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Day 79: Will take charge of our own social responsibility ? | Diary of AnAlone Krishna

 __________Day 79__________

Will take charge of our own social responsibility ?

हमारे life में कुछ बनने में जीतन हमारा परिवार और अपनो का योगदान होता है, उतना हमारे समाज की भी भूमिका होती है। आप सोच कर देखो कि वो resources जो आपके परिवार ने आपको लाकर दी, वो अगर आपके समाज में उपलब्ध ही नहीं होते तो क्या आप वो बन पाते जो आप आज हो ? वो सहपाठी जिनसे आप आगे निकलने के लिए मेहनत किए, अगर वो संघर्ष आपको मिला ही ना होता तो क्या आज आप वो होते जो आज आप हो ? आपके गुरु, आपके प्रतिद्वंदी, सभी का आपके कामयाबी में योगदान रहा है। पर क्योंकि सिर्फ कोई एक ही सबसे best हो सकता था तो समाज, विद्यालय, college, क्षेत्र,... में आप आगे हुए, कामयाबी आपको मिली, सब आपको मिला। आपने कभी सोचा कि आपकी कामयाबी के बाद आपके ऊपर मेहनत करने वाले teachers, और आपके साथ practice करने वाले आपके दोस्तों का क्या हुआ ? अगर आप उस जीत का श्रेय सिर्फ अपने पास रख रहे हो तो क्या मेहनत अपने सिर्फ अकेले की थी ? क्या आपके साथ compete करने वाले और आपके साथ practice करने वाले अगर आपके life में नहीं होता, आपको dedication के साथ training देने के चक्कर में आपके गुरु अपने loved ones को कम ध्यान नहीं दिए होते तो क्या तब भी आज आप वो बन पाते जो आप आज हो ? इसी चीज का अहसास है social awareness. अगर आप सब कुछ अपने तक सीमित कर लोगे तो फिर आपके जैसे किसी बच्चे को वैसे teachers and peer group मिल सकेगा जो आपको मिला ? जो मौका आपको मिला वो आगे भी समाज में किसी को मिले, इसके लिए आपको अपनी जीत का एक हिस्सा अपने समाज के साथ बांटना चाहिए। जो कि बहुत लोग नहीं करते हैं। इसलिए राष्ट्र income tax की व्यवस्था की जाती है आप जितना कमाओगे उसका एक हिस्सा आप सरकार को दोगे ताकि वो समाज के development में राशि खर्च कर सके।

पर जब सरकार हमसे tax लेती है, और से समाज के development में खर्च करने की कोशिश करती है, तो बहुत सारे लालची लोग उसे हमारे समाज तक पहुंचने से पहले ही घपला मार देते हैं।
ऐसे में अगर हम सरकार से यह बोले कि हमारी कमाई का वो हिस्सा जो हमारे समाज के development के नाम पे हमसे ले रहे हो उसे वापस करो, हम अपने समाज के development की authority खुद लेंगे, तो...? इसके लिए होता है tax rebate. जो कि tax payers को दिया जाता है उनके social expenses पर।

मैं जब अच्छी कमाई करने लगूंगा, मै भी अपनी कमाई का एक हिस्सा समाज के development के लिए खुद खर्च करूंगा और सरकार से tax rebate लूंगा। इसके लिए मुझे एक NGO की जरूरत होगी। जिसके अन्दर मेरा खास ध्यान शिक्षा क्षेत्र में कुछ करने को होगा। जैसे कि-
•गांव में एक library,
•असक्षम परिवार के बच्चों के सालाना admission खर्च,
•सरकारी विद्यालय के शिक्षकों की कमी की पूर्ति के लिए trainees को heir करना,
और भी छोटी-मोटी चीजों को करते हुए उस NGO को manage करना...।

पर ये तो मैं तब करूंगा जब मैं खुद अच्छी कमाई करने लगूंगा। मेरे मित्र, जो सक्षम है ये सब करने के लिए, तुम्हारा सालाना आय का एक हिस्सा सरकार tax के रूप में लेती ही है। जिसका कैसा इस्तेमाल हो रहा है, तुम भी जानते हो हो। तो मेरे इस post को पढ़ने के बाद तुम खुद सोचों कि क्या तुम अपनी social accountability अपने हाथ में लेना चाहोगे या सब कुछ ऐसे ही चलते रहने दोगे ? अगर तुम अपना वक़्त नहीं दे सकते हो तो तुम मौजूदा NGOs से जुड़कर ये काम कर सकते हो, जिनपर तुम trust कर सको कि वो तुम्हारे donations का misuse नहीं करेंगे, तुम्हें report करेंगे और समाज में अच्छा काम कर रहे हैं।

मेरी सोच चार दिवारी में चंद लोगों के बीच सिमटी हुई नहीं है। जिन्हें वक़्त ने साबित किया है कि वो मुझसे बेहतर है, क्या मैं उनसे यह उम्मीद कर सकता हूं ?

जब मुझे वो मिली जो मेरे ख्वाबों के जैसी थी, मैंने wish की कि अगर वो मुझे मिलती तो मैं अपने ख्वाब छोड़ देता। मैं सिमट कर रह जाता उसके ख्वाबों में जीने के लिए और उसके ख्वाब को हकीकत बनाने के लिए। पर अब उसे हारने के बाद मैं अपने जिद्द को लेकर आगे बढूंगा। मैं कोई boundary में कैद नहीं रहूंगा, मैं वक़्त के साथ सारे limits तोड़ दूंगा। इसे यहां तक पढ़ने वाले मेरे दोस्त, तुम्हें क्या चाहिए ? तुम क्या करोगे ?

-AnAlone Krishna
10th July, 2025 A.D.

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