__________Day 69__________
To the school management, and parents1.
एक 3-4 साल का बच्चा बहुत ही interest के साथ सभी से पूछता फिरता है, "यह क्या है ?" "यह क्या है ?" उसके अंदर अपने आसपास दिखने वाले चीजों को जानने की बहुत उत्सुकता होती है। फिर ऐसा क्या होता है कि जब वह school जाना शुरू करता है तो उसके अंदर चीजों को जानने की उत्सुकता मर जाती है, या वह पढ़ाई से दूर भागने लगता है ?
Answer-
इसका कारण है उसे bad schooling experience मिलना। बच्चों को उम्मीद होती है कि जब उसके teachers classroom में आए, तो उन्हें कुछ नया सीखने को मिले, बेहतर experience मिले। पर जब class में teachers बिना preparations के आते है, teachers के prepare होकर classes start करने से पहले बच्चों को काफी wait करना पड़ता है, उन्हें ऐसा लगता है कि उनका maximum time बस waste हो रहा है, उन्हें attention नहीं मिल रहा है, किसी perticular बच्चें को ज्यादा priority मिल रहा है और उसे कम, उन्हें मौका नहीं मिलता है कि वो teachers से frank होकर अपने queries पूछ सके; तो बच्चों का धीरे-धीरे यह उम्मीद मर जाता है कि school में teachers उन्हें कुछ सिखाएंगे। इसलिए वह school, textbooks, and teachers से दूर भागता है। पर उसका interest नहीं मरता है, वरना वह हर 30 sec कुछ नया, कुछ और नया जानने की उत्सुकता में घंटों बैठकर reels क्यों देखता ?
2. कोई भी 7-8 साल का बच्चा अपने आस-पास होने वाले सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक गतिविधियों को जानने, समझने, और करने के लिए बहुत आतुर रहता है। वो हर चीज में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेने के लिए उत्सुक होता है। पर ऐसा क्या होता है कि वह अपने secondary education period को पार करते-करते इन सभी से दूर भागना शुरू कर देता है, School functions में participate करना कम या बंद कर देता है, सामाजिक गतिविधियों से अपने आप को काटना शुरू कर देता है, और सबसे बड़ी बात कि वह इतिहास, भूगोल, Economics, Political Science, Literature के class में ध्यान देना बंद कर देता है ?
Answer-
इसका भी कारण है उसे bad schooling experience मिलना। जब बिना preparations के teacher classroom में पढ़ाने आते है, वो energetic नहीं होते class में, unnecessarily बच्चों का time waste करते है अपने bad routine and curriculum management से, और time पे सही से course complete नहीं करते है; तो सबसे पहले अपने teenage की वजह से बच्चों का दिमाग classroom में कम और अपने ख्यालों में ज्यादा रहता है। हर subjects में जो chapters/units/topics/points skeep किए जाते हैं वो उन बच्चों का base खराब करता है और previous knowledge के damage हो जाने से बच्चे new informations को co-relate करके समझ नहीं पाते हैं। और क्योंकि उन्हें चीजें समझ में आनी कम हो जाती है तो उनका classroom में interest भी घटने लगता है।
3. Teenage में जब बच्चें ख्वाब देखना शुरू करते है तो अपने interest की चीज़ों को जानने, समझने, और उसे practicle life में apply करने का कोशिश करते है। पर ऐसा क्यों होता है कि वो बाकी subjects पर ध्यान देना कम कर रहे है और यह नहीं समझते है कि बाकी subjects भी उनके life के लिए उतना ही जरूरी है जितना कि उनका पसंदीदा subjects ?
