● अब वो वक़्त नहीं है ●
(अपने अपनों की महत्वकांछाओं को पूरा करने के लिए अपनों से दूर रहने वालों के लाचारी को बयां करते हुए।)
-कृष्ण कुणाल के द्वारा लिखी गई कविता
• अब वो वक़्त नहीं है •
कभी तुमसे बातें अगर ना करता तो बैचैन रहता था मैं।
कभी तुम्हें याद नहीं करता तो रातें नहीं गुजरती थी मेरी।
कभी तुम्हारी एक झलक मुस्कान के बिना
दिनभर मेरा बेचैनी में गुजरता था।
कभी तुमसे दूर होकर धड़कने सुनाई नहीं देती थी मुझे मेरी।
कुछ उलझा हुआ हूँ आजकल इस कदर अपनी जिंदगी में,
मुझे माफ़ करना।
कभी एक मौका नहीं छोड़ता था तुम्हारी कद्र करने को,
आजकल एक नज़र उठाकर देखने तक का वक़्त नहीं है॥
वो गालियाँ, वो यादें, वो रास्ते, वो बातें,
कुछ भी नहीं भूला हूँ, मुझे याद है वो आज भी।
वो ख़्वाब सारे जो हमनें कभी साथ देखे थे,
उन्हें आज भी पाने की कोशिश करता है यह दिल,
तुम्हारे अब साथ ना होने के बाद भी।
वक़्त, अब वो खाली वक़्त नहीं है मेरे पास अपनी जिंदगी में,
मुझे माफ़ करना।
कभी हर वक़्त रहना चाहता था दिल तुम्हारे साथ
आजकल एक तक लम्हां साथ बीतने तक का वक़्त नहीं है॥
• कभी अपनों पे अपने महत्वकांछाओं का इतना बोझ मत डालो कि उसे पूरे करने के लिए फिर उसके पास तुम्हारे पास तुम्हारे साथ रहने और तुम्हे प्यार करने के लिए ही वक़्त ना हो।
-AnAlone Krishna.
16th December, 2021 A.D.
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