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Day 18: My painful experience and fear from unexpected possibility of last night. | Dairy of AnAlone Krishna

 __________Day 18__________

My painful experience and fear from unexpected possibility of last night.
पता नहीं कब कैसे क्या हुआ, कि अचानक कल शाम मेरे कमर में दर्द शुरू हुआ। मैंने सोंचा कि मामूली दर्द है, ठीक हो जाएगा। फिर जैसा कि फिलहाल का मेरा routine बना हुआ है- मैं 5 बजे नहाकर पहाड़ी गया। उन पौधों को देखने के लिए जो हमने लगाए हैं। वहाँ से मैं वापस भी आया। दर्द थोड़ा ज्यादा धीरे-धीरे बढ़ रहा था, but that was bearable. But रात में जब मैंने खाना खाने के लिए बैठने की कोशिश की, तो तब तक दर्द इतना ज्यादा बढ़ चुका था कि मुझे झुकने में भी बहुत तलकिफ़ होने लगी। ज़मीन पर बैठने पर दर्द मुझसे सहा नहीं जा रहा था, तो फिर वहाँ से मैं उठ गया, और table पर ले जाकर खाना खत्म किया। खाना खाने के बाद अपने uncle के bedsore की dressing करना फिलहाल मेरा आजकल का daily का काम होता है। मैं कल यह नहीं कर पाता इसलिए मैंने दादी को बोल दिया करने के लिए। फिर जब मैं खटिये में लेटने गया तो मैं किसी भी करवट को ले नहीं पा रहा था। कमर के दर्द इतना ज्यादा बढ़ गया कि मन तो कर रहा था कि कमर काट के फेंक दूँ। उसके बाद दादी आई और मेरे कमर में balm लगा दी। इससे थोड़ी राहत हुई, मैं करवट ले पाने लगा। लेकिन फिर भी दर्द इतना ज्यादा कर रहा था कि उस तकलीफ के कारण मैं सो भी नहीं पा रहा था। जब तक मुझे नींद नहीं आया, मुझे वो बातें याद आने लगी जो मेरे घर में आज से 12-15 साल पहले घटी थी।
2004 या 2005 में मेरे uncle की शादी हुई। शादी के एक साल के बाद वो बीमार हुए। फिर उनका spinal cord injury हुआ और वो paralyzed हो गए। उनका treatment वेल्लोर के C.M.C. Hospital में भी हुआ मगर वो फिर वो कभी ठीक नहीं हुए। फिर उन्हें discharge कर दिया गया proper training के साथ और उम्मीद दिलाया गया कि अगर कुछ improvement आएगा तो वो कुछ कर सकेंगे। इसलिए regular routine follow करने का निर्देश था। उसके साथ वो अशाविहार गए, काफ़ी ओझा-भगत, तांत्रिक उपाय भी किये लेकिन uncle फिर कभी ठीक नहीं हुए। वेल्लोर से आने के बाद uncle ने ही aunty को suggestion दिया कि उन्हें उनके वजह से अपना life खराब ना करने के लिए और वो चली भी गई। कल जब मेरे मेरे कमर में इतना ज्यादा दर्द करने लगा कि मैं ठीक से ना लेट पा रहा था और ना बैठ पा रहा था, मुझे भी यह डर लगने लगा कि मेरा आगे क्या होगा। मैं इससे पहले अपनी family में बीते घटनाओं से प्रेरित होकर सोंचता था कि, अभी तो मैं सही सलामत हूँ पर आगे मैं रहूँ ना रहूँ, जो मेरा आज है वह आज तो मेरे पास है मगर कल शायद हो ना हो। क्या पता कल का सूरज कैसा हो, क्या पता कल मेरे पास हो भी या ना हो। इसलिए जो आज मेरे पास है, मैं उसे तो पहले जी लूँ। मैं इसी आज में जीने की ideology को हमेशा से follow करता आया हूँ और कल का मेरा कमर दर्द, यह मुझे अहसास करवा दिया कि मैं जो करते आया हूँ वो सही करते आया हूँ। मैंने अगर कल को बनाने के चक्कर मे अपने आज को खो दिया, क्या पता मुझे कल जीने का मौका मिले भी या ना मिले। मैं दिन रात 10*12*8 के डब्बे में बैठकर मेहनत करूँ, और जब जीने के लिए बाहर निकलूँ, तो बाहर कुछ भी ना बचा हो।
