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| Constituent Assembly of India, formed in November, 1946 |
सोचों इस देश के संविधान लिखने वाले कितने futuristic थे कि उन्होंने इस देश को बाकी पश्चिमी देशों की तरह Power of Government को centralised रखने के बजाए decentralised बनाया है। यानी कि अगर अमेरिका जैसा देश जैसे बाकी देशों में तख्ता पलट कर रहा है, अगर वो यह कोशिश भारत में करेगा तो वह सफल नहीं हो सकता है। क्योंकि ऐसा करने के लिए उन्हें देश को politically polarised करना होगा, जो कि इतने सारे different ideological political parties की वजह से impossible है।
इसके लिए मौजूदा वैश्विक situation को देखते हुए हमारे देश के संविधान निर्माताओं पर हमें गर्व महसूस होता है।
हमें यह समझना चाहिए कि हमारे विभिन्नता में ही अखंडता है। इसलिए हमें एक दूसरे के ideology, culture, भाषा, रीति-रिवाज़ो, मान्यताओं, धर्मों, जातियों,... का सम्मान करना चाहिए।
हमारी बहुरूपता हमारी ताकत है कि अगर समाज का एक वर्ग विदेशी विचारों से भटकता है तो हमारे समाज का अन्य भाग स्वदेशी देशभक्ति पर जोर देता है।
अगर हम अपने देश को एक रंग में रंगेंगे, और वो(विदेशी ताकतें) अगर किसी भी साम (बहकावे), दाम(सत्ता/सम्मान का लोभ), दंड (उसके दोस्तों का विदेशों कानूनों में दोषी पाए जाना), भेद (for example, Epistine file/Pegasus में lust का proof) के जरिए हमारे supreme leader को compromised कर लेगा, तो देश compromised हो जाएगा।
इसलिए हमारे देश के नागरिकों को यह ध्यान देना होगा कि central government और state government हमेशा अलग political parties से हो, ताकि सत्ता balance हो सके।

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