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"Life की परछाई: Chapter 4Chapter 5Chapter 6Chapter 7 • Chapter 8 • Chapter 9" has published on 8th August, 2025. अगर आपको online reading में असुविधा होती है, और आप इसे printed form में पढ़ना चाहते हो, तो post के bottom में दिए 'Download and Print' button को click करके आप उसका printout करवा लेना। जिसमें 'Download and Print' button नहीं है उसके लिए आप 'Google form' को भरकर मुझे send कर दो, मैं आपको pdf भेज दूंगा। इसके अलावा सबसे अंत में UPI QR code भी लगा हुआ है, अगर आप मेरे काम को अपने इक्षा के अनुरूप राशि भेंट करके सराहना चाहते हो तो, आप उसे scan करके मुझे राशि भेंट कर सकते हो। जो आप वस्तु भेंट करोगे, वो शायद रखा रह जाए, परंतु राशि को मैं अपने जरूरत के अनुसार खर्च कर सकता हूँ। ध्यानवाद !
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Day 3 | Diary of AnAlone Krishna

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_____Day 3_____

मैं शाम को market में कुछ सामान ख़रीदने गया हुआ था। वहाँ मुझे वो मिली, मेरी बचपन की बहुत ही अच्छी दोस्त। काफ़ी वक़्त बीत गया था, हमारे रास्ते अलग हुए। school के बाद मैं कहीं और था और वो कहीं और। मेरे रास्ते अलग थें और उसके रास्ते अलग। मेरी मंजिल कुछ और थी और उसकी मंजिल कुछ और। हमारा मिलना महज एक इत्तेफ़ाक़ था। पर जब मिले, तो अपने पुराने दोस्त को यूँहीं अनदेखा तो नहीं ही कर सकते थे। इसलिए क़िस्मत से दोबारा मिले उस वक़्त में हम एक दूसरे के हाल-चाल पूछने लगे। market से साथ में ख़रीदारी करके घर साथ ही आने लगे। उसका घर मेरे घर से पहले था, तो उसको घर तक छोड़ते हुए। वह छुट्टी में घर आई हुई थी और अगले दिन वापस जाने वाले थी। उसके घर पहुँचने पर उसके पिताजी घर के बाहर ही मिले।
वह उसको बोले, "क्या क्या ले जाना है, सब सामान खरीद ली छोटी ?"
वह बोली, "हाँ।"
वह फिर बोले, "हम चाहते थे कि कुछ दिन और रुक जाती।"
वह बोली, "नहीं। बहुत यहाँ वक़्त बर्बाद कर लिए। अब और नहीं।"
वह मुझे जानते थे। इसलिए मुझसे बोले, "तुम इसका अच्छा दोस्त है कृष्ण। तुम समझाओ ना कुछ दिन और रुक जाने के लिए।"
जब कोई अपने से बड़े आपसे कुछ request करे, तो किसका मदद करने का मन नहीं करता है भला !🤷🏻‍♂️ वह मेरे आँखों में देखी और पलट कर जाने लगी। मुझसे रहा नहीं गया, पता नहीं उस समय मुझे क्या हुआ, मैं अपने instant action में आगे बढ़ कर उसका हाँथ पकड़ लिया और normally ही बोला, "तुम्हारा father बोल रहे है तो कुछ दिन और रुक जाओ..."
वह भड़क गई और झटके से मेरा हाँथ छुड़ाते हुए बोली, "तुम कौन होता है, मेरे और मेरे family के बीच में बोलने वाला ?😠
Sock लगा ? मुझे जोर का लगा। और फिर मेरी नींद खुल गई। मैं अपने dream से निकलकर reality में आ गया। ऊपर जितनी बातें हैं, सब महज़ एक ख़्वाब था, जो कि मैं अपने नींद में देख रहा था। उससे निकलकर इस वास्तविक संसार में आने पर मैंने महसूस किया कि मेरी धड़कने तेज हो गई है। हाँ, यह बात सच थी कि वह मेरे school के दिनों के सुनहरे पलों की खूबसूरत हिस्सा थी और इसलिए मैं उसे miss भी बहुत किया करता था। पर उसके नाराजगी का कारण...? कुछ तो ऐसा था जो मुझे अहसास हो रहा था कि मैंने ऐसा कुछ किया है अपने past में जिसके चलते शायद वह मुझसे नाराज है। क्योंकि इस सपने के कुछ दिन पहले उसकी सबसे करीबी सहेलियों ने मुझसे उसका contact no. माँगा था और मैं उनकी मदद करने के लिए सीधा उसके father को उसका no. पूछ दिया था। बाद में उसकी सहेलियों ने बताया कि उनका बात हो गया। पर मेरे उस दोस्त को मुझसे शायद इतनी नाराजगी थी कि वह मुझपे गुस्सा तक कर सके कि, "तुमको मेरे father से no. मांगने की जरूरत क्या थी ? तुम किसी और से भी तो माँग सकता था..." 😡 उसने मुझसे कभी contact नहीं किया।
सपने यूँही नही आते। हमारे consciousness mind जो नही सोंच सकता, जो नहीं समझ पाता; हमारा unconsciousness mind को उनका अहसास होता है। जो यादें हम भूल जाते हैं, उसे उसका भी अहसास होता है। फिर जो बातें हमें अंदर ही अंदर किसी चीज की कमी का अहसास दिलाते हैं, जिनसे हम डरते हैं, उन्हें accept करने से, हमारा unconsciousness mind हमें उनका अहसास करवाता है, कई बार सपनो के जरिए। कई बातें हैं जो मैं भूल जाता हूँ। पर कुछ बातें ऐसी भी है जो मैं चाह कर भी भूल नही पाता। हर पल उनका अहसास होता रहता है। मैंने क्या गलती की थी, वह मुझे बाद में पता चल गया। coincidence से एक दिन वह मुझे reality में मिली, तब मुझे पता चला। मैंने उसपर हाँथ उठाया था। उसे थप्पड़ मारा, फिर उसे sorry भी नही कहा, और तो और मैं फिर कभी उसे मनाने भी नही गया। मुझे यह कुछ भी याद नही था। पर उसने अगर मुझसे खुद कहा है तो झूठ तो नही ही कहा होगा। मुझे यह किस्सा याद नहीं था, यह अलग बात थी। पर मुझे जो अंदर regret महसूस हो रहा था उसके लिए भी वापस कभी sorry बोलकर मनाने नही गया।
शायद मैं वक़्त के साथ इतना कठोर हो चुका हूँ गलती का अहसास होने के बाद भी झुक नही पाता हूँ।

🙏 राधे - राधे 🙏

22nd November, 2019 A.D.

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