से जुड़े है, Parents से जुड़े है, सब दूर होते जाएंगे। इसलिए हमें खुद के रिश्ते कमाने चाहिए, दूसरों के रिश्तों पर खुद को निर्भर करना बेवकूफी है। इसलिए जो रिश्ते हमारे परिवार वालो ने खराब किए हैं, अगर हम ठीक कर सकते हैं तो हमें अपने परिवार के against जाकर भी ठीक करना होगा। इसलिए हो सकता है कि कई रिश्ते जो अभी ठीक है वो खराब हो, पर अगर वो उतने जरूरी नहीं है तो हमें यह step लेना होगा। "Family के against" सिर्फ वही लोग जा सकते हैं जिन्हें खुद के लिए stand लेना आता होगा। लोग हमें selfish बोलेंगे, इसलिए यह stand सिर्फ वही लेने की हिम्मत करेगा जो लोगों के ताने बर्दाश्त कर सके।

  • "क्रोध, घृणा, मोह, भय" जिसके अंदर होगा; वो कभी अपने family के against जाने की हिम्मत नहीं करेगा। और जिसके अंदर "काम, लोभ, अंहकार" होता है उसे अपनी उंगलियों में हर वो इंसान नचाता है जिसे साम, दाम और भेद जैसी कूटनीति करने का आदत हो। भाई-भाई में जमीन का विवाद, पिता की संपत्ति अकेले हड़पने का षडयंत्र, खूबसूरत wife का affection, महंगे शौक, कामचोरी, गलतियों का guilt,... यह सब समाज में देखने को मिलता है। मैं इन सब जंजालों में नहीं पड़ता चाहता हूँ, इसलिए चाहूंगा कि जो मेरी life partner बने वो भी spiritual हो, वो अंधविश्वासी ना हो। जिससे कोई भी बाबा, या ढोंगी उसे बेवकूफ बनाकर हमारी जिंदगी तबाह ना करे।

  • जब मैं अपने B.Ed. course के दौरान training कर रहा था- सुबह उठता था, नाश्ता करके school जाता था, school से लौटकर lesson plans बनाता था, next day के लिए preparation करता था, फिर खाना खाकर सो जाता था। उसी वक्त मुझे समझ आ गया था कि मेरा life कैसा होने वाला है। मुझे समय नहीं मिलेगा अपनी family के लिए, रिश्तों के लिए, कई बार तो खुद के लिए भी। ऐसे में मेरे भी कई official works होंगे- land revenue department में, electricity board में, bank में, hospital or doctor's appointment में, खुद के लिए नहीं तो कम से कम अपनी family के साथ खड़े रहने के लिए। पर मैं दोनों जगह नहीं हो सकता हूँ। ऐसे में मेरा expectations यह जरूर होगा कि अगर मैं कमाने के लिए बाहर जा रहा हूँ तो पीछे मुझे घर का tension ना हो। मैं जानता हूँ कि यह मैं बहुत ज्यादा expectations कर रहा हूँ, पर मुझसे भी तो यह expectation रखा गया कि मैं कमाई और पद में लड़की से better रहूं। वो कमाने जाती और मैं पीछे family का ख्याल रखता, रिश्ते मेरे हैं इसलिए उनसे मैं better deal कर सकता हूँ क्योंकि मैं उन्हें बचपन से देखते आया हूँ, मैं लोगों से deal कर सकता था, bike या कोई भी vehicle को use कर सकता था। पर मेरे इस चुनाव की वजह से मुझे careless और निकम्मा कहकर छोड़ा गया। अब अगर मैं काम करने लगूँ, तो मेरे पीछे मेरी family needs किसी को तो पूरा करना होगा। औरों के पास भाई-बहन, जीजा होते हैं, मेरे पास कोई नहीं है। I’m only child of my parents. ऐसे में मेरी life partner को अच्छे से English+Hindi पढ़ना लिखना आना चाहिए, technology use करना, computer & mobile अच्छे से use करना, self-travel के लिए scooty/bike चलाना आना ही चाहिए, अगर car भी drive करना आए तो और भी अच्छी बात है। औरों के लिए हो सकता है कि यह शौक को, पर मेरे life partner के लिए यह need होगी। मैं उसे हर जगह drop करने नहीं जा पाऊंगा, मेरे पास उसके हर documents को read करने का time नहीं होगा, मैं हमेशा उसका या family का खयाल रखने के लिए available नहीं रहूँगा। इतना सब कुछ किसी immature बच्ची में कभी नहीं मिलेगा। इसके लिए वक्त, ज्ञान, बोध और तजुर्बा चाहिए। कोई कहेगा और मैं hopefully उसकी बात को मानकर किसी के साथ भी relationship में आने के लिए तैयार हो जाऊँगा, ऐसा नहीं होगा। मैं इससे पहले समय देकर यह समझना prefer करूंगा कि क्या हम एक दूसरे के लिए सही है भी या नहीं। क्योंकि इतना पढ़ने के बाद अब आप यह समझ गए होगे कि क्यों मैं हर किसी के साथ खुश नहीं रह सकता हूँ।

