I, Krishna, present you here, my 100+ literary works—poems and stories. I hope, I shall plunder your heart by these. Let you dive into my imaginary world. I request you humbly to give your precious reviews/comments on what you read and please share it with your loved ones to support my works.

🙏🏽 Thanks...! 🙏🏿

What's new/special message for the readers...👇🏿

"Life की परछाई: Chapter 4Chapter 5Chapter 6Chapter 7 • Chapter 8 • Chapter 9" has published on 8th August, 2025. अगर आपको online reading में असुविधा होती है, और आप इसे printed form में पढ़ना चाहते हो, तो post के bottom में दिए 'Download and Print' button को click करके आप उसका printout करवा लेना। जिसमें 'Download and Print' button नहीं है उसके लिए आप 'Google form' को भरकर मुझे send कर दो, मैं आपको pdf भेज दूंगा। इसके अलावा सबसे अंत में UPI QR code भी लगा हुआ है, अगर आप मेरे काम को अपने इक्षा के अनुरूप राशि भेंट करके सराहना चाहते हो तो, आप उसे scan करके मुझे राशि भेंट कर सकते हो। जो आप वस्तु भेंट करोगे, वो शायद रखा रह जाए, परंतु राशि को मैं अपने जरूरत के अनुसार खर्च कर सकता हूँ। ध्यानवाद !
Specials
-------------------->Loading Special Works...
📰 Random, Popular, Featured Posts
Loading...