Answer-
इसका भी कारण है उसे bad schooling experience मिलना। जब teachers बिना preparations and revision के classroom में आते है तो वो अच्छे से topics को explain नहीं कर पाते हैं, practicle life और other subjects के साथ co-relate नहीं कर पाते हैं। जिसकी वजह से students के अंदर बाकी subjects को लेकर interest घटने लगता है और और वो बाकी subjects को useless समझने लगते हैं।
Reason-
इसमें गलती सिर्फ teachers की नहीं है जो prepare होकर नहीं आते हैं। इसमें सबसे बड़ी गलती school management की होती है जो teaching works की निगरानी में लापरवाही करते हैं और workload balance करना उन्हें नहीं आता या करना जरूरी नहीं समझते। सबसे पहले तो management को यह बात समझना चाहिए कि कोई भी इंसान continuously 7 period यानी कि 6-7 घंटे energetic होकर, well prepared तरीके से अपना काम सही से नहीं कर सकता है। इसलिए इसलिए उन्हें दो-तीन घंटे के बाद refreshment होने का और revision करने का मौका मिले।
आजकल के parents भी school के नाक में दम करके रखते है, उन्हें हर एक चीज का update चाहिए कि teachers classroom में क्या कर रहे हैं। अगर teachers बच्चों के सामने खड़े होकर अपना mobile निकालकर parents के लिए हर class के whatsapp groups में यह type करेंगे कि आज का classwork क्या था, topics क्या पढ़ाए, home work क्या दिए, तो वो उस time को जिसमें वो बच्चों को कुछ पढ़ा सकते थे उसे waste नहीं कर रहे है ? इसका बच्चों पर क्या असर होगा ? यह parents को समझना चाहिए।
Solution-
1. सभी teachers अपना syllabus तैयार करे। ताकि उन्हें यह plan करने में मदद मिले कि वो अपने पढ़ाए lessons को कैसे school के extra co-curricular activities के साथ co-relate कर सकते हैं। साथ इससे उन्हें time पर syllabus cover and revision करने में मदद होगा।
2. Teachers पूरा energerically होकर preparations and planning के साथ अपना classes लें सके उसके लिए management उन्हें बीच में interval दे, या यूं कहे तो उन्हें leager period मिले।
3. Teachers classroom में सिर्फ पढ़ाए और पढ़ाई के साथ engage रखे बच्चों को, इसके लिए teachers का अपना extra works जैसे कि notebook/ assignments/test copies check करने के लिए leager period दिया जाए।
4. अगर किसी दिन teachers का अपने किसी भी mental/physicall/psychological anxiety की वजह से mood ठीक ना हो, energetic ना हो तो उस दिन वो classes में जाकर बच्चा का दिन खराब ना करे। ऐसे में next day से बच्चे class में interest show करना कम कर देंगे। इसलिए इसकी जगह उनके लिए library, या sports की classes arrange कर दी जाए। ताकि बच्चों को कभी भी ऐसा ना लगे कि उनका school में आकर time waste होता है।
5. Class teachers अपने class के सारे subject teachers से syllabus का update लेते रहे, और examination head को इसका report देते रहे। ताकि ज़रूरत के हिसाब के extra classes की arrangements की जा सके।
Limitations-
1. Students-teachers, या no of students per classroom section सही होने चाहिए। तभी teachers हर students पर सही से ध्यान दे पाएंगे।
2. Per 3 classroom 1 extra teacher hona चाहिए। तभी leager period balance हो पाएगा।
3. Work distribution सही हो ताकि किसी perticular person के ऊपर work load ज्यादा ना हो और हर चीज उसपर depended ना हो जाए।
4. Sports, music, art teacher, librarian extra होंगे तभी anytime and anyday उनके substitute classes लगाए जा सकते हैं।
5. सबसे जरूरी, teachers की salary अच्छी हो ताकि वह अपने घर के tension school में लेकर ना आए। इसपर parents को ध्यान देना चाहिए। ताकि अच्छे teachers school छोड़कर ना जाए और उनके बच्चों का पढ़ाई जिससे disturb ना हो।
और भी बहुत कुछ है। पर आज के लिए इतना ही।
-AnAlone Krishna
10th November, 2024 A.D.
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