__________Day 38__________
Q. Why do you wants to become a civil servant ?
Story:-
दो दिन पहले मैं अपने driving licence के काम से DTO office गया। सबसे पहले तो मुझे सही counter के बारे में जानने के लिए जहाँ मेरा काम हो पाए, मुझे पहले दो-तीन counter में भटकना पड़ा। फिर जाकर जब सही counter के बारे में पता चला तो वहाँ काफी भीड़ थी। कोई line से नहीं था। साथ ही जो किसी के साथ आए थे वो भी बेवज़ह counter के पास भीड़ लगाए हुए थे। खिड़की के अंदर से एक employee ने सभी के applications एक साथ लेकर भीड़ खाली करने को कहा और नाम पुकारे जाने पे सामने आने को कहा। पर जब मैं फिर भी counter से नहीं हटा तो मेरे बगल ना होने पे मुझे इसकी वजह पूछा। मैं अपना learninig licence recieve करने के लिए गया था और यह जानने के बाद उन्होंने मुझे इसे paper में लिख कर देने को कहा। फिर इसे लेने के बाद मुझे पीछे खड़े होकर कुछ देर wait करने को कहा। उसके बाद एक-एक करके सभी के application पे उनको सामने बुलाने लगा। पहले पहला, फिर दूसरा, फिर तीसरा,... and so on. वक़्त बीता, पहले 5 min., फिर 10min., फिर 15min., ऐसे ही करते-करते आधा घंटा बीत गया। मेरे बगल में खड़े कई लोग इससे irritate हो रहे थे कि उनका no. कब आएगा। उन्ही में से कुछ का जब no. आता तो काम के तरीके को ना समझ पाने के कारण और late करते। मुझे भी काफी इंतज़ार करना पड़ रहा था। साथ ही मेरे साथ खड़े कई और लोगों को भी। उनमें से कोई ऐसे person भी थे जो बातों से weathy लग रहे थे और अपने बेटे के driving licence बनवाने के लिए उसे अपने साथ लाये थे। शायद उनके लिए उनके एक-एक बीतता हुआ वक़्त काफी कीमती था। इसलिए वह अपने बेटे को समझा रहे थे कि "देखो, ऐसे किसी भी अधिकारी के पास जाओ तो कितना wait करना पड़ता है। इसलिए मेहनत करो और इनसे ऊपर का अधिकारी बनो। ताकि इन्हें तुमसे मिलने के लिए wait करना पड़े।"
मतलब मुझे किसी सरकारी दफ़्तर में अपने काम को करवाने के लिए काफ़ी मसक्कत करनी पड़ती है, इंतज़ार करना पड़ता है, समय लगता है इसलिए मैं एक उच्च अधिकारी बनकर उन निम्न वर्ग के कर्मचारियों को सबक सिखाना चाहता हूँ। बजाय इसके कि मैं जिस तरह अपने वक़्त को अहमियत देता हूँ, ठीक उसी तरह वहाँ खड़े बाकी लोगों के भी वक़्त की अहमियत को समझूँ और इस बात को समझूँ कि जब आप एक सरकारी दफ़्तर में जाते हो तो एक आम नागरिक के हैसियत से जाते हो, चाहे आप अपने-आप मे कोई बड़े light साहेब हो आपको बाकी व्यक्तियों की तरह समान व्यवहार किया जाएगा। इसलिए patience के साथ अपनी बारी आने का इंतज़ार करें। देखिए, इस तरह आप अपने बच्चें को motivate करके जिंदगी में सफल तो बना दोगे पर आप उसे उस सफलता के लायक नहीं बना पाओगे। इससे वह एक उच्च अधिकारी बनने के बाद में जान-बूझकर अपना कसर पूरा करने लिए हर काम मे देरी करेगा। जिसे जूझकर फिर कोई इसी motivation के साथ आपसे भी उच्च पद को प्राप्त करना चाहेगा और यही चक्र चलता रहेगा।
तो सही सलाह यह है कि आप अपने साथ-साथ औरों के भी वक़्त के अहमियत को समझे और patience के साथ कार्यालय के कर्मचारी को सहूलियत के साथ उसे अपने तौर तरीके से काम करने दे और अपनी बारी आने का इंतज़ार करें। हाँ, इसके जगह आप यह सलाह दे सकते हो कि "बेटा मेहनत करो ताकि आप उस खिड़की के अंदर बैठ सको। ताकि आप अपनी समझ और सूझ-बूझ से अपने कार्यालय की कार्यप्रणाली को इतना सरल बना सको की लोगो को अपना काम करवाने में कम वक़्त लगे और आसानी से हो जाये, उन्हें ज्यादा परेशानी ना हो।
खैर, उसके बाद मेरा no. आया। पीछे से कोई और कर्मचारी उन्हें मेरा lerning licence थमाए। मतलब जब तक वह बाकियों के form लेकर उनका चालान काट रहा था, उसी बीच उसने मेरे द्वारा paper में note किये id no. को किसी और कर्मचारी को देकर उसे लाने के लिए भेज दिया था। उन्होंने मुझे बुलाया और मुझे मेरी learning licence दी। इसमें 1min का भी वक़्त नहीं लगा। देखा, तुरंत मेरा काम हो गया और ना ही मुझे कोई परेशानी हुई। मतलब आपके life की maximum परेशानियाँ आपकी मानसिकता की उपज होती है। आप अगर औरों की कार्य-प्रणाली को समझो, बाकियों के वक़्त की अहमियत को समझो, और अपने/सही वक़्त के आने का patience रखो तो आप बेकार में ऐसी छोटी-छोटी बात पे परेशान नहीं होगे।
24th December, 2021 A.D.
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