आज सुबह उठने से पहले जो सपना देखे, I wish कि आज के बाद फिर वैसा कोई सपना ना देखूँ-
लोग किसी का अंतिम विदाई का तैयारी कर रहे हैं। सबको एक दूसरे का मुँह देखते देख मैं कब्र खोदने लगा। खोदते-खोदते कब्र के just बगल में दो लाश का हाँथ निकला। जैसे कि एक के ऊपर एक को दफनाया गया हो। ना ही, गला हुआ, ना ही सुझा हुआ, और ना ही कोई smell. ऐसे healthy हाँथ जैसे कि जिन्दे इंसान की हो।
These things also happens in our great India. जात-पात, रीति-रिवाज, मान-मर्यादा, सभ्यता-संस्कृति, उच-नीच, ना जाने क्या-क्या वजह से कितनों की जान ले ली जाती है।
I wish, ऐसा भयावह सपना मैं फिर कभी ना देखूँ।
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