मुझे मेरे कई friends यह बोलते हैं कि मैं बहुत ज्यादा सोंचता हूँ, और negative भी। वो मुझे hope रखने बोलते हैं और अच्छा सोंचने बोलतें हैं। मैं क्या hope करूँ ? क्या मेरे uncle ठीक हो जाएंगे ? अगर हो भी गए तो क्या aunty अपनी वो नई दुनियाँ जो uncle को छोड़ने के बाद बसाई है उसे छोड़कर वापस आ जायेगी ? वो अगर आना भी चाहे तो भी नहीं आ सकती। यह समाज उन्हें यह कभी करने नहीं देगा। वक़्त कभी पीछे नहीं लौटता। उन्हें जिंदगी का सच acceptable नहीं होता। उन्हें बस fairy tales का वो happy ending का assumption होता है जो कि reality में कभी exist ही नही करता। कोई इस बता की surity नही दे सकता कि आगे जो वक़्त आएगा वो कैसे होगा। मेरे uncle की तरह मुझे भी यह गवारा नहीं कि मैं किसी का हाँथ थामकर उसे मजधार में ही अकेला छोड़ दूँ। हाँ, मुझे भी मेरे दोस्तों ने girlfriend बनाने के लिए बहुत बार बहकाया है और कई बार मैं भी उनके बातों से manupulate हुआ हूँ। लेकिन जब मैं किसी के सामने गया, यह डर हमेशा मेरे दिल मे रहा कि किसी के मन में साथ चलने की उम्मीद जगाकर, उसकी ख्वाहिशों को पूरा करने की, उसकी care करने की, उससे हमेशा प्यार करने की promise करके उसे अकेला ना छोड़ दूँ। साथ ही मेरे height को देखकर जब भी कोई रिश्तेदार घर आते हैं, शादी का comment जरूर मारते हैं। इसलिए हाँ, मैंने भी अपने मन एक parameter बना के रखा हुआ है कि मुझे life में कैसी चाहिए। जिसकी वजह से मैं किसी के भी ओर कर आकर्षण से खुद को रोक पाता हूँ।
मैंने अपने life में एक ऐसी life-partner की कामना की है, जिसे अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए, अपनी ख्वाहिशों को पूरा करने के लिए, अपनी खुशियों को सजाने के लिए मेरी जरूरत ना हो। वो इस काबिल हो कि वह मेरे बिना भी जी सके। उसे अपने life में मेरी जरूरत बस इतनी सी हो कि उसे जो अपनापन महसूस करने की ख्वाहिश हो, जो प्यार का अहसास पाने की ख्वाहिश हो, वो मुझसे पूरा हो सके। जिस अहसास की अहमियत समझ कर वो दिन के 24hrs में से 1hr भी नहीं, बस दिन का 5-10min भी अगर वो मेरे साथ बिताए तो उस लम्हें को ऐसे जीये; कि उस अहसास के साथ उसे 10 घंटे क्या, 10 महीने क्या, 10 साल क्या.., 50 साल भी अगर मेरे बिना जीना पड़े, तो वह अपने चेहरे में smile लिए आसानी से जी सके। जैसे कि 2009 में मेरे दादाजी के मरने के बाद दादी जीती है और uncle की देखभाल भी करती है। दादी के द्वारा balm लगाने के बाद आज तो मेरे कमर से दर्द लगभग गायब ही हो रहा है। मगर यह अहसास, यह सोंच, यह विचार, यह desire, यह perception, यह ideology मैं कभी नहीं भूलूँगा। होश में रहकर तो बिल्कुल भी नहीं। इसलिए मैं कभी अपने life में ऐसा कोई achievement हासिल करने की कोशिश नहीं करूँगा, जिसे देखकर कोई मेरी ओर आकर्षित हो। उल्टा मैं उन्हें मुझे ठुकराने का ही वजह देता रहूँगा। मेरा purpose of struggle and hard working, सिर्फ survival के लिए होगा।
बाकी लोगों के लिए हो सकता है कि यह बस एक story हो, लेकिन मेरे लिए यह जिंदगी है। यह मेरी जिंदगी है। तो जिसे myth and fairy tales को सच मानकर जीना है वो जीये। Everyone having right to live their life how they like.

27th September, 2020 A.D.


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