Recents posts from this Blog...👇

~अधूरी चाहतें~, कृष्ण कुणाल की लिखी कविता

~अधूरी चाहतें~, कृष्ण कुणाल की लिखी कविता

~अधूरी चाहतें~ (अपने अतीत में बीते यादों को इनको बिताए जगहों से गुजरते हुए याद करते हुए) कृष्ण कुणाल की लिखी कविता- ~अधूरी चाहतें...

Accept people as they are, don't aspect for them as you desire. हमारे सामने जो लोग हमें मिलते हैं, क्या उनका life वैसा बीता है जैसा हमा...

  •क्या एक चीज सोचने वाली बात नहीं हैं... जितने भी आविस्कार किए गए, जिनका हम आज दुष्परिणाम झेल रहे है, उनके अंदर कुछ नया करने की तमन्ना थी ...

क्यूँ खफा है तू औरों से ऐ मुसाफ़िर , तेरी मंजिल कहीं और है, उनकी कहीं और । सूरज रात को रौशन नहीं करेगा, और परिंदों को अपना आशियाना चाहिए...

  •my thought for World's Women's Day मैं थोड़ा अतीत के बारे में सोच रहा था । जिसमें की हमने कभी रानी लक्ष्मीबाई, पद्मिनी, इंद्रा गाँ...

Navigation 💡 [Select Categories from Edit]

Most recent Comments/Replies by the Readers 👇