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_____Day 4_____
बात उस समय की है जब मैं खुद को उतने अच्छे से समझता नही था। यूँ कहे तो मैं खुद को उतने अच्छे से जानता नहीं था। मेरे मन में अपने आप को लेकर बहुत सारे contrast रहा करते थे। जैसे कि - मुझे जो इक्षा हो रही है, वह करना चाहिए कि नही करना चाहिए ; जो मैं feel कर रहा हूँ, उसे accept करूँ या महज यह एक illusion है; मैं इस बारे में बात किससे करूँ, कौन मुझे समझेगा, कौन मुझे सही राह दिखायेगा; मेरे लिए अभी क्या जरूरी है, कहीं मैं भटक तो नही रहा; ऐसे और भी अलग अलग समय में अलग अलग सवाल।
मैं अपना 12th का exam देने जब exam hall में बैठा हुआ था। एक लड़की मेरे बगल में बैठी हुई थी। अपने smiling face के साथ। जैसा कि मुझे हर किसी का smiling face attract करता है। मैं distract होने लगा। अब यह मेरी आदत हो गई है इसलिए अब इससे मुझे उतना फर्क नही पड़ता। मगर उस वक़्त मैं खुद को इतने अच्छे से समझता नही था ना। ना ही अपनी feelings को मैं accept कर पाता था। मेरा दिल कह रहा था कि वह मुझे देख कर मुस्कुरा रही है और मेरा मन कह रहा था कि ज्यादा feel करने की जरूरत नहीं है, उसका face cutting ही वैसी है। मैंने अपना ध्यान सिर्फ आने paper पर concentrate करके exam तो दे दिया, लेकिन उस distraction के चक्कर में मुझे ऐसा महसूस हो रहा था कि इस distraction के कारण मेरा paper खराब जाने के डर के चलते मैंने जो time management किया, वह अगर नही होता तो मैं 10marks उस पेपर और score कर सकता था। वैसे result जब आया तो उस paper में मैंने 72 score किया और उसी को अपने graduation के लिए honors paper भी choose किया। वह पेपर था English का ।
खैर, उस distraction के वजह से मेरा दिमाग उस वक़्त सटका हुआ था। मुझे अंदर से गुस्सा भी आ रहा था, साथ ही मैं वह paper half hour पहले complete करके बैठ गया था इसलिए खुद पर हँसी भी आ रही थी। हँसी इसलिए कि जिसे मैं अभी तक distraction मान रहा था उसी के डर के वजह से मैंने अपना time management कुछ यूँ किया कि मैंने अपना paper half hour पहले complete करके बैठ गया। और गुस्सा इसलिए कि उस half hour को use करके मैं अपना paper और भी अच्छे से दे सकता था जिससे मैं और 10marks ज्यादा score कर सकता था। मेरे अंदर उसका नाम जानने की इक्षा हुई। अब आते है कई excuses. अगर सबके सामने उसका नाम पूछा तो सब कैसा reaction देंगे - कभी किसी को भाव ना देने वाला कृष्ण किसी को लेकर interest दिखा रहा है; अगर करीबी दोस्तों से कोने में जाकर पूछूंगा या पता करने बोलूँगा तो वह मुझे छेड़ना शुरू कर देंगे जिससे सबको पता चल जाएगा और फिर से वही सब होगा; अगर मैं उससे direct पूछूँ, और सच में उसका face cutting ही वैसा रहा और मुझे भाव नही दी तो...
; फिर आया सबसे बड़ा सवाल - क्या मुझमें हिम्मत नही है कि किसी लड़की को face कर सकूँ और उससे बात कर सकूँ, उसका नाम पूछ सकूँ...? बस, इसके बाद तो पहले के सारे सवाल side हो गए। मुझे उसके सामने जाना है और उससे उसका नाम पूछना है। बस और कुछ नही सोंचना है। मैं half hour पहले paper complete करके बैठा हुआ था, पर submit किया तब, जब वह अपना paper submit करके निकली। मैं सामने गया उसके, वह अपनी सहेलियों के साथ paper कैसा गया यह discuss कर रही थी और सामने जाकर बोला, "मुझे तुमसे कुछ बात करनी है।"
वह बोली, "हाँ, बोलो।"
मैंने पूछा, "तुम्हारा नाम क्या है ?"
वह एकदम प्यार से पूछी, "तुम मेरा नाम पूछ क्यूँ रहे हो
? क्या करोगे जानकर ?"
साला, मेरा दिमाग सटक गया। यार, क्या बोलता ? तुमसे प्यार करता हूँ, तुम्हें बहुत like करता हूँ, तुमसे दोस्ती करना चाहता हूँ... जबकि वैसा कुछ था भी नहीं। बस मुझे नाम जानने का मन किया, तो जाके पूछ दिया। मैंने अपने अंदर के uncomfortableness को अंदर दबाकर कहा, "बस ऐसे ही।"
उसने नखरा करने के अंदाज के साथ कहा, "ऐसे ही..? तब नही बताएंगे।"
यार, नाम नहीं बताना है तो सीधा सीधी मना कर दो। ऐसे प्यार दिखाने की क्या जरूरत है ?
मेरा गुस्सा नाक पे आ गया। फिर जैसा कि सभी लोग करते हैं, मैंने भी अपना face left side turn किया। देखा कि मेरे friends आ रहा हैं। मैंने अपना माथा झुकाया, खुद पे हँसा, "बेटा इससे पहले कि उनकी नजर तुमपर पड़े, तू कट ले। नहीं तो आज तेरे इज्जत की धज्जियाँ उड़ जाएगा।"
मैंने उससे कहा, "ठीक है, कोई बात नहीं।" और वहां से तुरंत निकल लिया।
ख़ैर, यह मेरा बीता हुआ कल था। मेरा आज नहीं। अब मेरे दिल और दिमाग में इतना contrast नही होता। अब जो भी feel होता है, accept करता हूँ, और express करता हूँ। अपने concepts हमेशा clear रखता हूँ। पर लोगों की तो आदत ही होती है, जितना जानते है, सुनते हैं, वह उससे कुछ ज्यादा ही समझ लेते हैं। इसलिए जब वह मुझे सुनते है तो कुछ और ही समझ लेते हैं, और फिर कहते हैं की मेरे कथनी और करनी में बहुत फर्क होता है। जबकि वह अगर अपने दिल से पूछे तो उन्हें महसूस होगा कि जो मैंने कहा वही मैंने किया। जो उन्होंने मेरे बात का मतलब समझा, हाँ, वो शायद मैंने जरूर नहीं किया।
23rd November, 2019 A.D.
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