आज का ख्वाब
मैं एक पेड़ पर बैठा हूँ। दूर-दूर तक जहाँ तक नजर जा रहा है, पेड़ ही पेड़ है और कोई भी नहीं। ना कोई इंसान, ना कोई जानवर, ना ही कोई पंक्षि। कुछ देर बाद आखरी छोर में उठता हुआ धुँआ दिखा। वह वह धुँआ धीरे-धीरे बड़ा होने लगा और गर्म हवा बहने लगा। जब धुँआ सामने आकर मुझे छू कर पूछे निकला और धुँए के पीछे का नजारा दिखा। पीछे दूर-दूर तक भयानक आग लगी थी। मानो जैसे कि ये आग सबकुछ जलाकर ही शांत होगी।
ये ख़्वाब मुझे ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका में लगे आग की याद दिला दी।
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