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मेरे अंदर बैठे शिव और मैं (कविता)

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 मेरे अंदर बैठे शिव और मैं (कोई भी आत्मा ईश्वर को प्रतिस्पर्धा करके प्राप्त नहीं कर सकता है। ध्यान-योग-साधना मन की स्थिरता से पनपते हैं। विच...

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