I, Krishna, present you here, my 100+ literary works—poems and stories. I hope, I shall plunder your heart by these. Let you dive into my imaginary world. I request you humbly to give your precious reviews/comments on what you read and please share it with your loved ones to support my works.

🙏🏽 Thanks...! 🙏🏿

What's new/special message for the readers...👇🏿

"Life की परछाई: Chapter 4Chapter 5Chapter 6Chapter 7 • Chapter 8 • Chapter 9" has published on 8th August, 2025. Page के सबसे अंत में UPI QR code लगा हुआ है, अगर आप मेरे काम को अपने इक्षा के अनुरूप राशि भेंट करके सराहना चाहते हो तो, आप उसे scan करके मुझे स्वेक्षित राशि भेंट कर सकते हो। जो आप वस्तु भेंट करोगे, वो शायद रखा रह जाए, परंतु राशि को मैं अपने जरूरत के अनुसार खर्च कर सकता हूँ। ध्यानवाद !
Specials
-------------------->Loading Special Works...

Day 78: Removed part of "Life की परछाई : Chapter-4" | Diary of AnAlone Krishna

 __________Day 78__________

Removed part of "Life की परछाई : Chapter-4"

यह part Chapter के lore में fit नहीं हो रहा था। यह concept कुछ ज्यादा ही heavy हो रहा था। मुझे story में different lessons and theories ko देते हुए भी उसे light रखना था। इसलिए मुझे इस part को हटाकर दोबारा लिखना पड़ा। पर यह lesson भी आपको कुछ सिखा सकता है, इसलिए आपके लिए इस note में इसे share कर रहा हूँ।

----------
अभिषा सलोनी को बोलती है, "मैं अपने घर में देखती हूँ- पापा कमा कर लाते हैं, मम्मी उसे उसे खर्च करती है; मम्मी हमारे जरूरतों का ख्याल रखती है; पापा समाज में, देश में घटनी वाली घटनाओं और लिए गए फैसलों का क्या प्रभाव हमारी family पड़ेगा इसका ख्याल रखते हैं। पापा जब काम पे जाते है, उस वक्त अगर हमे किसी की जरूरत पड़ जाए, तो इसके लिए वो समाज के लोगों से अच्छा संबंध बनाकर रखे हैं। जब भी कोई खुशी का मौका होता है, वो सभी को अपने घर खाने के लिए invite करते हैं। हमारी खुशियों में वो शामिल हो, इसके लिए मम्मी उनके घरों के दुःख-सुख में जाकर साथ देती है। पापा पर पूरी से निर्भर होने से हमारी हर इक्षा और शौक पूरे नहीं हो सकते हैं, हम वक़्त के साथ जरूरत के हिसाब से सारी सुविधाएं नहीं ला पाएंगे परिवार में, इसलिए uncle risk लेकर नई नई चीजें आजमाते है। Family भी उनको support करती है। चाची को घूमने का शौक है, नई-नई चीजें देखने का, पढ़ने का, अलग-अलग चीजों को आजमाने का, इसलिए वो किताबें, fashion, arts, movies, सभी का शौक रखती है। इससे हमें भी फायदा हुआ वक्त के हिसाब से अपने घर को renovate करने के time, जब हम कपड़े खरीदने जाते है, जब कोई सामान मंगाना होता है, जब हमें किताबें समझ में नहीं आती है और जब हमें marks कम आते थे। मैं जब अपने age के लड़के-लड़कियों को देखती हूँ, सभी अपने ख्वाबों में उलझे हुए हैं। किसी को भी family need, stable income, family growth, diet and nutrition, social relations, education, वक़्त के साथ बदलना/ढलना, family के लिए चीजें ले कर आना, इन सभी का अहसास ही नहीं है।"
सलोनी बोलती है, "कहां से होगा, वो ये सब देखी ही नहीं है तो।"
अभिषा कहती है, "ऐसे में किसी ऐसे इंसान की उम्मीद करना जो कि मेरी तरह सोच रखता हो, वो भी किस्मत से, कैसे मुमकिन है ?"
सलोनी बोलती है, "तुम ज्यादा सोच रही हो। लोग अपने अनुभवों से सीखते हैं। उन्हें अभी यह अहसास नहीं है, पर जब जिम्मेदारी आएगी तो वो भी इस चीज को सीख जाएंगे।"
अभिषा बोलती है, "तुम्हें लगता है ? जो इंसान पहले नासमझ हो, वो जिम्मेदारी आते ही समझदार हो जाएगा... वो अपनी नासमझी में जिम्मेदारियों को जैसे तैसे पूरा करने के चक्कर में सबकुछ उलझा नहीं देगा ?"
सलोनी उसे बोलती है, "मैं अब भी यही कहूंगी कि तुम बहुत ज्यादा सोच रही हो। मैं तो कहूंगी कि तुम बस मुझे और खुद को भटका रही हो। तुम बस मेरे सामने समझदार बनने का कोशिश कर रही हो और यह बात accept नहीं करना चाह रही हो कि तुम क्या चाहती हो।"
अभिषा बोलती है, "क्या ? तुम्हें क्या लगता है, मै क्या क्या चाहती हूं ?"
सलोनी अभिषा को explain करती है, "तुम्हें अपना खुद का परिवार और बच्चा चाहिए।"
----------
The complete story of "Life की परछाई: Chapter-4" will be available on my blog-https://krishnakunal.blogspot.com from 8th August, 2025
Read "सलोनी की खुशबू" before the upcoming chapters, for a different experience and learning of life. https://krishnakunal.blogspot.com/2025/05/SaloniKiKhusbu.html इसे अगले next chapters से पहले पढ़ने से अपका दुनियां को देखने का नजरिया बदल सकता है। अगर आप "सलोनी की खुशबू" को इन chapters के बाद में पढ़ोगे तो शायद वह उतना effective ना हो आपके personality growth के लिए।

-AnAlone Krishna
5th July, 2025 A.D.

0 Comments

I am glad to read your precious responses or reviews. Please share this post to your loved ones with sharing your critical comment for appreciating or promoting my literary works. Also tag me @an.alone.krishna in any social media to collab.
Thanks again. 🙏🏻

Newer Post Older Post
WhatsApp Logo
```