मुझसे मेरे friends अक्सर यह बात पूछते रहते थे कि, "तुम शादी कब करोगे कृष्ण?"
और मैं कभी तंग आकर उनसे यह कह देता था कि, "तुम अपनी बात करो ना कि तुम कब करोगे। तुम मेरे पीछे क्यों पड़े हो?"
तब वो मुझसे यह पूछते थे कि, "तुम क्या कहते हो कृष्ण, क्या मुझे शादी कर लेनी चाहिए?"
मैंने उस वक्त उनसे कहा था कि, "Age तो हो ही गया है, कर लो।"
आज मुझसे मेरे तीन दोस्त मुँह पर बोले, "अगर तुम नहीं बोलता ना कृष्ण, मेरी शादी ना हुई होती।"
आज...
आज वो पछताते हैं।
जबकि मैं उनसे यह बात कभी जरूर कहा होऊंगा कि, "तुम किसी के लिए कितना कुछ करना चाहते हो, क्या-क्या promise किए हो जो पूरा करना चाहते हो, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। सामने खड़ा इंसान तभी खुश रह सकता है जब उसे हर situation में जीना आता हो। अगर वो हर चीज में खामी ही निकालेगा तो हमेशा दुःखी ही रहेगा, जिससे तुम भी दुखी ही रहोगे। और इस चीज को बिना किसी के साथ time spend किए तुम कैसे जान सकते हो?"
पर वो इस बात पर ध्यान नहीं दिए। सिर्फ इसपर ध्यान दिए कि, "हमारी age हो गई है, तो हम शादी कर सकते हैं।"
और आज शादी करके वो दुःखी हैं।
मैं किसी दिन उन्हें यह भी जरूर कहा होऊंगा कि,
"तुम्हारा life, तुम्हारी family, तुम्हारी partner को मैं नहीं जानता हूँ। वो तुम उन्हें सबसे बेहतर जानते हो। मैं जो फैसले लूँगा, वो मेरे life के लिए होंगे। वो तुम्हारे life में applicable नहीं होंगे। मैं तुम्हारे life के लिए फैसले नहीं ले सकता हूँ। वो तुम्हें खुद लेना होगा। क्योंकि यह हक मेरे पास नहीं है और मेरे पास होना भी नहीं चाहिए।"
फिर भी बार-बार वो मुझसे एक ही सवाल पूछते थे, ताकि मैं जो अपने life में step लूं, वो भी वही ले।
ठीक वैसे ही जैसे पूरी जिंदगी वो मुझसे notebook माँगकर homework और assignments के answers छापते रहे हैं। और जिंदगी में मेरी नकल करके आज झेल रहे हैं।
अपनी जिंदगी के फैसले खुद से लेना सीखो। यहाँ मंदबुद्धि बने रहकर जीना बहुत मुश्किल है।
किसी को यह मत देखो कि वो क्या कर रहा है, और फिर तुम भी वही करोगे। जो तुम्हें जरूरी लगे, तुम अपने life के according decisions लो।
मेरी life और तुम्हारी life same नहीं है।

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