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बहन के लिए इँतजार, कृष्ण कुणाल की लिखी कविता

बहन के लिए इँतजार, कृष्ण कुणाल की लिखी कविता

_बहन के लिए इँतजार_ कभी खुद को, कभी राहो को, देखता हूँ मैं, और सोचता हूँ उदास क्यू हैं। काम में मन ना लगे तब, सोचता हूँ तू यहाँ हैं ...
अनंत दर्द - कविता

अनंत दर्द - कविता

. .. अनंत दर्द .. . साँसे क्यूँ चलती है, कटती है क्यू मेरी राते। आँशु भी ना आते है, बस सूख जाती है मेरी आंखे। ख्वाबों को क्यूँ बु...

  Jane aisi kya kami,dil ko hamesha khalti rahti hai. Jiske chalte hum savi kisi saathi ki talash karte rahte hai. Par kavi yah kami door hi...

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