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"Life की परछाई: Chapter 4Chapter 5Chapter 6Chapter 7 • Chapter 8 • Chapter 9" has published on 8th August, 2025. अगर आपको online reading में असुविधा होती है, और आप इसे printed form में पढ़ना चाहते हो, तो post के bottom में दिए 'Download and Print' button को click करके आप उसका printout करवा लेना। जिसमें 'Download and Print' button नहीं है उसके लिए आप 'Google form' को भरकर मुझे send कर दो, मैं आपको pdf भेज दूंगा। इसके अलावा सबसे अंत में UPI QR code भी लगा हुआ है, अगर आप मेरे काम को अपने इक्षा के अनुरूप राशि भेंट करके सराहना चाहते हो तो, आप उसे scan करके मुझे राशि भेंट कर सकते हो। जो आप वस्तु भेंट करोगे, वो शायद रखा रह जाए, परंतु राशि को मैं अपने जरूरत के अनुसार खर्च कर सकता हूँ। ध्यानवाद !
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Day 27: Suggestions to the youngsters | Dairy of AnAlone Krishna

 __________Day 27__________

पहले मुझे भी यही लगता था कि feelings, emotions इंसान को कमजोर बनाते हैं। इन्हें control में रखनी चाहिए, और मैंने इन्हें रखने की कोशिश भी की। अगर देखा जाए तो मैं इसमें काफी हद तक कामयाब भी हो गया। But इन्हें अपने अंदर दबाने से इसका side-affect भी होता है। आप unconsciously mistakes करने लगते हो, जिसका बुरा असर सिर्फ आपके life में नहीं पड़ता, बल्कि औरों के life पर भी पड़ता है। आपकी बातें और आपके actions match नहीं होने लगते है, जिससे लोग आपको समझ नहीं पाते या गलत समझ लेते हैं। जिसका नतीजा आपके life में problems पे problems create करते चले जाता है, कभी यह solve नहीं होता।
जो भी मुझे थोड़ा बहुत अच्छे से जानते हैं, मेरे बारे में कहा जाता है कि मैं feelings or emotions से परे हूँ, यानी कि अगर साफ शब्दों में कहूँ तो मुझे कभी प्यार-मोहब्बत नहीं हो सकता। उन्हें लगता है कि मैं जज्बाती नहीं हूँ, मुझे कभी इश्क़ नहीं हो सकता, मैं इन झंझटों से दूर रहता हूँ।
मगर सच कहूँ, ऐसा बिल्कुल नहीं है। पता नहीं कि तुमलोग समझोगे कि नहीं, पर मैं यह कहना चाहता हूं कि, बस मैंने emotions को control करने की कोशिश की, feelings को कभी दबाया, आज इसका नतीजा यह है कि मुझे इन्हें express करना नहीं आता। मैं कहना यह चाहता हूँ कि, मैं कुछ भी express करने से पहले भी सोंचता हूँ, काफी सोंचता हूँ, और जब तक यह समझ आता है कि मुझे क्या करना चाहिए, वक़्त निकल चुका होता है। फिर मेरा कहने का कोई मतलब ही क्या रह जाता है, इसलिए मैं अपनी बात कभी नहीं कह पाता। ऐसा नही है कि मेरे दिल में किसी के लिए कभी कोई emotions नही आये, कभी किसी के लिए कुछ feel नहीं किया। बस मुझे यह express करना नहीं आता इसलिए कभी इन्हें ठीक से express नहीं कर पाया, या किया भी तो मेरे बातों और actions में differences की वजह से जिनके सामने किया उन्हें यह मजाक लगा। कभी किसी ने भरोसा ही नहीं किया कि मैं भी किसी के लिए कुछ feel कर सकता हूँ, मेरे अंदर किसी के लिए कोई emotion हो सकता है, या मुझे भी कभी किसी के लिए प्यार हो सकता है। क्यूँकि मैंने इन्हें अपने अंदर कभी दबाने की कोशिश की तो आज मुझे इन्हें express करना नहीं आता।
मैं नहीं चाहता कि यह गलती आपलोग भी करो। मैं चाहता हूँ कि आप अपनी feelings or emotions को accept करना सीखो, इन्हें express करना सीखो, फिर जो सामने वाला person express करे उसे accept करके move करना भी। मैं भी सीखने की कोशिश कर रहा हूँ। यकीन मानो इससे आपके दिल में फिर कभी कोई guilt नहीं बचेगा और अपने feelings or emotions को control में रखने का side effect बाकी रिश्तों में होना कम हो जाएगा।

1st June, 2021 A.D.

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