पछतावा और आँसू, कृष्ण कुणाल की लिखी कविता

Monday, March 06, 2017 0 Comments

* पछतावा और आँसू *

कब तक मैं पचताता रहूँगा, मेरी जिन्दगी में पचतावें बहुत है ।
याद करके रोता रहूँ , ऐसे-ऐसे अफसाने बहुत है ।।

नींद आ रही है मगर मैं जाग रहा हूँ ।
लोग मेरे करीब आ रहे है और मै उनसे दूर भाग रहा हूँ ।।

सुनाने को तो औरो के पास भी तराने बहुत है ।
और मैं अपने ही धुन में राग खुद का अलाप रहा हूँ ।।

ऐ जिन्दगी अब तू जितने भी गम दे मै झेल लूँगा ।
जितना चाहे उतना खेल , मैं अपने ही दिल से खेल लूँगा ।।

होंगे लोग जिनके छलकते होंगे आँसू जब वो गम में डूब जाते हैं ।
अपने तो दिल भरने पर भीगे पलकों से भी आँसू सूख जाते हैं ।।

हम रोयेंगे अब कितना !, जिन्दगी भर रोता रहूँगा ?
जिन्दगी ने मुझको दिये ऐसे-ऐसे दर्द बहूत हैं ।।

-AnAlone Krishna.
06/03/2017

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