Day 2 | Diary of AnAlone Krishna

 _____Day 2_____


जब मैं अपने अतीत को पीछे मुड़ कर देखता हूं, हर बार मेरे वो बीते लम्हें मुझे यह अहसास दिलाते है कि मैं पहले क्या था और अब क्या हूं, और क्यूं हूं। इससे कुछ हो चाहे ना हो, मगर एक चीज तो जरूर हो जाता है - मेरा motive क्या था मेरा वैसा होने का जैसा मैं अभी हूं, यह याद आ जाता है। इसलिए जब भी कोई मुझे यह बोलता है कि मुझे सुधरना चाहिए, मैं सबसे पहले ऐसा होने का motive याद करता हूं। फिर उनपें अंदर ही अंदर मुस्कुराता हूं। क्यूंकि वह यह नहीं जानते कि जिन्हें वह मेरा बिगड़ना सोच रहे है वह तो मेरा ढलना है खुद को सुधारे रखने के लिए।
जब मैं पढ़ाई continue करने के लिए 10th के बाद घर से बाहर यहां हजारीबाग आ रहा था, तब मेरी मां ने मुझसे कहा था, "देखो, दोस्ती तक तो कोई बात नहीं, लेकिन कभी इससे आगे बढ़ना नहीं। कभी किसी को ऐसे सपने मत दिखना, ऐसे वादें मत करना, जिन्हें तुम आगे निभा ना सको।" मैं उनका indirect message समझ गया। इसलिए उस समय खुद के personality को ऐसा बनाया हुआ था कि मै किसी भी लड़की को कभी भाव नहीं देता था। चाहे उसके पास खूबसूरती हो, talent हो, goodness हो, कुछ भी। मैं कभी भी किसी भी लड़की को भाव नहीं देता था। उस वक़्त मेरा एक दोस्त था। बहुत अच्छा दोस्त था। वह एक लड़की को लेकर बहुत नरमदिली दिखाता था। वह हमेशा यह बात को लेकर सोचता था कि मै कैसा लड़का हूं जो किसी भी लड़की को भाव नहीं देता। जहां कितने लड़के यह सोचते हैं कि उनकी कोई हो, उन्हें कोई भाव दे। मुझे लड़कियों से भाव मिलता था फिर भी मैं किसी को कोई भाव नहीं देता था। यहां तक कि वैसी लड़की जिसके पीछे पूरा class मर रहा हो, और वह प्यार से बात करे, उसे भी मैं भाव नहीं देता था। वह मुझे बाकियों के सामने मेरे character को लेकर भी काफी बार मजाक बनाया। पर मैंने उसे भी ignore किया। मुझे ऐसी चीज़ों से कोई फर्क ही नहीं पड़ता था। फिर शुरू हुआ उसका emotional अत्याचार।
"यार वह तुमसे प्यार से बात करने की कोशिश करती है पर तुम उसे भाव नहीं देता। तुम्हें कुछ महसूस नहीं होता जब किसी का दिल ऐसे तोड़ते हो? वह तुम्हें हमेशा तिरछी नजरो से देखती रहती है, तुम्हे कुछ फर्क नहीं पड़ता ? कि बात करें कि आखिर क्यूं वह तुम्हें देखती रहती है। तुम उसे भाव नहीं देता इसलिए वह तुम्हें ऐसे घूरती रहती है जैसे कि तुम्हें वह खा जाएगी। तुम उसे भाव नहीं देता, वह कभी मुस्कुराती नहीं है। हमेशा उदास रहती है।"
एक समय आया जब मुझे भी feel होने लगा कि यार इस कदर किसी को ignore करके hurt Karna अच्छा नहीं है। पर मैं करूं तो आखिर क्या करूं। मां को promise Karke Aaya tha ki खुद पे control रखूंगा। फिर भी धीरे - धीरे मैं बदलने लगा। मुझे emotions महसूस होने लगा। एक समय आया जब मुझसे मेरा limit tut Gaya. मैंने अपने इस दोस्त से कहां, "यार, मुझे ऐसा लग रहा है कि मुझे उससे बात करनी चाहिए। मुझे लग रहा है कि मुझे feel ho Raha hai. मुझे उसके close जाने का मन कर रहा है। उससे दोस्ती करने का मन कर रहा है।" इसपर वह नफरत वाला चेहरा बनाकर आंखे बड़ी किए हुए मुझसे बोला, "तोह.., इसमें मैं क्या करूं !"😡😏
उस समय जो मुझे महसूस हुआ ना, एक चीज तो मैं सीख गया - दिल टूटने के लिए किसी से इश्क करने की जरूरत नहीं है। किसी को सच्चा दोस्त मानकर देख लो, समय आने पर वही से वह experience mil जाएगा।
मेरी मां ने जब मुझे सलाह दिया था किसी को अपने दिल के close Nahi लाने के लिए तब मैंने उनसे पूछा था, "मम्मी, क्या आपको ऐसा लगता है कि मुझे कोई भी बहकाएगी और मैं बहक जाऊंगा ?" तो उन्होंने मुझसे कहा था कि वह मुझे अच्छे से जानती है, मैं किसी के भी बहकावे में आ सकता हूं। इसलिए उन्होंने मुझे खुद पर control रखने की सलाह दिया थी।
इसके बाद एक चीज तो clearly समझ गए थे। इस दुनिया में लोग सच्ची मोहब्बत ढूंढ़ते है, मैंने सिर्फ सच्चा दोस्त की चाहत की थी, जो कि उसे भी नसीब में पाना, इतना आसान नहीं होता। उसका गुस्सा, उसकी नफरत मुझे एक बात तो बता दी - वह मेरे जरिए उसके close जाना चाहता था। वो साला फट्टू, मेरे straight forward nature Ka फायदा उठाकर अपना काम बनाना चाहता था। वह एक बार सीधा जुबान से साफ साफ बोल सकता था, लेकिन वह मेरे सामने तक अपने दिल की बात नहीं रख पाया। मैं, उसे अच्छा दोस्त मानता था, और वह मुझ पर भरोसा नहीं कर पाया। दिल को चुभा बहुत, यह जान कर नहीं कि जिस लड़की के लिए मैं feel Kar Raha hoon Mera dost bhi use चाहता है, बल्कि यह जानकर कि वह मुझसे पहले से उसे चाहता है, मुझे जरिया बनाया लेकिन मुझ पर यह भरोसा तक नहीं कर पाया कि मुझे खुलकर अपने दिल की बात बता सके। उस दिन मेरा भरोसा टूटा था यह जानकर कि मेरे ऊपर भरोसा नहीं है उस शख्स को जिसपर मैं भरोसा करता हूं। इसलिए मैंने छोड़ दिया। Past me पीछे, उस दोस्त को, जिसको मुझ पर भरोसा नहीं था।
लोगों के नजर में शायद मैं गलत होऊंगा। मैंने किसी लड़की के लिए अपने दोस्त को छोड़ दिया। पर इस लड़की ने मेरे दिल में feeling Nahi जगाया था, वह मेरे इस दोस्त की बातों ने किया था। उस लड़की ने मुझे नहीं रिझाया था, इस दोस्त ने मुझे बहकाया था। इसलिए मेरे नजर में उस लड़की की कोई गलती नहीं थी। Problem ki jad to Mera yah dost tha. Iske baad Maine kuchh din khud SE notice Kiya us ladki ko. waisi koi baat hi Nahi thi jaisa mere dost ne mujhe bataaya tha. Wah bas Mujhe Dekh Raha tha ki Mai Kitna khud par control रखता हूं। या मैं खुद को सरीफ दिखाने का ढोंग करता हूं। और उस moment ko Maine ध्यान लगाकर याद किया। वह मुझ पर अंदर ही अंदर हंस रहा था। की मैं कितना खुद पर control Kar Sakta hun, yah दिख गया। और मुझे भी दिख गया कि भरोसा हर वो इंसान तोड़ सकता है जिसे मैं अपने दिल के करीब लाऊं और जो मुझे समझता ना हो। चाहे वह कोई लड़का ही क्यूं ना हो।
इसलिए मैंने खुद पर बदलाव लाने का decision लिया। कि मैं बाकियों की तरह दोस्ती करने से नहीं डरूंगा। बल्कि सभी से दोस्ती करूंगा। चाहे वह लड़का हो या लड़की हो। जो भी मुझे पसंद करे, मुझसे दोस्ती करना चाहे, मैं उनसे दोस्ती कर लूंगा। सब कहते हैं समय आने पर दोस्त ही काम देता है, लड़कियां धोखा देती है। पर मेरे life me to yah Nahi hua. Mera dost Mera कमजोरी बना, और मेरी मां का suggestion ne Mujhe बचाया। जो कि खुद एक लड़की थी। इसलिए मेरा perspective badal Gaya - लड़कियों की maturity लडको की तुलना में ज्यादा अच्छी होती है।
और अब.., एक से अच्छी दोस्ती देखकर दूसरे जलते है। दूसरे से अच्छी दोस्ती देखकर तीसरे जलते हैं। अब तो यही सिलसिला है।
बिगड़ा मैं नहीं हूं। मैं बस बदल गया हूं। पहले से बेहतर। काफी बेहतर। क्यूंकि अब सबको अहमियत देता हूं। सिर्फ किसी एक कि नहीं सुनता। सबको सुनता हूं और सिर्फ खुद की करता हूं। सिर्फ और सिर्फ खुद की।

🙏 राधे - राधे 🙏

-AnAlone Krishna.
17th November, 2019 A.D.

0 Comments

I am glad to read your precious responses or reviews. Please share this post to your loved ones with sharing your critical comment for appreciating or promoting my literary works. Also tag me @an.alone.krishna in any social media to collab.
Thanks again. 🙏🏻

Newer Post Older Post
WhatsApp Logo
```