__________Day 36__________
What can I tody dream...
हमारे class में कोई नए teacher आये हुए हैं। उन्होंने कोई task दिया homework के लिए। कोई diagram या something like that. मैं school के बाद घर आया। रात में homework किये। मैं homework बना तो रहा था, but मुझे एक बात मन को खाये जा रही थी। I know, there were so many better artists then me in class. जाहिर सी बात है वो मुझसे better diagram बनाएंगे। और अक्सर ऐसा होता है कि उनके beautiful presentation को देखकर हम average students के marks कटते हैं। अगर हमें भी अच्छे marks मिल जाएंगे तो वो बेहतर कैसे कहलायेंगे । इसलिए हमेशा उनका बेहतर लगे, जो कि होती भी थी, इसके लिए हमने हमें कद्र नहीं मिलती। But सुबह कुछ ऐसा हुआ जो किसी ने expect नहीं किये। सभी ने अपना homework किया, मैंने भी किया हुआ था, जो submit किए। या यह homework नहीं, शायद कोई assignment था। उसमें marks दिए गए। जिसमें सबसे ज्यादा marks मेरे थे। सभी ने इसपर सवाल उठाया। तो teacher ने कहा कि तुम सभी ने अपना काम किया, सभी ने उसमें अच्छा किया। पर उसे अच्छे करने के चक्कर में तुम में से किसी ने diagram नहीं बनाया। उन्होंने excuse दिया कि "Sir, आप ही ने तो कहा था कि अगर time नहीं मिले तो बनाने की जरूरत नहीं है। और बाकी subjetcs के भी homework करने लिए। इसलिए time नहीं मिला तो हमनें नहीं किया।" तब teacher ने कहा कि, "लेकिन कृष्ण ने किया।" और मेरी तारीफ की। उन्होंने समझाया कि, "मैंने कहा था कि अगर, अगर time नहीं मिले तो मत बनाना। तुम सभी ने topics पे ध्यान दिया, और बेशक सभी उससे बेहतर हो। वह बस अच्छा है। But इसके चक्कर में तुमनें diagram नहीं बनाया है, जो कि उसने बनाया। जिसके लिए उसे उसे extra marks मिलने चाहिए, जो वह deserve करता है। इस वजह से उसके marks तुमसे ज्यादा है। और bell बजी और Sir चले गए। किसी का ध्यान Sir के समझाने पे नहीं गया। बस इस बात पर अटका रहा कि उन्होंने मेरी तारीफ की। उनके लिए यह बात unacceptable था कि कोई उनसे बेहतर हो सकता है, मैं उनसे बेहतर हो सकता हूँ। और वो सभी मेरे पीछे पड़ गए। जिसमें तंग अगर मैंने उनपर चिल्ला दिया... ये मेरा ख़्वाब था ना, तो मैं इसमें चिल्ला सकता था। वरना real life में मुझे इस तरह चिल्लाने का मौका कहाँ मिला ! मैंने कहा, "Daily सुबह-शाम तुम सभी के teachers गुण गाते रहते हैं और हमें नीचा महसूस करवाते रहते है। हमेशा कोई भी test, task, assignment करते वक़्त एक ही बात दिमाग में घूमते रहता है कि तुमलोग तो हम से better ही करोगे, हम कैसे अपने marks बचा सके। तुमलोग से ज्यादा नहीं ला सकता, पर अच्छे marks की उम्मीद तो हम भी करेंगे ही ना। आज accidentally तुमसे मेरे marks ज्यादा क्या हो गया, किसी को यह बात बर्दाश्त नहीं हो रहा है। तुमलोग मुझसे हारे नहीं हो, तुमलोग अभी भी मुझसे better ही हो। बस एक point पे मैं तुमलोग से आगे क्या बढ़ गया, जो उतना मायने भी नहीं रखता, फिर भी यह बात तुमसे यह बात accept नहीं हो रही।"
They all are my friends. And I never wants to make jealous them. और एक बात मैंने उसी वक़्त समझ ली थी। कि- "अगर कृष्ण हार कर उनके दिल में रह पाए, तो क्यूँ ना कृष्ण हार ही जाए।" I never wants to be better then them. मैं कभी जीतना नहीं चाहता था। मैं बस पढ़ना, सीखना, और समझना चाहता था with my good result. और ऐसे मैंने अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार ली।
1st November, 2021 A.D.
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