अगर मानों तो नफ़रत, अगर ना मानों तो खता...
जब भी कोई हमसे झगड़ने आता है, हम यह मान लेते हैं कि उसका व्यवहार ही ऐसा है कि उसे हर किसी से परेशानी होती है। उसे झगड़ा करने की आदत है और बेवजह सबसे झगड़ते फिरता है। तो उससे हम hate करेंगे। झगड़े के problem को solve नहीं करेंगे बल्कि उसे जीतना चाहेंगे।
लेकिन अगर हम यह समझने की कोशिश करे कि अगर किसी को हमसे परेशानी है तो वह क्यूँ है, तो हम पाएंगे कि there is some misunderstandings between us, इसलिए यह झगड़ा है। हम समझने की कोशिश करेंगे कि आखिर हमसे गलती क्या हो रही है। जिससे हम problem को सुलझा रहे थे।
6th June, 2021 A.D.

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