याद तुम्हारा, कृष्ण कुणाल की लिखी कविता

Tuesday, May 09, 2017 0 Comments

* याद तुम्हारा *


अब भी जब लम्हा ठहर सा जाता हैं ,
करता रहता हूँ मैं दीदार तुम्हारा ।
तुम चले गये छोड़ कर यादे अपनी ,
जो बताती है हरपल कि हूँ अब भी तुम्हारा ।।

बह जाने दे जज्बातो को अल्फाज बनके साँसो से ,
जो याद दिलाता रहता है ऐतबार तुम्हारा ।
ना दोषी थे तुम , ना रोक पाया अपनी बेरूखी को ,
दिल दुःखाता चला गया मैं खुद ही तुम्हारा ।।

अभी भी दिल की महफिल में जब गम के बादल छाते हैं ,
मुझे लाना होता है आँखो में बस एक झलक तुम्हारा ।
याद करके तेरे चेहरे को हम अब भी खुश हो जाते हैं ,
दिल को शायद मेरे हैं, बस इंतजार तुम्हारा ।।

ना कसमे थें , ना वादे थें ,
ना संग जीने-मरने के कोई ईरादे थे ।
अब अलग-अलग है राहें अपनी ,
पर राह तकता हूँ हर बार तुम्हारा ।।

क्या चीज हो यार मुझको बता दो ,
बता दो मेरी हर एक खता को ।
कोसना चाहता हूँ तुझको , पर कभी कोस नही पाता हूँ ,
कैसा है ये असर मुझपर अब भी तुम्हारा ।।

-AnAlone Krishna.
09/05/2017

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