BBC News हिन्दी के इस प्रश्न पर मेरा जवाब-
मेरी बचपन की classmate, जिसे दिखाकर घरवाले ताना मारते थे कि, "वो लड़की होकर पढ़ाई/____ में ऐसी है, और तुम लड़का होकर हर चीज में उससे पीछे हैं।"
मेरा बचपन उससे बेहतर बनने में बीत गया। जब बड़ा हुआ तो समझ आया कि मुझे भी अपना competition खुद से ही रखना था, जैसे वह अपने आप से रखती थी। हमेशा पहले से खुद को बेहतर साबित करने में...
उससे बेहतर बनने की चाह में मेरे किरदार को वो आकार मिला, जो मैं आज हूं। जब यह ईर्ष्या खत्म हुई, तब मैं आजाद हुआ अपने हिसाब से ढलने के लिए।
-AnAlone Krishna
8th March, 2024 A.D.

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