Day 67 | Diary of AnAlone Krishna

Thursday, August 15, 2024 0 Comments

 __________Day 67__________

Today's Second Dream
मुझे आज रात दो ख्वाब आए, जिसमें से दूसरा है कि👇🏻

किसी शहर एक परिवार है। उसमें दो बच्चें और उनके माता पिता है। बच्चों में बड़ा लड़का 6-7 साल का और छोटी बच्ची 3-4 साल की है। वह परिवार बहुत ही सुखी है, आपस में बहुत प्यार है। पर एक announcement होती है कि सभी तुरंत शहर खाली कर दे, वहां nuclear explosion होने वाला है। वो सभी बहुत दूर जाने की तैयारी करने लगते है। वो अपने सबसे ज्यादा जरूरी चीजें जैसे की पहचान पत्र, property documents, computer database, खाने के items, कपड़े pack करने लगते हैं। तभी कुछ लोगों को शहर में रोका जाता है ताकि वो बुजुर्गो, बच्चो, और महिलाओं को safely शहर से निकाल सके। उसके लिए उस परिवार के पिता को रोका जाता है। वह पिता अपनी पत्नी के साथ बच्चों को शहर से दूर भेजता है, और शहर से लोगो को जल्दी से जल्दी निकालने में मदद करने लगता है ताकि वो भी जल्दी से निकल सके। पर कुछ लोगों को निकालने के बाद उस पिता को यह खबर लगती है कि उनके leaders को इसमें भी राजनीति करती है। वह पहले वहां के घाट में जाकर सभी मारे लगे लोगों को श्रद्धांजलि देगा फिर वो उस शहर से जायेगा। उस पिता को गुस्सा आता है कि कम से कम समय में लोगों को निकाल कर उसे अपने परिवार के पास जाना है पर उनके leaders ऐसे serious situation में भी time waste करवा रहे हैं। श्रद्धांजलि देने के लिए उन leaders के साथ काफी कार्यकर्ता भी शामिल होते है। यानी कि शहर खाली कराने में और ज्यादा आफत की बात है। पर तभी announcement होती है कि nuclear explosion का timing बदल गई है, अब 1 घंटे में होने वाली है। यह सुनकर सभी में अफरा तफरी मच जाती है। पर आधे घंटे में nuclear explosion का light चमकती है और आवाज आती है। फिर wave आने लगता है। सभी दुकानें, बंद कमरे, etc में जहां लगा मिले घुसने लगते है बचने के लिए। दो-चार minute में nuclear explosion का wave उस शहर से होकर गुजरता है। सबकुछ धुआं हो जाता है। वो लोग जो किसी किसी भी building में छिपे थे, wave की ताप से चांद seconds में पिघल गए और वहां बस हड्डियों का ढेर बचा और उसके साथ सिर्फ मलबे और dust ही रह गए।
महीना बीता, अब वो छोटा बच्चा-अपनी छोटी बहन के साथ अपने किसी रिश्तेदार के यहां खाना मांगने के लिए पहुंचा हुआ है। उसकी मां उस explosion के बाद से लापता है। कुछ लोग उन बच्चों को कोसते हैं कि काश ये भी उस धमाके में अपने मां बाप के साथ मर ही गए होते। पर एक महिला उस बच्चें को खाना देते हुए बोलती है, "क्या करेंगे बेचारे ! इनकी मां इनकी बिना परवाह किए इन्हें यहां छोड़कर अपने पति के पीछे उसे ढूंढने चली गई।"
उस महिला की बेटी उस बच्चें को और खाना देती हुई बोली, "कि यह तुम्हारी बहन के लिए।"
उस महिला का छोटा बेटा, उसे और खाना देते हुए बोला, "जब भी भूख लगे आकार हमारे घर खा लेना।"
वह छोटा बच्चा उस खाने को अपनी छोटी बहन को खिलाते हुए दुःख से अंदर ही अंदर रोते हुए बोलता है, "मैंने तुम्हें promise किया था कि तुम्हें हमेशा खुश रखूंगा, तुम्हारी हर इक्शा को पूरा करूंगा, मैं तुम्हारी खुशी के लिए मम्मी-पापा से भी लड़ जाऊंगा, मैं अपनी pocket money बचाकर तुम्हारे लिए gifts खरीदूंगा। पर मैं तुम्हे तुम्हारा मनपसंद और तीनों time भर पेट खाना भी नहीं खिला पा रहा हूं।"
और वह छोटी बच्ची पूरा दुःख से पूरा भर जाती है। उसके आंखों में आंसू होते हैं, इतना कि उसके आंखों के साथ साथ नाक भी डबडबाए होते हैं। पर वह यह सोच कर कि पहले जो उसका भाई अपनी हर एक खुशी के लिए मम्मी पापा से जिद्द करके मनवाता था, आज वह उसको खिलाने के लिए घर-घर जाकर अपना हांथ फैलाकर खाना मांगता है, अपने भाई के हाथों से खाना खाते हुए हिंचकती है पर रोटी नहीं है। आंखो में आंसू है पर वह रोती नहीं है। उसके जगह उसके नाक बहते है।

पहले जब मैं इस तरह का ख्वाब देखता था, तो तुंरत सुबह उठते ही उन themes पर story develop करना शुरू कर देता था। मैं इन्हें अपनी story लिखने की प्रेरणा मानता हूं। पर इसके लिए फिलहाल मेरे पास वक्त नहीं है। फिलहाल इतना लिख कर रख ले रहा हूं, अगर जीवन में अवसर मिलेगा तो इस theme पर एक अच्छी कहानी develop करूंगा।

#nuclearwar

Happy Independence Day to us, the Indians.

-AnAlone Krishna
15th August, 2024 A.D.

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