मैंने एक बार एक story सुना था। वह एक case study था। उसमें बताया गया था कि-
एक बार भारत का एक नौजवान यूरोप के किसी देश में पढ़ने के लिए गया। वहाँ उसने street पे गुजरते हुए लड़की देखी, उसने उसे देखकर सिटी मारी। उस लड़की ने उसके ऊपर misbehaving का case कर दिया। क्योंकि वहाँ ऐसी बद्तमीजियों के लिए भी कानून है। तब उस लड़के ने सजा से बचने के लिए INDIAN embassy से एक वकील hire किया। जिसने उसे उस case से warning के साथ बचा लिया। उसने अपनी दलील दी कि यह जिस जगह से आया है वहाँ के culture में यही चीज सिखाया जाता है कि लड़की को सिटी मारो और लड़की पट जाएगी। फिर उसने यहाँ की कुछ फिल्में दिखाई और साथ ही कुछ famous leaders के statements सुनाई और दिखाई। जिससे उस नौजवान बचाने में मदद मिली कि यह उसकी नहीं, बल्कि उस समाज की गलती थी जिसमें वह पला बढ़ा था।
इसे सुनने के बाद मैंने अपने कई actions पर analysis करना शुरू किया। मुझे मेरी काफी गलतियों के बारे में realise हुआ, जो मैंने अपने इस महान देश के so much ancient and rich culture के influence में रहकर किया, या जो अब भी कर रहा हूँ। उनमें से एक यह भी था कि, मैंने कइयों को ज्ञान दिया सही और गलत उनके actions को देखकर, लेकिन जब मेरी खुद की बारी आई तो मैं खुद को justify नहीं कर पा रहा था उनके सामने। जिससे मैं एक बात तो समझ गया कि अगर अगर सही और गलत का चुनाव करना मेरे लिए इतना मुश्किल है, तो फिर उनसे... मैं बस खुद को better बनाने की कोशिश कर सकता हूँ, पर उन्हें... तो now, they are now innocent before me. वो अंजाने और अपनी नासमझी में गलती करते हैं। इसलिए उनसे नफ़रत नहीं, बल्कि हमें उनके प्रति sympathy रखनी चाहिए और उन्हें सुधरने का मौका देना चाहिए।
2nd November, 2021 A.D.
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