Story 1.1
+++++++वैसे तो मेरे अंदर कई बुरी आदतें हैं, पर आज मैं उनमें से सिर्फ तीन बुरी आदतों के मजेदार किस्से को बताने जा रहा हूं। आपके लिए यह मजेदार लगे या ना लगे, पर मुझे तो ऐसी एहसासों से बहुत मजा आता है।
पहली है ख्वाहिशें करना, दूसरी सपने देखना और तीसरी भूलना। अब आप सोंचोगे कि इन्हें ैमं एक साथ क्यूं बता रहा हूं। ये तीनों एक दूसरे से related होते हैं। जब भी हम किसी चीज की ख्वाहिश करते है, हम उसके बारे में बार बार सोंचने लगते हैं। इससे हमारे consciousness mind me लगातार हो रहे informations हमारे unconsciousness mind me जगह बनाने लगते हैं। जिसके कारण हमारे desires हमारे dream बनने लगते हैं और हम उससे जुड़े सपनों को देखने लगते हैं। या फिर जो हम जाने अंजाने में अपना सपना बना लेते है या बन जाते हैं, हम उसी की ख्वाहिश करते है। या फिर उसी को पाने की राह में आगे बढ़ने लगते हैं। अब कई बार ऐसा होता है कि जब हम किसी चीज की ख्वाहिश करते हैं और उसे पाने की कोशिश करने लगते है, हम वजह भूल जाते हैं कि आखिर हमने उस चीज की ख्वाहिश क्यूं की है। इसे कहते है, रास्ते से भटक जाना। अब आप बोलोगे कि यह भटकना कैसे हुआ, भले वजह भूल गए पर हम अभी भी तो मंजिल के राह में ही हैं और एक ना एक दिन उसे पा ही लेंगे। तो मैं पूछूंगा कि, "फिर पाने के बाद क्या ?" किसी चीज को पाने का मकसद अगर ख़त्म हो जाए तो फिर उसे पाने के बाद इसे पाने का मजा नहीं आता। इसलिए उसे पाना ना पाना दोनों बराबर ही होता है। इसलिए जिन्दगी को भी जीने की कम से कम एक वजह दो, ताकि जिस वक़्त अपनी आखरी सांसें गि न रहे होगे तो अपनी जिंदगी को बेकार तो नहीं कहोगे।
अब मैं अपने सपने पे आता हूं। सपने हमेशा याद कहां रहते हैं मुझे, इसलिए यह थोडीा अजीब भी लग सकता है।
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