Accept people as they are, don't aspect for them as you desire.
हमारे सामने जो लोग हमें मिलते हैं, क्या उनका life वैसा बीता है जैसा हमारा बीता है ?
जैसा माहौल में हम पले-बढ़े, क्या उनको भी वहीं माहौल मिला ? या हमने वैसा माहौल दिया ?
जैसी पारिस्थियों को हम सामना कर के आए हैं, क्या उन्होंने भी उन्हीं परिस्थियों को झेला है ?
जो जो सुविधाओ का हमने प्रयोग किया या जिनका कमी हमारे जीवन मे रहा, क्या उनके साथ भी वही सब रहा ?
जीतने मौके हमारे किस्मत ने हमारे आगे बढ़ने के लिए हमें दिए, क्या उनके किस्मत ने भी उन्हे दिया ?
क्या उनके पास भी हर वो खुशियाँ, हर वो रिश्ते हैं जो हमारे पास है ?
क्या वैसे दोस्त उनके life में हैं जैसे हमारे पास हैं ?
क्या उनकी मानसिकता, physical strength, experience उतनी है जिनती हमारी या वैसी ?
जब औरों के life experience अलग है, thinking capability, physical/mental strength, situations, relations, friend circle, opportunity, resources, locality, education, everything different है। सबसे बड़ी बात कि उनकी life और हमारी life ही अलग है। तो फिर कैसे हम aspect करते है उनकी life वैसी होगी जैसा हमारी है या जैसा चाहते है।
वो जैसे भी हैं वैसा उनके life ने उन्हें बनाया है, ठीक वैसे ही जैसे हमारे life ने हमें बनाया है। तो फिर कैसे हम किसी के character/behavior पर सवाल कर सकते है उन्हे वैसे होना चाहिए जैसा हम चाहते हैं। उनपर क्या गुजर रही है यह जाने बिना ही कैसे हम यह तय कर सकते है कि वो सही कर रहे या गलत कर रहे है। हो सकता है जो चीज हमें गलत लग रहा हो, उनके लिए जरूरी हो। हमारे अपने life में इतने confusions होते हैं, और हम दूसरों कि जिंदगी का फैसला कैसे ले सकते है...!
हमें लोगों को वैसे accept करना चाहिए जैसे वो हैं, हमें उनके हमारे मुताबिक होने का उम्मीद नहीं करनी चाहिए।
जब हम दुनिया में unique है तो वो क्यू नहीं होंगे...! इसलिए किसी के life में बिना मतलब का interfere भी नहीं करनी चाहिए।
मैं तो अपनी जिंदगी जियूँगा। आप भी अपनी जिंदगी जियो। और औरों को भी अपनी जिंदगी जीने दो।
-AnAlone Krishna
14th May, 2018 A.D.
हमारे सामने जो लोग हमें मिलते हैं, क्या उनका life वैसा बीता है जैसा हमारा बीता है ?
जैसा माहौल में हम पले-बढ़े, क्या उनको भी वहीं माहौल मिला ? या हमने वैसा माहौल दिया ?
जैसी पारिस्थियों को हम सामना कर के आए हैं, क्या उन्होंने भी उन्हीं परिस्थियों को झेला है ?
जो जो सुविधाओ का हमने प्रयोग किया या जिनका कमी हमारे जीवन मे रहा, क्या उनके साथ भी वही सब रहा ?
जीतने मौके हमारे किस्मत ने हमारे आगे बढ़ने के लिए हमें दिए, क्या उनके किस्मत ने भी उन्हे दिया ?
क्या उनके पास भी हर वो खुशियाँ, हर वो रिश्ते हैं जो हमारे पास है ?
क्या वैसे दोस्त उनके life में हैं जैसे हमारे पास हैं ?
क्या उनकी मानसिकता, physical strength, experience उतनी है जिनती हमारी या वैसी ?
जब औरों के life experience अलग है, thinking capability, physical/mental strength, situations, relations, friend circle, opportunity, resources, locality, education, everything different है। सबसे बड़ी बात कि उनकी life और हमारी life ही अलग है। तो फिर कैसे हम aspect करते है उनकी life वैसी होगी जैसा हमारी है या जैसा चाहते है।
वो जैसे भी हैं वैसा उनके life ने उन्हें बनाया है, ठीक वैसे ही जैसे हमारे life ने हमें बनाया है। तो फिर कैसे हम किसी के character/behavior पर सवाल कर सकते है उन्हे वैसे होना चाहिए जैसा हम चाहते हैं। उनपर क्या गुजर रही है यह जाने बिना ही कैसे हम यह तय कर सकते है कि वो सही कर रहे या गलत कर रहे है। हो सकता है जो चीज हमें गलत लग रहा हो, उनके लिए जरूरी हो। हमारे अपने life में इतने confusions होते हैं, और हम दूसरों कि जिंदगी का फैसला कैसे ले सकते है...!
हमें लोगों को वैसे accept करना चाहिए जैसे वो हैं, हमें उनके हमारे मुताबिक होने का उम्मीद नहीं करनी चाहिए।
जब हम दुनिया में unique है तो वो क्यू नहीं होंगे...! इसलिए किसी के life में बिना मतलब का interfere भी नहीं करनी चाहिए।
मैं तो अपनी जिंदगी जियूँगा। आप भी अपनी जिंदगी जियो। और औरों को भी अपनी जिंदगी जीने दो।
-AnAlone Krishna
14th May, 2018 A.D.
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