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.पेड़ के पत्ते झड़ रहे हैं , पर फिर भी नीचे बैठा हुआ संत है ।
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सोच रहा है मन ही मन , कि यह नई शुरूआत है या अंत है ?
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-AnAlone Krishna
07/09/2015
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."अगर मेरी यह रचना सच में आपके दिल को भायी है तो मैं यह उम्मीद करूँगा/करूँगी कि आप WhatsApp, Facebook, Instagram, etc. social media में अपने दोस्तों तथा संबंधियों के बीच मेरे इस कार्य पर अपना precious comment (review, response, critique, experience,...) के साथ इसे जरूर share करेंगे।
धन्यवाद..! 🙏"
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