मेरी मदद करो, कृष्ण कुणाल की लिखी कविता बिछड़ते दोस्तों के याद में।

Thursday, November 12, 2015 0 Comments

..मेरी मदद करो..
(बिछड़ते दोस्तों के याद में लिखी गई कविता)
-AnAlone Krishna.


..मेरी मदद करो..
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अकेला हूँ मैं यहाँ,
जाने तू हैं कहाँ ।
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होकर यूँ बेकरार,
करता रहा इन्तेजार ।
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देखते-देखते शाम हो गया,
रास्ता भी आँख से ओझल हो गया ।
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अकेले मुझे डर लगता हैं,
मेरे परछाई किसी और का साया लगता है ।
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कहकर गया था कि तुरन्त आऊँगा,
अकेले मैं किधर को जाऊँगा ?
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ठीक है तब किसी ओर चलता हूँ,
अकेले रास्ता ढूँढ़ने का कोशिश करता हूँ ।
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कोई भी जगह पर शरण ले लूँगा,
उसी को अपना मँजिल मान लूँगा ।
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मँजिल मुझे नही मिलेगी,
साँसे मेरी डरती रहेगी ।
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तो, फिर भी मेरे कदम चलेंगे,
और अपने अन्दर के डर से लड़ेंगे ।
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जब तृम यहाँ लौट कर आओगे,
मुझे तूम यहाँ ना पाओगे ।
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ना पाकार मुझे तूम ना घबराना,
जिस तरह मैं आगे बढ़ने जा रहा हूँ, तूम भी अपने life में आगे बढ़ जाना ।
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-AnAlone Krishna.
12/11/2015

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