_बता मुझे क्यूँ_
(मन की स्थिरता को बनाए रखने के लिए खुद से सवाल करते हुए)
-कृष्ण कुणाल की लिखी हुई कविता-
_बता मुझे क्यो_
आँसमानो का गुलिस्ता
मनमोहक लागे हैं,
दिल किसी ना किसी को
बड़ी सिद्दत से चाहे हैं ।
हर ख्वाहिश हो पूरी
ये हमेशा जरूरी नही,
मन से उपजा हर ईक्षा
हमेशा होता सही नही ।
जानते हैं हम, कि उसे मुझे
है कभी मिलना नही,
पर फिर भी ये दिल खुदा से
उसका माँगता दुआ काहे हैं ।
-AnAlone Krishna.
12/07/2015

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