बताओ, किसने किसको पकड़ रखा है ? कौन किसे control कर रहा है ?
मुझे जो चीज कभी भी पसंद नहीं आया, वो है कि कोई मुझे control करने की कोशिश करे। कोई मुझे अपना राय दे सकते हैं, मैं उन्हें सुनुँगा, पर मुझसे यह उम्मीद करना कि मैं उनकी बात हमेशा मानूंगा ही, यह मुझे control करने की कोशिश है। जो लोग मेरे सामने यह बोलते हैं कि - "मेरे पापा ये बोलते हैं", "मेरे भैया का कहना ये है", "मेरे uncle बोलते हैं कि...", "मेरे जीजा जी ये बोल रहे थे", मुझे ऐसे लोग बिल्कुल भी पसंद नहीं आते जिनकी खुद की अपनी कोई individual सोच नहीं है। जाहिर सी बात है कि उनका मानना, ज्ञान, उनके खुद के अनुभव से नहीं है। वैसे लोग, जो खुद आजाद नहीं है, मैं अगर उनके साथ रहूंगा तो उन्हें control करने वाले उनके साथ-साथ मुझे भी control करने की कोशिश करेंगे।
जब मैं अपने juniors को guide करना शुरू किया, मैंने पाया कि मैं अंजाने में उन्हें control करने की कोशिश कर रहा हूँ। फिर मैं खुद को उनके फिक्र से बंधा हुआ पाया। अंत में मुझे यही सही लगा कि मैं खुद को उनकी फिक्र से आजाद कर दूँ, और उन्हें individully उनके हिसाब से जीने दूँ। इसी में हम दोनों मुक्त हो सकते थे, और अब है। और बात रहा दायित्व की तो मुझे बस खुद को ऐसा बनाना है कि अगर वो कभी गिरे, तो मैं उन्हें संभाल लूँ। वो स्वतंत्र रहे, और मुझपर निर्भर होकर किसी भी चीज के लिए मुझपर बोझ ना बने। क्योंकि अगर वो मुझपर निर्भर होंगे, तो वो स्वतंत्र रूप से अपना खुद का रास्ता नहीं चुन पाएंगे। उन्हें बार-बार अपनी निजी जरूरतों के लिए मेरे पास आना होगा।
-AnAlone Krishna
5th June, 2025 A.D.
#Individualism
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