__________Day 82__________
यह किस्सा है जब मैं June-July, 2024 में अपने B.Ed. training के लिए S.S. High School, Gola जाता था। उस वक्त 9th के बच्चों का admission चल रहा था। As usual हमें training के दौरान दिन में 4-5 classes दिए जाते थे, और बाकी time हमलोग TCR में self study करते थे, lesson plans बनाते थे, और school teachers की non-teaching activities जैसे कि attendance maintain करने, weekly test copies check करने, TLM बनाने, इत्यादि में मदद करते थे। एक तरह से यह जरूरी भी था, क्योंकि जिन classes को हमलोग लेकर आते थे, उनके बच्चो के test performance से हमे अपने teaching practice को improve करने में help होता था।
एक दिन last period में अफरा-तफ़री में ममता Ma'am जो कि उस वक्त class 9th की class teacher थी, वो बच्चों के admission papers को लेकर आई। हमारे सामने files को रखी और बोली कि इन्हें alphabetically arrange करना है। मैं bundle से कुछ papers को उठाने के लिए अपना हाँथ आगे बढ़ाया, वो मेरे हाँथ में मार दी मुझे रोकने के लिए। वो थोड़ा-थोड़ा करके हम सभी trainees को कुछ-कुछ papers दी। फिर वो बोली कि "मैं alphabetically बोलते जाती हूँ, तुम बच्चों के नाम देखकर उन forms को निकालकर मुझे देते जाओ। इस process में काफी time लगने वाला था। यह काफी बारीकी से किया जाने वाला process था। उनका यह direction सुनकर इससे मुझे थोड़ा stress हो रहा था। और मेरे habitat में हो गया है, मुझे जब भी stress होने लगता है, मैं परेशान होने लगता हूँ, चीजें मेरे हाँथ से जाने लगती है, तो अपने-आप मैं smile करने लगता हूँ।
But मुझे smile करते हुए देखकर मुझे बोली, "Why are smiling Krishna ?"
उनके गंभीर आवाज, घूरती हुई आँखें, माथे पर लकीरें देखकर मुझे ऐसा महसूस हुआ कि शायद उन्हें ऐसा लगा रहा है कि मैं उन्हें परेशान देखकर मैं उनपर disrespectfully smile कर रहा हूँ। जबकि ऐसा नहीं था, मैं अपने seniors के respect करता हूँ। बस मैं उनके बताए process से परेशान हो रहा था, क्योंकि मैं उनके direction को समझ गया था, मेरे सामने बाकी co-trainees के gesture से मुझे लग रहा था कि वो गड़बड़ करेंगे और इसमें समय भी बहुत ज्यादा लगने वाला था। मैं ममता Ma'am को बोला, "Ma'am, मैं forms को arrange कर दूंगा, आप tension मत लो।"
ममता Ma'am थोड़े से घूरते हुए बोली, "तुम करोगे ? सभी कोई मिल कर करो तब जल्दी होगा।"
पर उससे भी जल्दी नहीं होने वाला था, इसलिए मैं बोला, "Ma'am, ज्यादा वक्त नहीं लगेगा, बस आप मुझे यह अपने according करने दो।"
उसके स्वभाव से मुझे लग कि वो यह देखना चाहती थी मैं क्या करने वाला हूँ। मैं अपने co-trainees को बोला, "Ma'am, आपके पास जो थोड़े-थोड़े forms है, आप सबसे पहले उन्हें alphabetically arrange कर लो।"
ममता Ma'am बोली, "मुझे सारे forms एक ही bundle में alphabetically चाहिए।"
मैं उन्हें बोला, "Ma'am, वो हो जाएगा। पहले हमलोग थोड़े थोड़े forms को alphabetically arrange कर लेंगे तो उसे बाद सभी से alphabetically forms को pick करके arrange करना easy होगा।"
मैं अपने co-trainees को बोला, "पहले अपलोग उन forms को alphabetically arrange करो जो आपके पास है, उसके बाद A,B,C,D,... करके सभी को हमलोग एक साथ मिलाते जाएंगे।"
ममता Ma'am हमें फिर वह करने को बोलकर वहां से चली गई। पर जितनी देर वो थी, मेरे लिए stress का माहौल था। क्योंकि मुझे यह डर लग रहा था कि कहीं मेरा smile करना उन्हें disrespectful ना लगा हो। मैं वहां कुछ वक्त के लिए था, और मैं अपने seniors के मन में अपना खराब persona बनाकर नहीं आना चाहता था। इसलिए मुझे काम को जल्दी पूरा करके वापस उनके mood को ठीक करना था।
मैं अपने पास के forms को arrange करके फिर अपने co-trainees के हाँथ से form लेकर उन्हें भी जल्दी-जल्दी arrange कर दिया। उन सभी के help से alphabetically सारे forms को एक bundle में arrage कर दिया। लेकिन थोड़ा bend करके, ताकि A list, B list, C list,... अलग-अलग दिखे। यह सब करने में हमें 4-5 min का भी समय नहीं लगा। ममता Ma'am TCR के बाहर थी। और bell बजने में अभी 10 min के आसपास time है। तो हम सोचें कि जो list है उसको और अच्छे से होना चाहिए। तो हम सभी एक-एक letters के list को उठाए और उसको भी alphabetically arrange करने लगे।
फिर ममता Ma'am आई और पूछी, "कितना तक arrange हुआ ?"
मैं उन्हें बताया कि, "सारे बच्चों का forms alphabetically एक बार arrange हो गया है। अब हमलोग जो एक-एक alphabets के बच्चों के list है, उन्हें chronologically arrange कर रहे हैं।"
वो पूछी, "A नाम से बच्चों के form एक साथ, B नाम से बच्चों के forms एक साथ,.., हो गया है ?"
Sneha Ma'am बोली, "हाँ Ma'am, हमलोग वो पूरा कर लिए हैं।"
मैं उन्हें आगे बोलने ही वाला था कि वो list को उठाकर देखी और बोली, "इसमें तो H से शुरू है।"
Varsha Ma'am बोली, "A वाले बच्चों के forms मेरे पास है Ma'am. B उनके पास, C उनके पास,... अब हमलोग इसमें arrange कर रहे हैं।"
ममता Ma'am बोली, "उतना करने का जरूरत नहीं है। A,B,C,D,... सभी का एक साथ है, काफी है।" और फिर हमारे हांथ से forms को लेकर वापस alphabetically रखने लगी। वो वापस confirmation के लिए मुझे देखकर पूछी, "सभी alphabetically है ना ?"
मैं कहां ,"जी Ma'am."
फिर वो बिना recheck किए, भरोसा करके bundle को बांधकर अपने drawer में रखते हुए बोली, "आज के help के लिए तुमलोग का thank you." और bell बजने वाला था तो वह चली गई।
उस दिन मुझे जिंदगी का बहुत बड़ा सबक मिला, जो मै अपनी पूरी जिंदगी याद रखूंगा। कुछ ना करके भी अंजाने में ही हमसे ऐसे actions कभी-कभी perform हो जाते हैं, कि हमारे सामने खड़े इंसान को वो disrespectful लगे/ उन्हें चुभे/उन्हें सामने हमारी bad persona बनाए। मुझे बहुत ज्यादा self aware होने की जरूरत है। क्योंकि अगर आगे से ऐसा कुछ हो, और समय रहते मुझे realise नहीं हुआ, या मैं उस situation को correct नहीं कर पाया, तो मुझे हमेशा इसका पछतावा रहेगा।
-AnAlone Krishna
18th September, 2025 A.D.
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