I, Krishna, present you here, my 100+ literary works—poems and stories. I hope, I shall plunder your heart by these. Let you dive into my imaginary world. I request you humbly to give your precious reviews/comments on what you read and please share it with your loved ones to support my works.

🙏🏽 Thanks...! 🙏🏿

What's new/special message for the readers...👇🏿

"Life की परछाई: Chapter 4Chapter 5Chapter 6Chapter 7 • Chapter 8 • Chapter 9" has published on 8th August, 2025. अगर आपको online reading में असुविधा होती है, और आप इसे printed form में पढ़ना चाहते हो, तो post के bottom में दिए 'Download and Print' button को click करके आप उसका printout करवा लेना। जिसमें 'Download and Print' button नहीं है उसके लिए आप 'Google form' को भरकर मुझे send कर दो, मैं आपको pdf भेज दूंगा। इसके अलावा सबसे अंत में UPI QR code भी लगा हुआ है, अगर आप मेरे काम को अपने इक्षा के अनुरूप राशि भेंट करके सराहना चाहते हो तो, आप उसे scan करके मुझे राशि भेंट कर सकते हो। जो आप वस्तु भेंट करोगे, वो शायद रखा रह जाए, परंतु राशि को मैं अपने जरूरत के अनुसार खर्च कर सकता हूँ। ध्यानवाद !
Specials
-------------------->Loading Special Works...
📰 Random, Popular, Featured Posts
Loading...

Story 1.1 | Diary of AnAlone Krishna

 Story 1.1

+++++++
वैसे तो मेरे अंदर कई बुरी आदतें हैं, पर आज मैं उनमें से सिर्फ तीन बुरी आदतों के मजेदार किस्से को बताने जा रहा हूं। आपके लिए यह मजेदार लगे या ना लगे, पर मुझे तो ऐसी एहसासों से बहुत मजा आता है।
पहली है ख्वाहिशें करना, दूसरी सपने देखना और तीसरी भूलना। अब आप सोंचोगे कि इन्हें ैमं एक साथ क्यूं बता रहा हूं। ये तीनों एक दूसरे से related होते हैं। जब भी हम किसी चीज की ख्वाहिश करते है, हम उसके बारे में बार बार सोंचने लगते हैं। इससे हमारे consciousness mind me लगातार हो रहे informations हमारे unconsciousness mind me जगह बनाने लगते हैं। जिसके कारण हमारे desires हमारे dream बनने लगते हैं और हम उससे जुड़े सपनों को देखने लगते हैं। या फिर जो हम जाने अंजाने में अपना सपना बना लेते है या बन जाते हैं, हम उसी की ख्वाहिश करते है। या फिर उसी को पाने की राह में आगे बढ़ने लगते हैं। अब कई बार ऐसा होता है कि जब हम किसी चीज की ख्वाहिश करते हैं और उसे पाने की कोशिश करने लगते है, हम वजह भूल जाते हैं कि आखिर हमने उस चीज की ख्वाहिश क्यूं की है। इसे कहते है, रास्ते से भटक जाना। अब आप बोलोगे कि यह भटकना कैसे हुआ, भले वजह भूल गए पर हम अभी भी तो मंजिल के राह में ही हैं और एक ना एक दिन उसे पा ही लेंगे। तो मैं पूछूंगा कि, "फिर पाने के बाद क्या ?" किसी चीज को पाने का मकसद अगर ख़त्म हो जाए तो फिर उसे पाने के बाद इसे पाने का मजा नहीं आता। इसलिए उसे पाना ना पाना दोनों बराबर ही होता है। इसलिए जिन्दगी को भी जीने की कम से कम एक वजह दो, ताकि जिस वक़्त अपनी आखरी सांसें गि न रहे होगे तो अपनी जिंदगी को बेकार तो नहीं कहोगे।

अब मैं अपने सपने पे आता हूं। सपने हमेशा याद कहां रहते हैं मुझे, इसलिए यह थोडीा अजीब भी लग सकता है।

Next post👇 https://krishnakunal.blogspot.com/2019/11/day-1-diary-of-analone-krishna_16.html
Ko click karo 👆 😉

0 Comments

I am glad to read your precious responses or reviews. Please share this post to your loved ones with sharing your critical comment for appreciating or promoting my literary works. Also tag me @an.alone.krishna in any social media to collab.
Thanks again. 🙏🏻

Newer Post Older Post
WhatsApp Logo
```