Read first 👉🏻 Day 56
https://krishnakunal.blogspot.com/2023/10/day-56-diary-of-analone-krishna.html
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इस तरह का कोई भी ख्वाब जब मुझे आता है, मैं सामना करता हूं अपने अंदर के डर को, उन भावनाओं के ऊपर अपना नियंत्रण खोने के डर को... अपने अंदर की खामियों को, जिसका विश्लेषण करके मैं ख़ुद को बेहतर बनाने की कोशिश कर सकता हूं।
उस situation में जब मैं था, मुझे डर था कि अगर मैं हालातों के साथ बह जाता, तो फिर मैं वो नहीं रह पाता जो मैं पहले था और अब भी हूं। उसका एक अच्छा दोस्त। मैंने उसे promise किया है कि मैं जिंदगी भर उसका अच्छा दोस्त बनकर रहूंगा, इसलिए भावनाओं में बहकर मैं उससे किया promish नहीं तोड़ सकता था। मैं दोस्त से उसकी मोहब्बत नहीं बन सकता था। क्योंकि अगर मैं एक बार बन जाता तो फिर मैं कभी दोबारा उसका अच्छा दोस्त नहीं बन पाता। और अब मैं यह गलती फिर से दोबारा कभी नहीं करूंगा।
यह खेल था मेरे अंदर दबे कृष्ण, मेरे unconsciousness mind का। यह मुझे, मेरे consciousness mind को ऐसे ही मेरे ख्वाबों के जरिए अजमाता है। मुझे मेरी कमजोरियों से रूबरू करवाता है, और मुझे बेहतर बनने में मुझे मदद करता है।
Diary आईना होता है, पर आईना हमें 2D image ही बताता है। इसलिए मेरी Diary of AnAlone Krishna में भी कभी पूरी बात नहीं होती है। अगर आपको मेरे बात कभी clarity ना मिले तो मुझसे अपना सवाल करो और अपना concept clear जरूर किया करो।
मैं अपनी भावनाओं को बहुत नियंत्रित करके रखता हूं, इसलिए अगर मुझसे कुछ अधिक की उम्मीद हो तो मुझसे खुल कर कहो। ताकि मैं खुद को ना रोकूं और अपनी भावनाओं को बहने दूं। वरना मैं ऐसे ही खुद को नियंत्रित करता रहूंगा। जब तक मैं यह कर पाऊं।
-AnAlone Krishna
7th October, 2023 A.D.

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