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Day 21: प्रेम-प्रसंग या गैर सामाजिक संबंध ? | Diary of AnAlone Krishna

 __________Day 21__________

प्रेम-प्रसंग या गैर सामाजिक संबंध:-

अभी 2 दिन पहले मेरे गाँव में किसी एक परिवार के सदस्य का किस्सा निकलकर सामने आया। नहीं, एक literature का student होने के नाते मैं किसी गैर-सामाजिक संबंध को प्रेम-प्रसंग बताकर पवित्र प्रेम को बदनाम तो नहीं करूँगा। प्रेम-प्रसंग में दोनों व्यक्ति की समान रूप से उनके द्वारा की गई गलती की एवं एक-दूसरे से साथ हमेशा रहने तथा देने की स्वीकृति होती है। परंतु गैर-सामाजिक संबंध में लोग गलती के लिए जिम्मेवार सामने वाले व्यक्ति पर डाल कर खुद को मासूम साबित करके खुद को बचाने में लगते हैं।
आमतौर पर लोग ऐसे मसलों को छुपाकर अपने समाज को दूसरों से श्रेष्ठ बताने में लगते हैं। मैं भी उनके पहचान को गोपनीय ही रखूँगा। परंतु मैं यह भी समझता हूँ कि ऐसे मसले सामने आने चाहिए, ताकि समाज के सदस्यों को असामाजिक होने और कर्म करने से पहले ही उन्हें सही मार्ग में लाया जा सके। जो कि समाज में कट्टरता और प्रतिबंध से नहीं बल्कि समुचित सामाजिक ज्ञान से ही मुमकिन है।
हमारे गाँव का एक 19 वर्ष का युवान किसी अन्य गाँव की 16 वर्ष की कन्या के साथ संबंध बनाने के लिए अपनी bike को 2 किसी अन्य युवाओं के साथ सड़क में खड़ी करके जंगल की ओर जा रहा था। गनीमत से हमारे गाँव के ही किसी वयस्क ने उसे जाते हुए देख लिया और सामने सबसे पहले गाँव के वासियों को सूचित कर दिया। जिन्हें आता देख bike साथी खड़े लड़के तो वहाँ से भाग गए। परंतु जंगल में गए वो दोनों युवान के साथ कन्या पकड़ी गई। उन्हें गाँव लाया गया और पंचायत बैठाई गई। पंचायत के सामने कन्या ने तो अपनी गलती स्वीकार कर ली और उसके साथ घर बसाने को भी तैयार हो गई। परंतु वह युवान उस कन्या को अपनी भावी अर्धांगी स्वीकार करने से मना कर दिया। वह यह बोल कर खुद को बचाने की कोशिश कर रहा था कि, "उसने वैसा कुछ नहीं किया है। इस बार गलती हो गई जो मिलने चला गया, आगे से ऐसा नहीं होगा।"
जिसपर सभा प्रमुख ने कहा कि, "आज किस्मत से तुम पकड़ा गया इसलिए बोल रहा है कि गलती हो गई, और आगे से नहीं होगा। अगर तुम नहीं पकड़ाता तो तुम इस लड़की का जिंदगी बर्बाद कर चुका था। हाँ, मैं वहाँ नहीं था इसलिए मुझे नहीं पता कि तुम क्या किया या नहीं किया। लेकिन अगर तुम अकेले मिलने गया मतलब तुम्हारा इसके साथ कुछ तो था। इसलिए अपनी गलती स्वीकार करो, और इसे अपनाओ।"
जिसपर उस युवान के पिता ने कहाँ कि, "जो इसे अपनाएगा वह खुद समझेगा। हम इसकी(लड़की की) जिम्मेदारी नहीं लेंगे।"
इसपर सभा में से पीछे से किसी ने कहा, "यह मत भूलिए कि आपके घर में भी एक जवान बेटी है।"
जिसपर युवान के पिता भड़क गए और बोले, "कौन बोला..?"
तब सभा प्रमुख बीच में बोले, "क्या कौन बोला..? समाज का आदमी बोला। समाज बोला।"
इसपर युवान के पिता मुँह लटकाकर बोले, "लड़की का बाप कुछ नहीं बोल रहा है और आपलोग बोल रहे हैं।"
इसपर पीछे से फिर उस अंजान व्यक्ति बोला, "लड़की का बाप वहाँ अकेले के बैठा तो क्या लगता है, उसको दबा दोगे ? समाज बोला, लड़की का भाई बोला।"
फिर से सभा प्रमुख समझाएं, "देखो कोई अलग करना नहीं चाहता। कोई तुम्हें कुछ नहीं करेगा। हम भी चाहते हैं कि लोगों का घर बसे। लेकिन लड़की नाबालिग है इसलिए हम जबरदस्ती तुम्हारा शादी करवा भी नही दे सकते। अपनी गलती को accept करो और स्वीकार करो कि तुम इससे शादी करेगा। आज करेगा या कल करेगा लेकिन तुम इससे शादी करेगा, उससे ज्यादा कुछ नहीं कहेंगे हमलोग।"
परंतु वह युवान नहीं माना। इसपर सभा प्रमुख लड़की के पिता को यह बोल कर सभा समाप्त किये कि, "देखिए हम जबरदस्ती तो कर नहीं सकते इनके साथ। अब आप स्वतंत्र है अपना अगला कदम लेने के लिए। अब आप जो चाहे कीजिए, case कीजिए, हम इनका साथ नहीं देंगे।"
और लड़की का पिता तुरंत जाकर case करने के लिए चला गया।
मैं यह बता दूँ कि अगर कोई व्यक्ति किसी नाबालिग लड़की के साथ शारीरिक संबंध बनाता है, चाहे उसमें लड़की की भी मर्जी हो, तब भी हमारे भारतीय कानून व्यवस्था के अनुसार section 375 एवं POCSO के तहत उसे rape माना जाता है और उसे सजा होती है। इसे आप अच्छे से समझ सकते हो इस 👇 youtube video से:-
एक तरफ मुझे इस बात की चिंता होती है कि आज के युवा वर्ग भटक कर असामाजिक कार्य को कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर खुशी भी होती है कि हमारे समाज के आदिवासीय समुदाय भी शिक्षा प्राप्त करके ऐसे उचित निर्णय ले पा रहे हैं। साथ ही यह सब देख सुन कर दोबारा उम्मीद भी जग गई कि समाज चाहे किसी का भी हो, वह गलत का साथ नहीं देगी। मैं बता दूँ कि हमारे गाँव के मुखियाँ एवं सभा प्रमुख आदिवासी हैं।
मैं मानता हूँ बढ़ती हुई उम्र के साथ हर युवा एवं युवतियों को सामाजिक, नैतिक, शारीरिक, आदि शिक्षा के साथ-साथ यौनिक-शिक्षा भी देना महत्वपुर्ण है। ताकि वह यह समझ सके कि जीवन में हर चीज को होने और करने के लिए सही समय और सही तरीका होता है, जिसके लिए समाज में विभिन्न व्यवस्थाएं की गई है। अतैव सभी को उन्हीं व्यवस्थाओं का पालन करते हुए ही अपने जीवन मे निर्णय एवं कदम लेने चाहिए। शायद इसलिए हमारे textbook में 7-8वीं कक्षा से ही यौन शिक्षा का पाठ जीव-जिज्ञान में शुरू हो जाता है।
पढ़ाई को marks से ज्यादा महत्व दें। समाज को बेहतर बनाएं।
धन्यवाद !

2nd November, 2020 A.D.

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