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जब मैं inter में पढ़ाई कर रहा था, तब लगभग 90% लड़के ऐसे थे जो life में कुछ बनने का ख्वाब लेकर college आते थे और सिर्फ 10% लड़के ही ऐसे थे जो आवारागर्दी करने और लड़की पटाने का ख्वाब लेकर college आते थे। उस वक़्त अगर वो मुझे negative influence करने की कोशिश करते तो मैं उनसे उनके घरवालों का no. माँगता उनका permanent solution करने के लिए तो वो डर से शांत हो जाते। उस वक़्त उन्हें समझाया या दबाया जाना आसान था।
वही जब graduation में पहुँचा तो यह उल्टा हो गया। मुश्किल से हम 10% ही लड़के ऐसे होंगे जो खास class करने और पढ़ाई करने के लिए college जाते थे। शेष 90% लड़के deo लगाकर bike में कोई रहीस की तरह google पहनकर style मारने और लड़की पटाने के ख्वाब लेकर आते थे। इन्हें किसी का डर नहीं होता था। बल्कि ये उल्टा मुझे समझा देते थे कि मैं बहुत ज्यादा सोंचता हूँ मुझे life को enjoy करना चाहिए। उससे भी ज्यादा हैरानी मुझे तब हुई जब उनमें से सभी के नहीं लेकिन कुछ के friend circle में जो लड़कियाँ थी, उनका भी concept मुझे यह पता चला कि बस पटाओ, सटाओ और हटाओ।
आज की युवा पीढ़ी जो इस western concept को follow करना शुरू कर चुकी है, उन्हीं के शिकार होकर जब लड़के किसी से emotional attachment बना लेते हैं तो suicide करते हैं और लड़कियों को धोखा मिलता है तो वो कहीं मुँह दिखाने के लायक नहीं रहती। और यही आज की वर्तमान समाज की असली सच्चाई है।
कल शिक्षक दिवस में जो हज़ारीबाग की एक बेटी का news निकल कर आया, उसके साथ दुष्कर्म करने वाले जरूर उनमें से वो कम अक्ल वाले रहे होंगे जिन्हें इस दिखावे के बहुत ही अच्छे और सुंदर समाज मे बिना कोई influence किये अपना गुनाह करने नही आया होगा।
मैं उन्हें unqualified बताकर उनके crime को justify नहीं कर रहा हूँ। They must will have to be punished. But, ऐसी पटाओ, सटाओ और हटाओ वाली सोंच को रखने वाले वो लड़के-लड़कियाँ, they are also criminals who brutally corrupt the mental health of the youth of our society. And they are also worthy of the punishment.
Be a Man. Respect women.
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