  • मुझे लोगों के सामने खुद को express करने की आदत नहीं हैं। जिसे खामोशी पढ़ना ना आता हो, मेरी तरह, वो मुझे कभी समझ नहीं पाएगी; और जिसे पढ़ना ही नहीं आता हो, वो तो मेरी इस diary को भी नहीं पढ़ेगी जो at least मुझे मेरे literary works के through समझने की कोशिश करे। That is why मैं college में उसे चुना था जो पढ़ना पसंद करती थी। “अगर मैं expressive नहीं हूँ, मुझे बातें करने की आदत नहीं है तो फिर मैं भी तो उसे नहीं समझ पाऊँगा..?” क्या इसे पढ़ने के बाद भी लगता है कि मैं expressive नहीं हूँ ? बस मेरा खुद को express करने का तरीका अलग है, यह casual नहीं है। और जब कोई खुद को express करता है तब उसे हम समझते हैं, पर किसी को हम सिर्फ उसके express करने से नहीं समझते हैं; बल्कि हम उसके attitude, gratitude, actions, activities,… से भी लोगों को observe कर सकते हैं। क्या मैं यह कर सकता हूँ ? मैं at least उतना तो जरूर समझ सकता हूँ, जितना मैं अपने किरदारों को अच्छे से लिख पाता हूँ। और इसमें मैं कैसा हूँ, यह तो मेरी लिखी कहानियों पढ़कर कोई भी समझ सकता है।
  • मैं लोगों के लिए अपने life से, dream से compromise कर सकता हूँ। पर अपनी ideology का compromise कभी नहीं करूंगा। मैं नासमझ हो सकता हूँ, अपनी immaturity में गलतियां कर सकता हूँ, हो सकता है कि मैं शर्मिंदगी में कभी अपनी गलती को accept ना करूँ। पर एक चीज नहीं बदलेगा, सीखना, और intellect होना। जिसकी पहली शर्त ही यही है कि मैं यह accept करूं कि मैं हर चीज नहीं जानता हूँ। जहां बात आती है कट्टरता की कि ब्रह्माण्ड का ज्ञान उसे मिल चुका हर और जिसका वो दावा करते हैं वो शाश्वत है, मेरा उनसे कभी नहीं बनेगा। मैं उनके साथ अपनी ideology को compromise करके तो रह ही नहीं सकता हूँ। मैं 24 hrs. कोई और होने की acting, जो मैं नहीं हूँ, नहीं कर सकता हूँ। मेरा किरदार अगर औरों से अलग है तो उसका कारण है मेरा character, जिसके होने का कारण मेरी ideology, knowledge, and perspective है। मेरा किसी और के हिसाब से बदलने का मतलब यह होगा कि मैं खुद को खो दूँ। मैं अपनी personality में बदलाव कर सकता हूँ, पर जो मूल essence है मेरे किरदार का, वो कभी compromise नहीं करूंगा। जो भी मेरी जिंदगी में आए, उसे मेरी इस individuality को समझना पड़ेगा।

मेरा यह note लिखने का कारण यह है कि मैं यह जानता हूँ कि अब कुछ वक्त में कई लोग मेरे शुभचिंतक बनकर मेरे लिए भी partner ढूंढने निकलेंगे। मैं यह चाहता हूँ कि वो लोग, और जिनके सामने मेरे बारे में यह जिक्र हो, वो इस बात को जाने और समझे, ताकि वो यह तय कर सके कि उसे मुझसे मिलना चाहिए भी या नहीं। क्योंकि अगर कोई अपनी बेवकूफी में किसी ऐसे लड़की से मुझे मिला देंगे, जो  मेरी expectations के आसपास भी ना हो, तो शायद उन्हें फिर लड़की वालो के घर में मेरी वजह से शर्मिंदगी झेलनी पड़े।


मुझे लगता है कि इतनी बाते काफी होंगी, किसी के लिए यह decide करने के लिए कि मुझे कैसी लड़की से वो मिलाएं, या कैसी लड़की को मुझे as a life partner dream करना चाहिए। क्योंकि मैं किसी के भी लायक नहीं हूँ, मैं सिर्फ कुछ खास की ही जरूरत हूँ।


-Krishna Kunal(AnAlone Krishna)

3rd April, 2026 A.D.

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