✨जरूरी क्या है⌚
( एक बार टूटने के बाद खुद को संभालते हुए)
कृष्ण कुणाल की लिखी कविता-
✨जरूरी क्या है⌚
यें फूल 💐 मंडराते भँवरों वाली,
हैं खिलीं-खिलीं बीच कलियों के।
हैं रानियाँ 👑 ये अपने गमलों वाली,
कल हो जायेंगी धूल गलियों के।।
यह दिन जो अब हैं ढल रहा,
था उमंग उड़ती हुई चिड़ियों 🐦 के।
धीरे-धीरे अब खो जायेगा,
यह तेज ☀ जो है किरनों के।।
हम खुश हैं अब, हाँ सचमुच खुश,
है साथ मिल रहा 👣 अपनो के।
मेरे नजरों के सामने पूरा हो रहा,
वो जिंदगी मेरी सपनों 👀 के॥
बस अब क्या, तो क्या है अब,
कुछ भी नहीं, अब अंत 👹 है आगे।
जिंदगी का मकसद तो बचा ही नहीं,
जब मैंने 🙋🏼 इस जिंदगी में झाँकें।।
अंत क्यूँ हुआ, किस लिए हो रहा,
जिंदगी के जगह 📝 इन इच्छाओं का।
कुछ आधे-अधूरे, कुछ मिल गए पूरे,
वो चीजें 🎁 मेरे महत्वाकांक्षाओं का।
कुछ तो है जो समझ में नहीं
आ रहा, क्या है वह 😥?
अब तक भाग रहा था सपनों के पीछे,
जीना है मुझे जिंदगी यह 👇🏼॥
यही है, और यह सही है।
संघर्ष ही तो जिंदगी 💟 है।
मंजिल में तो रास्ते खत्म होते है।
है रास्ता जिंदगी, मेरी मंजिल 🚌 नहीं है।।
अब कुछ भी 🎪 हो,
मुझे क्या फर्क पड़ता है।
फूलो 💐 को झड़ना ही है,
दिन को 🌝 को ढलना ही है।।
अब बचाना है तो
कुछ और 🌹 मैं बचाऊँगा ।
इन बची-खुची हुई
लम्हों 🌄 को मैं सजाऊँगा।।
जिंदगी को कल
नये 🌅 सिरे से जीना है।
फिर भी आज को मैं
बेहतरीन 🎭 बनाऊंगा।।
-AnAlone Krishna.
24+25/12/2017
Merry Christmas. Wish you'll enjoy last days of this year. And wish for your very very happy last week of this year.

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